इससे वैश्विक जीडीपी के लगभग 70% हिस्से तक भारतीय सामानों की "शून्य शुल्क” पहुंच सुनिश्चित हुई है। साथ ही, भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिला है।
- अप्रैल-जनवरी 2025-26 के दौरान कुल निर्यात 720.76 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था। यह पिछले वर्ष की तुलना में 6.15% की वृद्धि दर्शाता है।
क्षेत्रकवार प्रदर्शन
- इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं: यह भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी है। भारत अब विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन विनिर्माता है।
- पेट्रोलियम उत्पाद: भारत रिफाइंड पेट्रोलियम का विश्व का सातवां सबसे बड़ा निर्यातक है।
- फार्मास्यूटिकल्स: भारत को "विश्व की फार्मेसी" के रूप में मान्यता प्राप्त है। भारत मात्रा के हिसाब से तीसरा और मूल्य के हिसाब से 11वां सबसे बड़ा उत्पादक है।
- ऑटोमोबाइल व वस्त्र: ऑटोमोबाइल क्षेत्रक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से 3 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है। वस्त्र व परिधान निर्यात में भारत विश्व में छठे स्थान पर है।
- रक्षा: रक्षा निर्यात 100 से अधिक देशों तक फैला हुआ है। वित्त वर्ष 2025 में ₹23,622 करोड़ का रिकॉर्ड निर्यात हासिल किया गया था।
संस्थागत सहायता तंत्र
- निर्यात संवर्धन मिशन (EPM): ₹25,060 करोड़ के बजट (वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक) के साथ, यह मिशन 'निर्यात प्रोत्साहन' और 'निर्यात दिशा' जैसी उप-योजनाओं के माध्यम से पहली बार निर्यात करने वालों व MSMEs को सशक्त बनाता है।
- लॉजिस्टिक्स, विदेशी भंडारण और पूर्ति की सुविधा (FLOW): यह विदेशी भंडारण एवं ई-कॉमर्स निर्यात केंद्रों का समर्थन करेगी।
- माल ढुलाई और परिवहन के लिए लॉजिस्टिक्स हस्तक्षेप (LIFT): यह कम निर्यात तीव्रता वाले जिलों में निर्यातकों द्वारा सामना किए जाने वाले भौगोलिक नुकसान को कम करेगा।
- व्यापार विनियम, प्रत्यायन और अनुपालन सक्षमता (TRACE): यह अंतर्राष्ट्रीय परीक्षण, निरीक्षण एवं प्रमाणन (TIC) आवश्यकताओं में सहायता करेगा।
सरकारी योजनाएं व पहलें
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