सुर्ख़ियों में रहे व्यक्तित्व | Current Affairs | Vision IAS

Upgrade to Premium Today

Start Now
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

अपना ज्ञान परखें

आर्थिक अवधारणाओं में महारत हासिल करने और नवीनतम आर्थिक रुझानों के साथ अपडेट रहने के लिए गतिशील और इंटरैक्टिव सत्र।

ESC

In Summary

  • मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के मनकेडी में जन्मीं रानी अवंतीबाई लोधी (1831-1858) को उनके शहादत दिवस पर याद किया गया।
  • अपने पति के खराब स्वास्थ्य के कारण वह रामगढ़ राज्य की शासक बनीं और तलवारबाजी, घुड़सवारी और गुरिल्ला युद्ध में निपुण थीं।
  • रानी अवंतीबाई ने खेरी के युद्ध (1857) में अंग्रेजों के खिलाफ अपनी सेना का नेतृत्व किया और पकड़े जाने के बजाय अपने प्राणों का बलिदान दिया।

In Summary

रानी अवंती बाई लोधी (16 अगस्त 1831 – 20 मार्च 1858)

हाल ही में वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी को उनके बलिदान दिवस पर याद किया गया। 

रानी अवंती बाई लोधी के बारे में

  • जन्म: मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के मनकेड़ी गांव में हुआ था।
  • प्रारंभिक जीवन: उनका विवाह रामगढ़ (वर्तमान डिंडोरी, मध्य प्रदेश) के राजा लक्ष्मण सिंह के पुत्र राजपूत राजकुमार विक्रमादित्य सिंह लोधी से हुआ था।
    • लक्ष्मण सिंह की मृत्यु के बाद, पति के खराब स्वास्थ्य के कारण उन्होंने रामगढ़ राज्य का सिंहासन संभाला। 
  • सैन्य कौशल: वह तलवारबाजी, घुड़सवारी और छापामार युद्ध में कुशल थीं। 
  • खेरी का युद्ध (1857): उन्होंने ब्रिटिश सेना को पराजित किया। 
  • 1857 का विद्रोह: उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ अपनी सेना का नेतृत्व किया, जो व्यपगत के सिद्धांत (Doctrine of Lapse) के तहत उनके राज्य को हड़पना चाहते थे। 
  • मृत्यु: ब्रिटिश घेराबंदी के दौरान पकड़े जाने से इनकार करते हुए उन्होंने अपने प्राणों का बलिदान दे दिया। 
  • मूल्य: वीरता, सैन्य नेतृत्व, साहस, मजबूत इच्छाशक्ति और देशभक्ति का जज्बा।
Watch Video News Today

Explore Related Content

Discover more articles, videos, and terms related to this topic

RELATED TERMS

2

1857 का विद्रोह

यह ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन के खिलाफ एक बड़े पैमाने पर विद्रोह था, जो भारत में पहली बार ब्रिटिश शासन के विरुद्ध एक संगठित सैन्य और नागरिक विद्रोह के रूप में देखा जाता है। इसे भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम भी कहा जाता है।

व्यपगत का सिद्धांत (Doctrine of Lapse)

यह ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा भारतीय रियासतों को अपने शासन में मिलाने की एक नीति थी। इस सिद्धांत के अनुसार, यदि किसी शासक की मृत्यु बिना किसी प्राकृतिक वारिस के हो जाती थी, तो उस रियासत को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया जाता था।

Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet