सरकार के इस कदम का उद्देश्य अवैध ऑनलाइन गेमिंग गतिविधियों पर रोक लगाना है। इनसे लगभग 45 करोड़ लोग प्रभावित हो रहे हैं और अगस्त 2025 तक 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
- ऑनलाइन जुआ (Online Gambling) में इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से 'किस्मत' (Chance) या 'कौशल' (Skill) के खेलों पर दांव लगाना शामिल है। इनके उदाहरण हैं-स्पोर्ट्स बेटिंग, पोकर, कैसीनो गेम्स, आदि।
ऐसी अवैध गतिविधियों को रोकने के प्रमुख कारण
- आर्थिक दुष्प्रभाव:
- अवैध समानांतर अर्थव्यवस्था: अवैध गतिविधियों से अर्जित लाभ का पता नहीं चलता और यह कराधान के दायरे से बाहर रहता है।
- धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग): ऐसे प्लेटफॉर्म्स अवैध कमाई को वैध तरीकों के माध्यम से स्थानांतरित करने और इस कमाई के स्रोत को छिपाने में उपयोग किए जा सकते हैं।
- सामाजिक प्रभाव:
- बढ़ता व्यसन: इससे पैथोलॉजिकल गैम्बलिंग, रिपेटिटिव स्ट्रेस इंजरी (RSIs), भावनात्मक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव आदि हो सकते हैं।
- पैथोलॉजिकल गैम्बलिंग एक क्लिनिकल विकार है, जिसमें व्यक्ति बार-बार जुआ खेलने की प्रवृत्ति को नियंत्रित करने में असफल रहता है।
- हानिकारक डिजिटल परिवेश: लालच देने वाले गेमिंग अभ्यास अक्सर उपयोगकर्ताओं को आसान वित्तीय लाभ के झूठे वादों के साथ लुभाते हैं।
- बढ़ता व्यसन: इससे पैथोलॉजिकल गैम्बलिंग, रिपेटिटिव स्ट्रेस इंजरी (RSIs), भावनात्मक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव आदि हो सकते हैं।
- नैतिक प्रभाव:
- अनैतिक मूल्यों का समावेश: जुए के माध्यम से बिना परिश्रम के धन अर्जित करना लालच, आलस्य, असंवेदनशीलता जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों को बढ़ावा देता है।
- कांट के दर्शन के प्रतिकूल: जुआ दूसरों को 'साध्य के साधन' (means to an end) के रूप में उपयोग करने पर आधारित है। उदाहरण के लिए, अनुचित दरों का उपयोग करके खेलों पर सट्टा लगाना पैसे के नुकसान का कारण बनता है।
अवैध जुए और सट्टेबाजी गतिविधियों को रोकने के लिए प्रमुख पहलें
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