केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) बच्चों को गोद लेने की प्रक्रियाओं को मजबूत करने के लिए राष्ट्रव्यापी निर्देश जारी किए | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • सीएआरए ने जेजे अधिनियम, 2015 (संशोधित 2021) और दत्तक ग्रहण विनियम, 2022 के तहत ज्ञापन जारी किए, जिसमें बच्चे को कानूनी रूप से स्वतंत्र घोषित करने से पहले सख्त उचित प्रक्रिया पर जोर दिया गया।
  • अनिवार्य रिकॉर्ड प्रबंधन और बच्चों की पहचान के खुलासे पर पूर्ण प्रतिबंध लागू हैं, उल्लंघन करने पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।
  • प्रमुख कानूनों में जेजे एक्ट, 2015, हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 और अभिभावक एवं आश्रित अधिनियम, 1890 शामिल हैं; सीएआरए दत्तक ग्रहण के लिए नोडल निकाय है।

In Summary

केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) ने किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015  (वर्ष 2021 में संशोधित) और दत्तक ग्रहण विनियम, 2022 के प्रावधानों के अनुसार ज्ञापन जारी किए हैं।

CARA द्वारा जारी मुख्य निर्देश

  • उचित प्रक्रिया का सख्ती से अनिवार्य अनुपालन: बच्चे को विधिक रूप से गोद लेने के लिए ‘मुक्त घोषित’ करने से पहले निर्धारित समय सीमा में उचित जांच, माता-पिता की खोज और परिवार या समुदाय से फिर से जोड़ने के प्रयास अनिवार्य रूप से करने होंगे।
    • किसी अन्य को गोद देने के लिए सौंपे गए (Surrendered) बच्चों के मामलों में पुनर्विचार के लिए दो महीने की अवधि दी जाएगी।
  • दत्तक ग्रहण का रिकॉर्ड रखना: 
    • बच्चों को गोद लेने से संबंधित सभी दस्तावेज सुरक्षित रूप से संरक्षित किए जाएंगे और उचित रूप से स्थानांतरित किए जाएंगे। संस्थान के बंद होने के बाद भी इन दस्तावेजों को सुरक्षित रखना होगा।
    • दत्तक ग्रहण के रिकार्ड्स को कानूनी प्रावधानों को छोड़कर अन्य तरीके से नष्ट नहीं किया जा सकता या अनुपलब्ध नहीं बनाया जा सकता
  • बच्चे की पहचान उजागर करने पर पूर्ण प्रतिबंध: राज्यों को इस संबंध में जागरूकता सुनिश्चित करनी होगी तथा नियम के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई करनी होगी।

भारत में बाल दत्तक ग्रहण विनियमन

  • नोडल मंत्रालय: केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
  • प्राथमिक कानून: किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015  (JJ ACT, 2015), और हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956. 
    • संरक्षक और प्रतिपाल्य अधिनियम (The Guardians and Wards Act), 1890 मुख्य रूप से मुस्लिम और ईसाई समुदायों के लिए संरक्षकता (guardianship) को विनियमित करता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इन समुदायों के पर्सनल लॉ पूर्ण दत्तक ग्रहण को मान्यता नहीं देते हैं।

किशोर न्याय अधिनियम (JJ ACT) के तहत स्थापित एजेंसियां: 

  • राष्ट्रीय स्तर पर: केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) निम्नलिखित मामलों में नोडल निकाय है:
    • देश के भीतर (घरेलू स्तर पर) बच्चों को गोद लेना।
    • 'अंतर-देशीय दत्तक ग्रहण पर हेग अभिसमय, 1993'  के प्रावधानों के अनुसार अंतर-देशीय (अंतर्राष्ट्रीय) दत्तक ग्रहण यानी बच्चों को गोद लेने में भारतीयों का शामिल होना।  
      • भारत ने वर्ष 2003 में इस अभिसमय की अभिपुष्टि की थी। 
  • राज्य/स्थानीय स्तर: राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसियां (SARA); स्थानीय बाल कल्याण समितियां (CWC); जिला बाल संरक्षण इकाइयां (DCPUs)।
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संरक्षक और प्रतिपाल्य अधिनियम (The Guardians and Wards Act), 1890

यह अधिनियम मुख्य रूप से मुस्लिम और ईसाई समुदायों के लिए संरक्षकता (guardianship) को विनियमित करता है, क्योंकि उनके व्यक्तिगत कानून पूर्ण दत्तक ग्रहण को मान्यता नहीं देते हैं। यह संरक्षक नियुक्त करने की प्रक्रिया से संबंधित है।

मुक्त घोषित

यह वह विधिक स्थिति है जो तब प्राप्त होती है जब किसी बच्चे को उसके माता-पिता या अभिभावकों द्वारा औपचारिक रूप से छोड़ दिया जाता है और वह गोद लेने के लिए उपलब्ध हो जाता है। इसके लिए निर्धारित जांच और प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य है।

जिला बाल संरक्षण इकाइयां (DCPUs)

ये वे इकाइयां हैं जो जिलों में बाल संरक्षण सेवाओं के कार्यान्वयन और समन्वय के लिए जिम्मेदार हैं।

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