पश्चिम एशिया में जारी तनाव का भारत पर संभावित प्रभाव काफी गंभीर हो सकता है। सरकार ने इसके आर्थिक परिणामों का आकलन करने के लिए निर्यातकों और लॉजिस्टिक क्षेत्रक के अभिकर्ताओं के साथ अंतर-मंत्रालयी चर्चा की है।
इस संकट के भारत पर पड़ने वाले प्रभाव निम्नलिखित हो सकते हैं
- ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा: हॉर्मूज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंका बहुत चिंताजनक है, क्योंकि विश्व का लगभग 20% कच्चा तेल व्यापार यहीं से होता है।
- भारत की 85% LPG और 55% LNG हॉर्मूज जलडमरूमध्य से आती है।
- भारत अपने कच्चे तेल की जरूरतों का 85% से अधिक आयात करता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है।
- व्यापार पर प्रभाव: भारत के लगभग 56% वस्तु निर्यात पर अनिश्चितता का खतरा उत्पन्न हो रहा है। यह क्षेत्र भारत के लिए न केवल एक बड़ा बाजार है, बल्कि यूरोप और अफ्रीका जैसे क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण पारगमन गलियारा (Transit Corridor) भी है।
- आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान: पोत परिवहन मार्गों में बाधा आने से बीमा लागत और पारगमन समय बढ़ रहा है। इसका प्रत्यक्ष प्रभाव खाड़ी देशों के जेबेल अली पत्तन (UAE) और सलालाह पत्तन (ओमान) जैसे प्रमुख ट्रांसशिपमेंट केंद्रों पर पड़ रहा है।
- प्रवासी: खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों में कुल प्रवासी कामगारों में लगभग 30% हिस्सा भारतीयों का है।
- विप्रेषण: RBI के विप्रेषण सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार भारत को मिलने वाले कुल विप्रेषण (Remittances) का लगभग 19% केवल UAE से और 7% सऊदी अरब से आता है। कुवैत, ओमान और कतर का भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान है।
- कनेक्टिविटी परियोजनाएं: इस संकट से अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC), भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) और भारत द्वारा संचालित चाबहार बंदरगाह के विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।