भारत के रक्षा क्षेत्रक में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) की भूमिका बढ़ रही है | Current Affairs | Vision IAS

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  • भारत की रक्षा के लिए लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) महत्वपूर्ण हैं, जो यूएवी, पानी के भीतर चलने वाले ड्रोन, साइबर रक्षा समाधान और एयरोस्पेस सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीक की आपूर्ति करते हैं।
  • रक्षा क्षेत्र में लगभग 8,000 लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भाग लेते हैं, जिनकी सशस्त्र बलों की खरीद में महत्वपूर्ण बाजार हिस्सेदारी है।
  • आईडेक्स, टीडीएफ जैसी सरकारी पहल और रक्षा बजट आवंटन में वृद्धि का उद्देश्य रक्षा विनिर्माण और एमआरओ सेवाओं में एमएसएमई को और बढ़ावा देना है।

In Summary

रक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय रक्षा उद्योग कॉन्क्लेव 2026 में रेखांकित किया कि MSMEs भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करके राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा कर रहे हैं।

रक्षा क्षेत्रक में MSMEs की भूमिका 

  • अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियां:
    • मानवरहित प्रणालियां एवं ड्रोन: आइडियाफोर्ज नामक कम्पनी भारतीय सेना को अधिक ऊंचाई पर परिवहन सुविधा और सीमा की निगरानी के लिए UAVs उपलब्ध कराती है।
      • समुद्री और स्थलीय क्षेत्रों में, EyeROV और सागर डिफेंस इंजीनियरिंग जल के भीतर और सतह पर संचालित होने वाले ड्रोन का निर्माण करती हैं।
  • साइबर सुरक्षा एवं संचार: QNu लैब्स, QpiAI और सिग्नलचिप जैसी कंपनियां अंतरिक्ष आधारित निगरानी से लेकर क्वांटम-सुरक्षित संचार जैसे समाधान प्रदान कर रही हैं।
  • एयरोस्पेस एवं निगरानी: न्यूस्पेस जैसे स्टार्टअप समताप मंडल में मानव रहित विमान या अन्य प्रौद्योगिकियों का संचालन और सेंसर फ्यूजन (कई सेंसर्स के डेटा को एकीकृत करना) के लिए एयरोस्पेस प्रौद्योगिकी पर कार्य कर रहे हैं।
  • अति-महत्वपूर्ण उप-प्रणालियों के आपूर्तिकर्ता: MSMEs वर्तमान में मिसाइल, जहाज, वाहन और विमान जैसे रक्षा प्लेटफॉर्म्स के लिए आवश्यक पुर्जों/घटकों का निर्माण कर रहे हैं।
  • MRO (रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल) सेवा प्रदाता: सैन्य विमानों और वाहनों के रखरखाव के लिए आवश्यक MRO सेवाओं के वृद्धिशील क्षेत्र में MSMEs की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।

MSMEs को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदम

  • वित्तपोषण: केंद्रीय बजट 2026-27 में रक्षा मंत्रालय को ₹7.85 लाख करोड़ का अब तक का सबसे अधिक आवंटन हुआ है। यह आवंटन MSMEs के लिए अवसर प्रदान करता है।
  • योजनाएंरक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार (iDEX) और प्रौद्योगिकी विकास कोष (TDF) जैसी योजनाएं शुरू की गई हैं।  
    • रक्षा उत्पादन विभाग ने MSMEs को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष योजना शुरू की है, जिसके तहत वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

भारत के रक्षा क्षेत्रक में MSMEs की स्थिति

  • वर्तमान स्थिति: लगभग 8,000 MSMEs रक्षा क्षेत्रक में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
  • रक्षा बाजार में हिस्सेदारी: रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSUs) और बड़े निजी उद्योगों के बाद, सशस्त्र बलों द्वारा उपकरणों की खरीद में अब MSMEs की बाजार हिस्सेदारी सबसे अधिक है।
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DPSUs

Defence Public Sector Undertakings. Government-owned enterprises that are major players in India's defence manufacturing sector. MSMEs now hold the largest market share for defence procurement after DPSUs and large private industries.

TDF

Technology Development Fund. A fund established to provide financial assistance for the development of indigenous defence technologies, encouraging research and development by Indian companies, including MSMEs.

iDEX

Innovations for Defence Excellence. A flagship scheme by the Ministry of Defence aimed at fostering innovation and indigenization in the defence sector by providing funding and support to startups and MSMEs for developing new technologies.

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