यह डेटा केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) की रिपोर्ट पर आधारित है। MoFPI ने ‘खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए उत्पादन-से संबद्ध प्रोत्साहन योजना (PLISFPI) वर्ष 2021-22 में शुरू की थी। रिपोर्ट के अनुसार इस योजना ने शानदार प्रदर्शन किया है।
PLISFPI के बारे में
- योजना का प्रकार: केंद्रीय क्षेत्रक योजना
- क्रियान्वयन मंत्रालय: केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI)
- कुल परिव्यय: 10,900 करोड़ रुपये
- योजना अवधि: 6 वर्ष (2021-22 से 2026-27)
- उद्देश्य:
- वैश्विक खाद्य विनिर्माण चैंपियन बनाना,
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय खाद्य-पदार्थ ब्रांडों को बढ़ावा देना,
- गैर-कृषि क्षेत्रक में रोजगार के अवसर सृजित करना,
- किसानों को उनकी उपज के लिए बेहतर मूल्य दिलाना और उनके लिए उच्च आय सुनिश्चित करना।
भारत में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रक के बारे में
- इसमें विभिन्न भौतिक, रासायनिक और यांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से कच्चे कृषि उत्पादों को उपभोग योग्य खाद्य पदार्थों में परिवर्तित करना शामिल है।
- यह क्षेत्रक खाद्य पदार्थों की शेल्फ लाइफ (उपयोग अवधि), संरक्षा (सेफ्टी) और गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे बढ़ती वैश्विक आबादी की मांगों को पूरा करने में मदद मिलती है।
- उद्योगों के वार्षिक सर्वेक्षण (ASI) रिपोर्ट के अनुसार:
- खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रक में सकल मूल्य वर्धित (GVA) 1.61 लाख करोड़ रुपये (2015-16) से बढ़कर 1.92 लाख करोड़ रुपये (2022-23) हो गया।
- इस क्षेत्रक ने विगत 8 वर्षों में लगभग 5.35% की औसत वार्षिक संवृद्धि दर (AAGR) प्राप्त की है।
- इस क्षेत्रक में नियोजित लोगों की संख्या 17.73 लाख (2014-15) से बढ़कर 20.68 लाख (2021-22) हो गई।
- खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रक को बढ़ावा देने हेतु अन्य प्रमुख सरकारी पहलें:
- पीएम किसान संपदा योजना (PMKSY),
- प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (PMFME),
- मेगा फूड पार्क्स योजना, आदि।
