विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, “मानसिक स्वास्थ्य मानसिक सेहत की वह स्थिति है, जो लोगों को जीवन के तनावों से निपटने, अपनी क्षमताओं को पहचानने, बेहतर तरीके से सीखने और कार्य करने में सक्षम बनाती है।"
भारत में मानसिक स्वास्थ्य परिदृश्य
- व्यापकता: NIMHANS द्वारा राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NMHS) 2015-16 के अनुसार, 10.6% वयस्क मानसिक विकारों से पीड़ित हैं।
- जागरूकता की कमी, सामाजिक हेय भावना और पेशेवरों की कमी के कारण 70% से 92% लोगों को उचित उपचार नहीं मिल पाता है।
- आर्थिक हानि: WHO के अनुसार, 2012-2030 के बीच इसके कारण 1.03 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के आर्थिक नुकसान का अनुमान है।
- आत्महत्या की दर: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, 2023 में 1,71,418 आत्महत्याएं दर्ज की गई थीं।
- बढ़ती डिजिटल लत: मोबाइल एवं इंटरनेट के सार्वभौमिक उपयोग के कारण स्मार्टफोन, गेमिंग और सोशल मीडिया की लत जैसे व्यवहार बढ़ रहे हैं (आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26)।

भारत में मानसिक स्वास्थ्य से निपटने के लिए प्रमुख पहलें
- राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निम्हांस/ NIMHANS) अधिनियम (2012): बेंगलुरु स्थित 'NIMHANS’ को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया गया है।
- केंद्रीय बजट 2026-27 में NIMHANS-2 की स्थापना और रांची एवं तेजपुर में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों के उन्नयन (Upgrade) का प्रावधान किया गया है।
- राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम रणनीति (NSPS), 2022: इसका लक्ष्य 2030 तक आत्महत्या मृत्यु दर में 10% की कमी लाना है।
- वित्तीय सुरक्षा: आयुष्मान भारत PM-JAY के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों को प्रति परिवार 5 लाख रुपये वार्षिक बीमा के तहत कवर किया गया है।
- दिव्यांगजन अधिकार (RPwD) अधिनियम: दिव्यांगता की परिभाषा का विस्तार कर इसमें मानसिक बीमारी को शामिल किया गया है।
- राष्ट्रीय टेली मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (Tele MANAS): एक राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन के माध्यम से नि:शुल्क, 24/7 मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रदान करना।
- उपर्युक्त पहलों के अलावा, "संपूर्ण समुदाय" दृष्टिकोण अपनाने, स्कूल के पाठ्यक्रम में मानसिक कल्याण को एकीकृत करने और कार्यस्थल पर तनाव एवं 'मानसिक उत्तेजना' को दूर करने के लिए नीतियों को मजबूत करने की आवश्यकता है।