यह रिपोर्ट केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा तैयार की गई है। यह रिपोर्ट जैव-विविधता अभिसमय (CBD) के तहत भारत की आधिकारिक प्रस्तुति है।
- CBD के अनुच्छेद 26 के तहत, पक्षकार देशों को CBD के कार्यान्वयन की दिशा में उठाए गए कदमों पर 'पक्षकारों के सम्मेलन' (COP) को राष्ट्रीय रिपोर्ट सौंपना आवश्यक है।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर
- यह कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव-विविधता फ्रेमवर्क (KMGBF) के तहत निर्धारित 23 लक्ष्यों की दिशा में प्रगति का पहला पूर्ण मूल्यांकन है।
- नीतिगत समन्वय: राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (NBSAP) को अब KMGBF के अनुरूप बनाया गया है। NBSAP में 23 राष्ट्रीय जैव-विविधता लक्ष्य (NBTs) और 142 संकेतक हैं।
- लक्ष्यों का कार्यान्वयन: रिपोर्ट में सभी राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्यों में प्रगति को सही दिशा में बताया गया है।
- कुल वन क्षेत्रफल के मामले में भारत 9वें स्थान पर आ गया है। भारत में वन और वृक्षों का आवरण देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 25.17% है।
- भारत में 24.1 मिलियन हेक्टेयर (Mha) भूमि को पुनर्बहाल किया जा चुका है या किया जा रहा है। ध्यातव्य है कि भारत ने 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर निम्नीकृत भूमि को पुनर्बहाल करने का लक्ष्य रखा है।
- भारत विश्व के शीर्ष कार्बन सिंक देशों में 5वें स्थान पर है। 2021–2025 के दौरान भारत के वन प्रति वर्ष 150 मिलियन टन CO₂ को अवशोषित कर रहे हैं।
- भारत की कुल स्थापित विद्युत क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा संसाधनों की हिस्सेदारी 51.93% है। यह राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) के 50% तय लक्ष्य से अधिक है।
जैव-विविधता अभिसमय (CBD) के बारे में
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