बाल दत्तक ग्रहण (CHILD ADOPTION) | Current Affairs | Vision IAS

Upgrade to Premium Today

Start Now
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

अपना ज्ञान परखें

आर्थिक अवधारणाओं में महारत हासिल करने और नवीनतम आर्थिक रुझानों के साथ अपडेट रहने के लिए गतिशील और इंटरैक्टिव सत्र।

ESC

बाल दत्तक ग्रहण (CHILD ADOPTION)

30 Apr 2026
1 min

In Summary

  • सीएआरए ने दत्तक ग्रहण प्रक्रियाओं के संबंध में जेजे अधिनियम, 2015 और दत्तक ग्रहण विनियम, 2022 के सख्त अनुपालन के लिए एसएआरए को ज्ञापन जारी किए।
  • एमडब्ल्यूसीडी के अंतर्गत एक वैधानिक निकाय, सीएआरए, गोद लेने की प्रक्रियाओं की निगरानी करता है और हेग कन्वेंशन के तहत अंतर-देशीय गोद लेने के लिए केंद्रीय प्राधिकरण है।
  • चुनौतियों में कानूनी जटिलताएं, मांग-आपूर्ति में असंतुलन, देरी, विशेष जरूरतों वाले बच्चों को गोद लेने की कम दर और लंबी प्रतीक्षा अवधि शामिल हैं।

In Summary

सुर्ख़ियों में क्यों?

हाल ही में, केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) ने गोद लेने की प्रक्रियाओं का अनुपालन सुदृढ़ करने के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) की  राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसियों (SARAs) को ज्ञापन जारी किए हैं। 

अन्य संबंधित तथ्य

  • ये निर्देश किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम (JJ Act), 2015 (2021 में संशोधित) और दत्तक ग्रहण विनियम, 2022 के प्रावधानों के अनुसार जारी किए गए हैं।
  • मुख्य निर्देश:
    • अनिवार्य सख्त उचित प्रक्रिया: किसी भी अनाथ या परित्यक्त बच्चे को तब तक कानूनी रूप से गोद लेने के लिए स्वतंत्र घोषित नहीं किया जा सकता, जब तक कि उचित जांच और निर्धारित समय सीमा के भीतर जैविक माता-पिता की तलाश पूरी न हो जाए।
      • सौंपे गए (Surrendered) बच्चों के मामलों में, बच्चे को गोद लेने के लिए कानूनी रूप से स्वतंत्र घोषित करने से पहले दो महीने की अनिवार्य पुनर्विचार अवधि का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।
    • रिकॉर्ड प्रबंधन: गोद लेने के सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रूप से संरक्षित किए जाने चाहिए और ठीक से स्थानांतरित किए जाने चाहिए, भले ही संबंधित संस्थान बंद हो जाएं।
    • बच्चे की पहचान उजागर करने पर रोक: राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को किशोर न्याय (JJ) अधिनियम, 2015 की धारा 74 का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना होगा। ध्यातव्य है कि, किशोर न्याय (JJ) अधिनियम, 2015 की धारा 74 कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चों या देखभाल/संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान उजागर करने पर रोक लगाती है।

भारत में बाल दत्तक ग्रहण 

  • CARA (केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण): यह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय है। यह अपनी संबद्ध/मान्यता प्राप्त दत्तक ग्रहण एजेंसियों के माध्यम से अनाथ (Orphan), परित्यक्त और अभ्यर्पित (सौंपे गए) बच्चों को गोद लेने के लिए नोडल निकाय के रूप में कार्य करता है।
    • CARA की स्थापना 1990 में हुई थी और बाद में इसे JJ अधिनियम 2015 के तहत वैधानिक दर्जा दिया गया। CARA देश के भीतर (घरेलू) गोद लेने की प्रक्रिया की निगरानी करता है।
    • इसे अंतर्देशीय दत्तक ग्रहण पर हेग कन्वेंशन, 1993 के प्रावधानों के अनुसार अंतर-देशीय (अंतरराष्ट्रीय) गोद लेने के मामलों से निपटने के लिए केंद्रीय प्राधिकरण के रूप में भी नामित किया गया है। अंतर्देशीय दत्तक ग्रहण पर हेग कन्वेंशन, 1993 को भारत द्वारा 2003 में अनुसमर्थित किया गया था।
    • CARA रिश्तेदारों द्वारा गोद लेनासौतेले माता-पिता द्वारा गोद लेना और फोस्टर अडॉप्शन (धात्री दत्तक ग्रहण) की सुविधा भी प्रदान करता है।
  • राज्य या स्थानीय स्तर पर गोद लेने की प्रक्रिया के लिए SARAबाल कल्याण समितियां (CWCs), और जिला बाल संरक्षण इकाइयां (DCPUs) जिम्मेदार हैं।

भारत में बाल दत्तक ग्रहण का ढांचा 

  • हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम (HAMA), 1956: यह हिंदुओं, बौद्धों, जैनियों और सिखों को गोद लेने की अनुमति देता है। HAMA के तहत बच्चा गोद लेने वाले माता-पिता के लिए CARA के पास दत्तक ग्रहण विलेख (Adoption deed) पंजीकृत करना अनिवार्य नहीं है।
    • अभिभावक और प्रतिपाल्य अधिनियम, 1890: यह अभिभावकत्व को नियंत्रित करता है, विशेष रूप से मुस्लिमों और ईसाइयों के लिए, क्योंकि उनके व्यक्तिगत कानून पूर्ण दत्तक ग्रहण को मान्यता नहीं देते हैं।
  • JJ अधिनियम 2015: यह हर किसी के लिए गोद लेने का एक व्यापक ढांचा प्रदान करता है।

भारत में बाल दत्तक ग्रहण सुधार हेतु की गई पहलें

  • CARINGS (बाल दत्तक ग्रहण संसाधन सूचना और मार्गदर्शन प्रणाली) पोर्टल: यह CARA द्वारा संचालित है और गोद लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।
    • इसे राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा डिजाइन, विकसित और तैनात किया गया था।
    • बच्चों को CARINGS पोर्टल पर 5 श्रेणियों में पंजीकृत किया जाएगा: अनाथ, परित्यक्त, सौपें गए, कोई मुलाकात नहीं, और अयोग्य अभिभावक
    • CARINGS पोर्टल को एकीकृत मिशन वात्सल्य पोर्टल के साथ जोड़ा गया है।
      • मिशन वात्सल्य पोर्टल बाल संरक्षण सेवाओं के प्रबंधन के लिए एक एकीकृत और सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करता है। यह पोर्टल लापता, अनाथ, परित्यक्त और सौंपे गए बच्चों के डेटा को एकीकृत करता है।
  • पहचान सेल: बाल देखभाल संस्थानों में गोद लेने योग्य बच्चों की पहचान करने और उन्हें गोद लेने के लिए कानूनी रूप से स्वतंत्र घोषित करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए स्थापित किया गया है।

 

भारत में बाल दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया से जुड़ी चुनौतियां

  • कानूनी और प्रक्रियागत जटिलताएं: गोद लेने की प्रक्रिया JJ अधिनियम, 2015 जैसे कई कानूनों और HAMA, 1956 जैसे व्यक्तिगत कानूनों द्वारा शासित होती है। इससे क्षेत्राधिकार की अतिव्याप्ति होती है।
  • मांग और आपूर्ति में असंतुलन: संभावित दत्तक माता-पिता की संख्या 26,734 (2021) से बढ़कर 36,381 (2025) हो गई थी। हालांकि, गोद लेने के लिए कानूनी रूप से स्वतंत्र बच्चों की संख्या 2,430 से मामूली रूप से बढ़कर केवल 2,652 हुई।
  • प्रक्रियाओं और पहचान में देरी: धीमी जांच, लंबी अदालती प्रक्रियाएं और एजेंसियों के बीच कमजोर समन्वय गोद लेने की प्रक्रिया में देरी करते हैं।
    • 2024 में, केवल 3,684 बच्चों को कानूनी रूप से स्वतंत्र घोषित किया गया था। इनमें से केवल 2,177 ही दत्तक ग्रहण पूल में प्रवेश कर पाए, जो प्रशासनिक बाधाओं को दर्शाता है।
  • प्रतीक्षा अवधि में वृद्धि: संभावित माता-पिता के लिए औसत प्रतीक्षा समय 2025 तक लगभग 3.5 वर्ष हो गया है, जो भारत में अवैध रूप से गोद लेने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे सकता है।
  • विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को गोद लेने की कम दर: दिव्यांग बच्चों को गोद लेने की संख्या न्यूनतम बनी हुई है, 2024-25 में ऐसे केवल 313-328 दत्तक ग्रहण (कुल का लगभग 7%) हुए।
  • वारयिता संबंधी पूर्वाग्रह: कई माता-पिता 0-2 वर्ष की आयु के बच्चों को प्राथमिकता देते हैं और बड़े बच्चों को गोद लेने में अनिच्छुक होते हैं।

आगे की राह 

  • कानूनी सामंजस्य: किशोर न्याय (JJ) अधिनियम 2015 और हिन्दू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम (HAMA) 1956 के परस्पर अतिव्यापी प्रावधानों को सुव्यवस्थित किया जाना चाहिए, ताकि एक समान एवं बाल-केंद्रित कानूनी ढांचा तैयार किया जा सके।
  • सिंगल-विंडो डिजिटल क्लीयरेंस सिस्टम शुरू करना: दस्तावेज़ीकरण और प्रक्रियागत देरी को कम करने तथा गोद लेने की प्रतीक्षा अवधि को छोटा किया जाना चाहिए।
  • संस्थागत क्षमता: कुशल केस हैंडलिंग और निगरानी सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारियों, प्रशिक्षण और डिजिटल बुनियादी ढांचे में वृद्धि किया जाना चाहिए। साथ ही, CWCsविशिष्ट दत्तक ग्रहण एजेंसियों (SAAs) और CARA के बीच समन्वय को मजबूत किया जाना चाहिए।
  • विशेष आवश्यकता वाले और बड़े बच्चों को गोद लेने को बढ़ावा देना: विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को गोद लेने वाले परिवारों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन, चिकित्सा सहायता और गोद लेने के बाद की देखभाल योजनाएं प्रदान किए जाने चाहिए।
    • इसके अतिरिक्त, कलंक को दूर करने और माता-पिता की तत्परता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय दत्तक ग्रहण जागरूकता माह (नवंबर) जैसे अभियानों के माध्यम से जागरूकता पैदा की जानी चाहिए।
  • दत्तक ग्रहण के बाद सहायता प्रणाली: गोद लिए गए बच्चों के दीर्घकालिक एकीकरण और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए दत्तक परिवारों को परामर्श, फॉलो-अप सेवाएं और शिकायत निवारण तंत्र प्रदान किए जाने चाहिए।

संबंधित सुर्खियां: दत्तक माताओं के लिए मातृत्व लाभ

  • उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 60(4) {पूर्व में मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 की धारा 5(4)} के उस प्रावधान को असंवैधानिक घोषित कर दिया है, जो केवल तभी मातृत्व लाभ की अनुमति देता था जब गोद लिया गया बच्चा 3 महीने से कम उम्र का हो
    • एक दत्तक माता के बच्चे के प्रति वही अधिकार और दायित्व हैं जो एक जैविक माता के होते हैं।
    • अब, दत्तक माताएं गोद लेने के समय अपने बच्चों की उम्र की परवाह किए बिना 12 सप्ताह के सवैतनिक मातृत्व अवकाश का लाभ उठा सकती हैं।
  • मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम, 2017
    • जैविक माताओं के लिए सवैतनिक मातृत्व अवकाश की अवधि को बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया गया, और
    • दत्तक माताओं या सरोगेट माताओं के लिए मातृत्व अवकाश का विस्तार करने वाला एक प्रावधान जोड़ा गया, हालांकि, कुछ शर्तों के साथ।
  • उच्चतम न्यायालय की मुख्य टिप्पणियाँ
    • मातृत्व लाभ "डी-फैमिलिज़ेशन" के एक साधन के रूप में कार्य करता है।
      • इसका अर्थ है देखभाल के लिए परिवार पर महिला की निर्भरता को कम करना, उसकी आर्थिक स्वतंत्रता की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करना कि मातृत्व कार्यस्थल पर बहिष्करण का कारक न बने।
    • प्रजनन स्वायत्तता का अधिकार केवल जन्म देने के जैविक कार्य तक सीमित नहीं है। गोद लेना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रजनन और निर्णयात्मक स्वायत्तता के अधिकार का एक समान प्रयोग है।
    • उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार से पितृत्व अवकाश को सामाजिक सुरक्षा लाभ के रूप में मान्यता देने वाले कानून बनाने का आग्रह किया।

 

Explore Related Content

Discover more articles, videos, and terms related to this topic

RELATED TERMS

3

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020

यह कानून भारत में सामाजिक सुरक्षा को युक्तिसंगत बनाने और मजबूत करने का प्रयास करता है, जिसमें असंगठित श्रमिकों, गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ बनाने का अधिकार सरकार को दिया गया है।

प्रजनन स्वायत्तता का अधिकार

यह अधिकार केवल जन्म देने के जैविक कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें व्यक्तिगत निर्णय लेने की स्वतंत्रता भी शामिल है, जिसमें गोद लेना भी शामिल है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है।

डी-फैमिलिज़ेशन

मातृत्व लाभ के संदर्भ में, इसका अर्थ है देखभाल के लिए परिवार पर महिला की निर्भरता को कम करना, उसकी आर्थिक स्वतंत्रता की रक्षा करना और मातृत्व को कार्यस्थल पर बहिष्करण का कारक बनने से रोकना।

Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet