भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने पुष्टि की है कि भारत में पूर्ण चंद्रग्रहण देखने को मिलेगा।
पूर्ण चंद्रग्रहण के बारे में:
- पूर्ण चंद्रग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की प्रच्छाया (Umbra) से होकर गुजरता है। प्रच्छाया छाया का सबसे गहरा भाग होता है।
- इस दौरान सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में होते हैं, जिससे सूर्य का सीधा प्रकाश चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता।
ब्लड मून के बारे में
- अर्थ: ब्लड मून से आशय चंद्रमा के लाल रंग जैसा दिखाई देने से है।
- कब होता है: यह पूर्ण चंद्रग्रहण के समय दिखाई देता है।
- कारण: यह पृथ्वी के वायुमंडल के कारण होता है।
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1 sourceअप्रैल–दिसंबर 2025 की अवधि में चालू खाता घाटा (Current Account Deficit-CAD) कम होकर 30.1 अरब डॉलर रह गया। वहीं, एक वर्ष पहले समान अवधि में यह 36.6 अरब डॉलर था।
CAD के बारे में
- चालू खाता घाटा वह स्थिति है जब किसी देश द्वारा वस्तुओं, सेवाओं का कुल आयात और धन-अंतरण (ट्रांसफर), उसके कुल निर्यात और विदेश से अर्जित आय से अधिक हो जाता है।
- इसमें शामिल होते हैं: वस्तुएं और सेवाएं, विदेशों में किए गए निवेश से प्राप्त आय, तथा एकतरफा अंतरण जैसे प्रवासी द्वारा विप्रेषण (रेमिटेंस) और विदेशी सहायता।
- चालू खाता घाटा, व्यापक भुगतान संतुलन (Balance of Payments) का एक हिस्सा है।
- भुगतान संतुलन किसी देश का शेष विश्व के साथ होने वाले सभी वित्तीय लेन–देन को दर्शाता है।
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1 sourceएक नए अध्ययन में बैक्टीरिया में जीन विनियमन (gene regulation) से जुड़े तथाकथित “σ (सिग्मा) चक्र” मॉडल को चुनौती दी गई है। साथ ही, इस अध्ययन ने बैक्टीरियल जीन विनियमन तथा उसके विकास को समझने के नए मार्ग प्रशस्त किए हैं।
σ (सिग्मा) चक्र के बारे में
- σ (सिग्मा) चक्र को लंबे समय तक बैक्टीरिया में जीन सक्रिय होने की एक सार्वभौमिक प्रक्रिया माना जाता था।
- लंबे समय से स्वीकार किए गए इस मॉडल के अनुसार, सिग्मा फैक्टर RNA पॉलिमरेज़ से जुड़कर प्रतिलेखन (ट्रांसक्रिप्शन) की शुरुआत करते हैं। यानी यह वह प्रक्रिया है जिसमें अनुवांशिक जानकारी को RNA में कॉपी किया जाता है। फिर ये अलग हो जाते हैं ताकि ट्रांसक्रिप्शन की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
- यह सिद्धांत मुख्य रूप से एस्चेरिचिया कोलाई नामक बैक्टीरिया और उसके सिग्मा फैक्टर σ70 पर किए गए अध्ययनों पर आधारित था।
तीव्र शहरीकरण, आर्द्रभूमियों की विलुप्ति और कंक्रीट आधारित संरचनाओं की बढ़ती संख्या की वजहों से भारतीय शहरों में प्राकृतिक जल-निकासी व्यवस्था अवरुद्ध हो रही हैं।
‘हाइड्रोलॉजिकल हिस्टेरिसिस और लैंडस्केप मेमोरी’ के बारे में
- हाइड्रोलॉजिकल हिस्टेरिसिस: इसका अर्थ है कि किसी भूक्षेत्र में बारिश के प्रति भूमि की क्रियाएं केवल वर्तमान वर्षा पर नहीं, बल्कि अतीत में हुई बारिश पर भी निर्भर करती है।
- लैंडस्केप मेमोरी: भूमि बारिश का पानी तुरंत नहीं सोखती और न ही तुरंत सूख जाती है। वह अतीत में हुई बारिश को “स्मृति” में रखती है। इससे मृदा में नमी का स्तर तय होता है।
- शहरी बाढ़ के संदर्भ में: भारतीय शहरों में लंबे समय तक जलजमाव केवल जल-निकासी प्रबंधन की विफलता नहीं है।
- हिस्टेरिसिस के कारण, पहले से जल से संतृप्त भूमि तात्कालिक बारिश का पानी नहीं सोख पाती। इससे पानी सड़कों पर ही जमा रह जाता है।
भारत ने 28 फरवरी, 2026 से जापान के साथ अपनी द्विपक्षीय स्वैप व्यवस्था (मुद्रा स्वैप समझौता) को नवीनीकृत किया है।
- द्विपक्षीय स्वैप व्यवस्था दो-तरफा व्यवस्था है। इसमें दो देश अपनी-अपनी स्थानीय मुद्राओं को अमेरिकी डॉलर के बदले आपस में बदल सकते हैं।
- मुद्रा स्वैप (Currency Swap) का अर्थ है—दो देशों के केंद्रीय बैंकों के बीच तय शर्तों के अनुसार एक मुद्रा के बदले दूसरी मुद्रा का लेन-देन करने का समझौता।
- भारत-जापान द्विपक्षीय स्वैप व्यवस्था की मात्रा: यह पहले की तरह 75 अरब अमेरिकी डॉलर है।
- भारत द्वारा किए गए अन्य ‘मुद्रा स्वैप समझौते (CSA)’: सार्क मुद्रा स्वैप समझौता (2024–27), भारत-संयुक्त अरब अमीरात मुद्रा स्वैप समझौता, भारत-श्रीलंका मुद्रा स्वैप समझौता, आदि।
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1 sourceउच्चतम न्यायालय ने इस विषय पर सुनवाई करने पर सहमति जताई है कि क्या ब्लड बैंकों में रोगों की पहचान के लिए न्यूक्लिक अम्ल परीक्षण (Nucleic Acid Test–NAT) को अनिवार्य किया जाना चाहिए।
न्यूक्लिक अम्ल परीक्षण के बारे में
- यह एक अत्यधिक संवेदनशील आणविक (मॉलिक्यूलर) तकनीक है। इस तकनीक में रक्त में HIV, हेपेटाइटिस जैसे वायरस के आनुवंशिक पदार्थ (जेनेटिक मटेरियल) की पहचान की जाती है।
- यह वायरस के राइबोन्यूक्लिक एसिड (RNA) या डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड (DNA) के विशिष्ट हिस्सों को बढ़ाकर परीक्षण करने पर आधारित होती है।
- यह आमतौर पर उपयोग किए जाने वाले एलिसा (ELISA) टेस्ट का एक विकल्प हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने ईरान पर अमेरिका–इजरायल के सैन्य हमलों के प्रभावों पर चर्चा के लिए वियना में एक आपातकालीन बैठक आयोजित की।
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के बारे में:
- स्थापना: 1957 में।
- परिचय: यह परमाणु क्षेत्र में वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग के लिए विश्व का प्रमुख अंतर-सरकारी मंच है।
- कार्य: परमाणु विज्ञान और प्रौद्योगिकी के सुरक्षित, संरक्षित और शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना, जिससे अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति को बढ़ावा मिल सके।
- मुख्यालय: वियना (ऑस्ट्रिया)।
- पुरस्कार: वर्ष 2005 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित।