‘लैंडफिल से मीथेन उत्सर्जन में कमी: बायोकवर प्रणाली की संभावनाएं’ शीर्षक से रिपोर्ट जारी की गई | Current Affairs | Vision IAS

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  • CCAC की एक रिपोर्ट में बायोकवर को लैंडफिल से मीथेन एमिशन कम करने, हवा की क्वालिटी और पब्लिक हेल्थ को बेहतर बनाने के एक कॉस्ट-इफेक्टिव सॉल्यूशन के तौर पर बताया गया है।
  • लैंडफिल मीथेन का एक बड़ा सोर्स हैं, जो एक पावरफुल ग्रीनहाउस गैस है और इसकी ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल CO2 से 28-84 गुना ज़्यादा है।
  • CCAC, UNEP द्वारा होस्ट की गई एक वॉलंटरी पार्टनरशिप है, जिसका मकसद 2030 तक मीथेन और ब्लैक कार्बन जैसे कम समय तक रहने वाले क्लाइमेट पॉल्यूटेंट्स को कम करना है।

In Summary

यह रिपोर्ट ‘जलवायु और स्वच्छ वायु गठबंधन (Climate and Clean Air Coalition: CCAC)’ ने  जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार बायोकवर (जैव-आवरण) जैसे सरल, अपेक्षाकृत किफायती और स्थानीय रूप से अनुकूलन योग्य समाधान लैंडफिल से होने वाले मीथेन उत्सर्जन को प्रभावी रूप से कम कर सकते हैं। इससे परिवेशी वायु गुणवत्ता और लोक स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।

  • बायोकवर सूक्ष्मजीवों के उपयोग पर आधारित प्रणाली है। यह प्रणाली प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले बैक्टीरिया का उपयोग करके मीथेन को कम हानिकारक कार्बन डाइऑक्साइड और जल में ऑक्सीकृत करती है। 
  • यह 100 वर्षों की अवधि में मीथेन उत्पादन को 50% तक कम करने में सक्षम है।

लैंडफिल उत्सर्जन के बारे में

  • लैंडफिल विश्व में मीथेन के सबसे बड़े और तेजी से बढ़ते उत्सर्जन स्रोतों में से एक है। यह मानव-जनित कुल उत्सर्जन का लगभग 11% के लिए जिम्मेदार हैं।
  • मीथेन महत्वपूर्ण ग्रीनहाउस गैस है। इसकी वैश्विक तापन क्षमता कार्बन डाइऑक्साइड से 28–84 गुना अधिक होती है।
  • दीर्घकालिक उत्सर्जन: जैविक अपशिष्ट के अपघटन में सामान्यतः 2-3 दशक लगते हैं, और लैंडफिल स्थलों पर मीथेन उत्सर्जन 100 वर्षों तक जारी रह सकता है।
  • जोखिम: हवा में 4.4%–16.5% की सांद्रता होने पर मीथेन विस्फोटक हो जाती है, जिससे लंबे समय तक आग लगी रह सकती है।
    • लैंडफिल गैस में वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs), हाइड्रोजन सल्फाइड और सॉल्वेंट जैसे विषाक्त तत्व भी होते हैं, जो पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।

जलवायु और स्वच्छ वायु गठबंधन (CCAC) के बारे में

  • यह 200 से अधिक सरकारों (भारत सहित), अंतर-सरकारी संगठनों, व्यवसायों, वैज्ञानिक संस्थानों और नागरिक समाज संगठनों की एक स्वैच्छिक साझेदारी है।
  • सचिवालय: संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा पेरिस (फ्रांस) में संचालित।
  • उद्देश्य: मीथेन, ब्लैक कार्बन, क्षोभमंडलीय ओजोन और हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) जैसे अल्पकालिक सुपर-प्रदूषकों को कम करके जलवायु की रक्षा करना और वायु गुणवत्ता में सुधार करना।।
  • लक्ष्य:
    • 2030 तक 2010 के स्तर की तुलना में मीथेन में कम से कम 40% की वैश्विक कमी लाना।
    • 2030 तक 2010 के स्तर की तुलना में ब्लैक कार्बन में 70% तक की कमी करना।  
    • 2050 तक 2010 के स्तर की तुलना में हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) में 99.5% कमी करना। 
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संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (United Nations Environment Programme: UNEP)

यह संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के भीतर एक प्रमुख प्राधिकरण है जो पर्यावरण के मुद्दों को संबोधित करता है। यह वैश्विक पर्यावरण एजेंडे को निर्धारित करने, स्थायी विकास को बढ़ावा देने और पर्यावरण के संबंध में संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के सुसंगत कार्यान्वयन की वकालत करने के लिए काम करता है।

अल्पकालिक सुपर-प्रदूषक (Short-lived Super-pollutants)

ये ऐसे प्रदूषक हैं जो वायुमंडल में अपेक्षाकृत कम समय (कुछ दिनों से लेकर कुछ दशकों तक) तक बने रहते हैं, लेकिन उनका जलवायु और स्वास्थ्य पर तीव्र और महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। मीथेन, ब्लैक कार्बन, क्षोभमंडलीय ओजोन और हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (Volatile Organic Compounds: VOCs)

ये ऐसे कार्बनिक रसायन हैं जो सामान्य कमरे के तापमान पर आसानी से वाष्पीकृत हो जाते हैं। ये वायु प्रदूषण में योगदान कर सकते हैं और मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं, जिससे श्वसन संबंधी समस्याएं और अन्य बीमारियां हो सकती हैं।

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