मेघालय सरकार ने सैटेलाइट इंटरनेट को बढ़ावा देने के लिए स्टारलिंक इंडिया के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए | Current Affairs | Vision IAS

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मेघालय स्टारलिंक के साथ औपचारिक रूप से साझेदारी करने वाला तीसरा भारतीय राज्य बन गया है। प्रथम दो राज्य हैं; महाराष्ट्र और गुजरात। 

  • स्टारलिंक को 2019 में स्पेसएक्स ने शुरू किया था। इसकी योजना पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में 42,000 उपग्रह संचालित करने की है।

सैटेलाइट इंटरनेट के बारे में

  • परिभाषा: सैटेलाइट इंटरनेट से तात्पर्य भूस्थैतिक कक्षाओं (Geostationary Orbits: GSO) या गैर-भूस्थैतिक कक्षाओं (NGSO) में प्रक्षेपित उपग्रहों के माध्यम से प्रदान की जाने वाली इंटरनेट सेवा से है।
    • पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) और मध्य भू कक्षा (MEO) गैर-भूस्थैतिक कक्षाओं के अंतर्गत आती हैं।
  • फाइबर, केबल जैसी भू-आधारित इंटरनेट सेवाएं डेटा भेजने के लिए केबल्स (वायर्स) पर निर्भर हैं, जिससे इनकी पहुंच सीमित हो जाती है। वहीं, सैटेलाइट इंटरनेट सेवा इन केबल्स पर निर्भर नहीं है। इससे दुर्गम क्षेत्रों में भी इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध हो जाती हैं। सैटेलाइट इंटरनेट सेवा तेजी से पहुंचाई जा सकती है और लंबी दूरी तक डेटा भेजना आसान हो जाता है।
  • अवसंरचना: इसमें आम तौर पर तीन खंड शामिल होते हैं:
    • अंतरिक्ष खंड (Space Segment): इसमें कई संचार उपग्रहों का नेटवर्क शामिल है।
    • स्थलीय (जमीन पर) खंड: इसमें उपग्रह मापन और नियंत्रण नेटवर्क, गेटवे स्टेशन आदि शामिल हैं।
    • उपयोगकर्ता खंड (User Segment): इसमें उपयोगकर्ताओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले संचार टर्मिनल शामिल हैं।

भूमि से संचालित इंटरनेट सेवाओं की तुलना में लाभ:

  • वैश्विक पहुंच: सैटेलाइट इंटरनेट सेवा उन दूर-दराज़ और कम सेवा वाले क्षेत्रों को इंटरनेट से जोड़ती है, जहाँ फाइबर या मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होते।
  • त्वरित सेवा उपलब्ध कराना: इसके लिए केवल बिजली और खुला आसमान चाहिए, जिससे महंगे और समय लेने वाले निर्माण कार्यों से बचा जा सकता है।
  • आपदाओं के दौरान भी उपयोगी: प्राकृतिक आपदाओं के समय यह सेवा भूमि से संचालित नेटवर्क विफल होने पर संचार को शीघ्र पुनर्बहाल करती है और बैकअप के रूप में कार्य करती है।

सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के लिए विनियामक व्यवस्था

  • दूरसंचार विभाग (DoT): यह एकीकृत लाइसेंस व्यवस्था के तहत लाइसेंस प्रदान करता है और विनियमित करता है।
  • भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI): यह उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन से संबंधित शर्तों की सिफारिश करता है।
  • भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe): यह अंतरिक्ष क्रियाकलापों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देता है, उन्हें अधिकृत करता है और उनके कार्यों की निगरानी करता है।

 

 

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भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (Indian National Space Promotion and Authorization Centre - IN-SPACe)

भारत में अंतरिक्ष गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने, उन्हें अधिकृत करने और उनकी निगरानी करने के लिए स्थापित एक स्वायत्त निकाय है।

भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (Telecom Regulatory Authority of India - TRAI)

भारत में दूरसंचार सेवाओं के लिए टैरिफ और अन्य सेवाओं के विनियमन का कार्य करने वाली एक स्वतंत्र संस्था है, जो उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करती है।

दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications - DoT)

भारत सरकार का एक विभाग जो देश में दूरसंचार सेवाओं के विकास, विस्तार और प्रबंधन के लिए नीतियां बनाता है और लाइसेंसिंग एवं विनियमन का कार्य करता है।

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