कलपक्कम स्थित स्वदेशी रूप से विकसित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने 'क्रिटीकेलिटी' प्राप्त की | Current Affairs | Vision IAS

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  • भारत ने अपने परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण में कलपक्कम स्थित 500 मेगावाट के फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (एफबीआर) के साथ महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली है, जिसका संचालन भाविनी द्वारा किया जाता है।
  • एफबीआर स्वदेशी रूप से उत्पादित यूरेनियम-प्लूटोनियम मिक्स्ड ऑक्साइड (एमओएक्स) ईंधन और तरल सोडियम शीतलक का उपयोग करता है, साथ ही अधिक ईंधन उत्पन्न करने के लिए यूरेनियम-238 की परत का उपयोग करता है।
  • यह एफबीआर भारत के तीसरे चरण के परमाणु कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो थोरियम के उपयोग को सक्षम बनाता है, परमाणु कचरे को कम करता है और इसमें अंतर्निहित निष्क्रिय सुरक्षा सुविधाएँ हैं।

In Summary

यह उपलब्धि भारत के परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाती है।

  • क्रिटीकेलिटी का अर्थ उस स्थिति से है जब प्रत्येक विखंडन (fission) परिघटना इतनी संख्या में न्यूट्रॉन उत्पन्न करती है कि श्रृंखला अभिक्रिया यानी चेन रिएक्शन स्वतः जारी रहे। दूसरे शब्दों में, यह वह क्षण है जब परमाणु रिएक्टर आत्मनिर्भर श्रृंखला अभिक्रिया प्राप्त कर लेता है।

फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) के बारे में

  • अर्थ: ऐसा परमाणु रिएक्टर जो तीव्र न्यूट्रॉनों का उपयोग करके जितना ईंधन उपयोग करता है उससे अधिक परमाणु ईंधन उत्पन्न करता है
  • भारत का फास्ट ब्रीडर रिएक्टर:
    • अवस्थिति: कलपक्कम, तमिलनाडु
    • संचालन: भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) द्वारा
    • क्षमता: 500 मेगावाट
      • पूर्ण रूप से चालू होने के बाद, भारत रूस के बाद वाणिज्यिक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर रखने वाला विश्व का दूसरा देश बन जाएगा।
  • विशेषताएँ:
    • स्वदेशी यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड (MOX) ईंधन का उपयोग करता है,
    • तरल सोडियम को शीतलक (कूलेंट) के रूप में उपयोग करता है,
      • ईंधन कोर के चारों ओर लगा यूरेनियम-238 का "ब्लैंकेट" अधिक ईंधन का उत्पादन करने के लिए परमाणु परिवर्तन (न्यूक्लियर ट्रांसम्यूटेशन) से गुजरता है, इसलिए इसका नाम 'ब्रीडर' (ईंधन बढ़ाने वाला) है।

फास्ट ब्रीडर रिएक्टर का महत्व

  • परमाणु कार्यक्रम के तीसरे चरण की ओर कदम: भारत में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध थोरियम निक्षेप के उपयोग का मार्ग प्रशस्त करता है।
  • अंतर्निहित पैसिव सुरक्षा विशेषताएं: आपात स्थिति में स्वतः सुरक्षित शटडाउन सुनिश्चित करता है।
  • परमाणु अपशिष्ट में कमी: परमाणु कार्यक्रम के प्रथम चरण के प्रयुक्त ईंधन का पुनः उपयोग करता है।

भारत का तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम

  • विकास: 1954 में डॉ. होमी जे. भाभा द्वारा प्रस्तुत किया गया।
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डॉ. होमी जे. भाभा

भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के जनक माने जाते हैं। उन्होंने 1954 में भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की थी, जिसका उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना था।

तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम (Three-Stage Nuclear Programme)

भारत का एक महत्वाकांक्षी परमाणु ऊर्जा विकास कार्यक्रम, जिसे डॉ. होमी जे. भाभा ने 1954 में प्रस्तुत किया था। इसका उद्देश्य देश के प्रचुर थोरियम भंडार का उपयोग करके आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है।

परमाणु परिवर्तन (Nuclear Transmutation)

एक प्रकार की परमाणु अभिक्रिया जिसमें एक रासायनिक तत्व या एक समस्थानिक (isotope) दूसरे में परिवर्तित हो जाता है। FBR में, यूरेनियम-238 ब्लैंकेट इस प्रक्रिया से गुजरकर प्लूटोनियम का उत्पादन करता है।

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