यह रिपोर्ट 'पहुंच और लाभ साझाकरण' (Access and Benefit Sharing: ABS) प्रावधानों को लागू करने की दिशा में भारत की प्रगति पर प्रकाश डालती है। साथ ही, यह रिपोर्ट भारत की अद्यतन राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (NBSAP) के लक्ष्य-13 में योगदान को भी रेखांकित करती है।
ABS पर नागोया प्रोटोकॉल के बारे में
- यह प्रोटोकॉल 'जैव विविधता अभिसमय' (CBD) के तहत एक पूरक समझौता है।
- जैव विविधता अभिसमय वर्ष 1992 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण और विकास सम्मेलन यानी रियो "पृथ्वी शिखर सम्मेलन" में अपनाया गया एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है। यह अभिसमय 1993 में लागू हुआ।
- उद्देश्य: आनुवंशिक संसाधनों से होने वाले लाभों का उचित और न्यायसंगत तरीके से साझाकरण सुनिश्चित करना, जिससे जैव विविधता के संरक्षण और संधारणीय उपयोग में योगदान मिल सके।
- यह प्रोटोकॉल 2010 में अपनाया गया और 2014 में लागू हुआ।
- इस प्रोटोकॉल में शामिल हैं:
- आनुवंशिक संसाधन (पादप, जानवर, सूक्ष्मजीव)।
- उपर्युक्त से संबंधित पारंपरिक ज्ञान (TK)।
- उपर्युक्त के उपयोग (अनुसंधान, वाणिज्यिक उपयोग) से होने वाले लाभ।
- प्रोटोकॉल के तहत मुख्य दायित्व:
- पहुंच (Access): जैव संसाधनों तक पहुँच के लिए सेवा-प्रदाता से 'पूर्व सूचित सहमति' (PIC) की आवश्यकता होती है।
- लाभ साझाकरण (Benefit Sharing): लाभों को 'परस्पर सहमत शर्तों' के आधार पर उचित और न्यायसंगत रूप से साझा किया जाना चाहिए।
- अनुपालन (Compliance): यह दायित्व सुनिश्चित करता है कि संसाधनों का उपयोग 'पूर्व सूचित सहमति और 'परस्पर सहमत शर्तों' के अनुसार किया जा रहा है।
- भारत उपर्युक्त प्रावधानों को जैव-विविधता अधिनियम, 2002 के माध्यम से लागू करता है। इसमें निम्नलिखित त्रिस्तरीय संस्थागत संरचना शामिल है:
- राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA),
- राज्य जैव विविधता बोर्ड / संघ राज्य क्षेत्र जैव विविधता परिषदें,
- स्थानीय स्तर पर जैव-विविधता प्रबंधन समितियां (BMCs)
रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर
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