भारत के महापत्तनों (Major Ports) ने वित्त वर्ष 2025–26 में उल्लेखनीय प्रगति का प्रदर्शन किया | Current Affairs | Vision IAS

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यह प्रगति मुख्य रूप से क्षमता विस्तार, बंदरगाह की अवसंरचनाओं के आधुनिकीकरण और टर्नअराउंड समय में सुधार के कारण संभव हुई है।

प्रमुख प्रगति पर एक नजर

  • कार्गो हैंडलिंग: वित्त वर्ष 2025–26 में महापत्तनों यानी प्रमुख बंदरगाहों ने 915.17 मिलियन टन (MT) कार्गो (माल ढुलाई) का प्रबंधन किया। यह 904 MT के लक्ष्य से अधिक है और इसमें 7.06% की वृद्धि दर्ज की गई है।
  • शीर्ष प्रदर्शन करने वाले पत्तन: दीनदयाल पत्तन (160.11 MT) पहले स्थान पर रहा, इसके बाद पारादीप पत्तन और जवाहरलाल नेहरू पत्तन प्राधिकरण (JNPA) का स्थान रहा।

प्रगति में सहायक प्रमुख पहलें:

  • विधायी उपाय: महापत्तन प्राधिकरण अधिनियम 2021 बंदरगाहों को अधिक स्वायत्तता प्रदान करता है और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को बढ़ावा देता है। वहीं, भारतीय पत्तन अधिनियम, 2025 (1908 के पुराने कानून की जगह) बंदरगाहों के विनियमन को आधुनिक बनाने का लक्ष्य रखता है। 
    • केंद्र सरकार बंदरगाहों और हार्बर के विकास व रखरखाव में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देती है। इसके लिए स्वचालित मार्ग के तहत 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी गई है।
  • सागरमाला कार्यक्रम: इस कार्यक्रम की शुरुआत 2015 में हुई थी। इस कार्यक्रम के उद्देश्य हैं; बंदरगाहों का आधुनिकीकरण, कनेक्टिविटी में सुधार, नए बंदरगाहों का विकास और तटीय समुदायों का विकास। 
  • मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030: यह विजन भारत को सामुद्रिक क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व करने के लिए 150 पहलों का खाका प्रस्तुत करता है। इन पहलों में बंदरगाहों पर अवसंरचनाओं का विकास, लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार, आदि शामिल हैं।
  • अन्य पहलें: ‘सागर-सेतु’ नाम से नेशनल लॉजिस्टिक्स पोर्टल (मरीन) का विकास; वास्तविक समय में प्रदर्शन की निगरानी हेतु डैशबोर्ड, सागर मंथन, आदि।

निष्कर्ष

  • यह प्रगति मैरीटाइम अमृत काल विज़न 2047 के तहत परिकल्पित ‘बंदरगाह-आधारित विकास’ के लक्ष्य को और अधिक मजबूत करती है।

भारत में बंदरगाह

  • भारत में 14 महापत्तन यानी प्रमुख बंदरगाह हैं। इनमें 12 संचालन में हैं। इनके अलावा देश में लगभग 200 लघु पत्तन हैं।
  • निर्माणाधीन/प्रस्तावित महापत्तन: वधावन पत्तन (महाराष्ट्र) और गैलाथिया बे पोर्ट (ग्रेट निकोबार, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह)।
  • प्रशासन: महापत्तन केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के तहत संचालित होते हैं, जबकि लघु पत्तन यानी छोटे बंदरगाह राज्य समुद्री बोर्ड/राज्य सरकारों के अधीन संचालित होते हैं।

 

 

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मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030 (Maritime India Vision 2030)

A forward-looking vision document outlining a comprehensive plan with 150 initiatives to position India as a global leader in the maritime sector. It focuses on developing port infrastructure, enhancing logistics efficiency, and promoting maritime trade.

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