INS अरिदमन, भारत की अरिहंत श्रेणी की पनडुब्बी (सबमरीन) है। यह भारत की अन्य परमाणु पनडुब्बियों; INS अरिहंत (2016) और INS अरिघात (2024) की तुलना में अधिक उन्नत बैलिस्टिक मिसाइल सक्षम पनडुब्बी (SSBN) है।
भारत के परमाणु-संचालित पनडुब्बी कार्यक्रम के बारे में
- उन्नत प्रौद्योगिकी पोत (Advanced Technology Vessel: ATV) कार्यक्रम तीन दशक से अधिक पहले शुरू किया गया था। इसमें निजी कंपनियों और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की भागीदारी रही, साथ ही रूस से सहयोग प्राप्त हुआ।
- इसका मुख्य ध्यान बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों (SSBNs) के विकास पर रहा है, जो परमाणु ऊर्जा से चलती हैं। ये पनडुब्बी से प्रक्षेपित की जाने वाली कई प्रकार की बैलिस्टिक मिसाइलें (SLBMs) ले जा सकती हैं, जिनमें एक या कई परमाणु वारहेड लगे होते हैं।
भारत के लिए परमाणु-संचालित पनडुब्बियों का महत्व
- परमाणु त्रय (Nuclear Triad) की पूर्णता: यह पनडुब्बी उन चुनिंदा देशों (अमेरिका, रूस, चीन और फ्रांस के साथ) के समूह में भारत की स्थिति को मजबूत करती है जो स्थल, वायु और समुद्र (जल) से परमाणु हथियार प्रक्षेपित करने में सक्षम हैं।
- सामरिक प्रतिरोधक क्षमता (Strategic Deterrence): ये पनडुब्बियां परमाणु बैलिस्टिक मिसाइलें लेकर चलती हैं, जिससे चीन और पाकिस्तान जैसे क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ भारत की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।
- स्टील्थ और सहनशक्ति: परमाणु ऊर्जा से संचालित होने के कारण ये पनडुब्बियां लंबे समय तक जल के नीचे मिशन पर रह सकती हैं, जिससे इन्हें पहचानना मुश्किल होता है और इनकी उत्तरजीविता क्षमता अधिक होती है।
- परमाणु सिद्धांत का विस्तार: ये पनडुब्बियां 'नो-फर्स्ट यूज़' (पहले उपयोग न करने) की नीति के साथ भारत द्वारा 'जवाबी हमला करने’ की क्षमता की गारंटी सुनिश्चित करती है।

