ICAR ने वैश्विक भू-राजनीतिक परिवर्तनों के बीच कृषि लचीलेपन की रणनीति बनाने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है।
ICAR के बारे में
- मुख्यालय: नई दिल्ली में
- स्थापना: लॉर्ड लिनलिथगो के समय कृषि पर रॉयल कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर इसकी स्थापना हुई थी।
- यह सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत 'इंपीरियल काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च' के रूप में पंजीकृत हुई थी।
- मंत्रालय: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत संचालित।
- पदेन अध्यक्ष: केंद्रीय कृषि मंत्री।
- कार्य: कृषि अनुसंधान और शिक्षा (बागवानी, मत्स्य पालन, पशु विज्ञान सहित) के समन्वय और मार्गदर्शन के लिए शीर्ष निकाय।
- जैसे: हरित क्रांति प्रौद्योगिकियों से संबंधित अनुसंधान।
प्रमुख पहलें
- कृषि विज्ञान केंद्र (KVK): जिला स्तर पर कृषि अनुसंधान और किसानों को जोड़ना।
- जलवायु लचीली कृषि पर राष्ट्रीय नवाचार (NICRA): भारतीय कृषि के लचीलेपन को बढ़ाना, ताकि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटा जा सके।
Article Sources
1 sourceराज्य सभा के सभापति और लोकसभा के अध्यक्ष ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) के विरुद्ध महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस को खारिज कर दिया।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) के बारे में
- संविधान का अनुच्छेद 324 यह प्रावधान करता है कि CEC को उसके पद से केवल उन्हीं आधारों और उसी रीति से हटाया जाएगा, जैसे- उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
- हटाने का आधार बताने वाला पदच्युति प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है।
- अध्यक्ष/ सभापति इस प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं। यदि इसे स्वीकार कर लिया जाता है, तो आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया जाता है।
- यदि समिति CEC को सिद्ध कदाचार या अक्षमता का दोषी पाती है, तो दोनों सदनों को विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित करना होगा।
- पदच्युति प्रस्ताव पारित होने के बाद, राष्ट्रपति CEC को पदच्युत करने का आदेश जारी करते हैं।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया है कि FSSAI के पास पशु आहार को विनियमित करने का कोई अधिकार नहीं है। इसका कारण यह है कि FSSAI अधिनियम 2006 के तहत "खाद्य पदार्थ" की परिभाषा में पशु आहार शामिल नहीं है।
FSSAI के बारे में
- मंत्रालय: केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय।
- सांविधिक निकाय: यह खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत सांविधिक निकाय है।
- अधिदेश (मैंडेट): यह खाद्य पदार्थों के लिए विज्ञान आधारित मानक निर्धारित करता है। यह खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण, वितरण, बिक्री और आयात को विनियमित करता है, ताकि खाद्य संरक्षा (फ़ूड सेफ्टी) सुनिश्चित हो सके।
- शुरू की गई प्रमुख पहल: ईट राइट इंडिया।
- शासी संरचना: यह खाद्य प्राधिकरण है, जिसमें एक अध्यक्ष और 22 सदस्य (एक-तिहाई महिलाएं) होते हैं।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने पिछले दशक में जम्मू और कश्मीर की झीलों में गंभीर पारिस्थितिक क्षरण को रेखांकित किया।
- कुल 697 झीलों में से 315 झीलें लुप्त हो गई हैं। इसके अतिरिक्त 203 झीलें सिकुड़ गई हैं, और कुल 518 झीलों का निम्नीकरण हुआ है।
जम्मू और कश्मीर की झीलें
- डल झील: यह श्रीनगर शहर में स्थित झील है। इसमें 'राड' नामक तैरते हुए उद्यान पाए जाते हैं।
- वुलर झील: यह एशिया में ताजे जल की दूसरी सबसे बड़ी झील है। इसका मुख्य स्रोत झेलम नदी है और यह हरमुख पर्वत की तलहटी में स्थित है।
- होकरसर झील: इसे 'आर्द्रभूमियों की रानी' के रूप में जाना जाता है। यह प्रवासी पक्षियों के लिए एक अभयारण्य है।
- मानसबल झील: यहाँ नूरजहाँ द्वारा निर्मित 'जरोखा' नामक मुगल उद्यान झील के सामने स्थित है।
एक नए अध्ययन के अनुसार चक्रवात, जलवायु परिवर्तन और मानव-जनित दबावों के कारण सुंदरबन “क्रिटिकल स्लोइंग डाउन” की प्रक्रिया से गुजर रहा है।
- क्रिटिकल स्लोइंग डाउन एक ऐसी परिघटना है जहाँ पारितंत्रों को पुनर्बहाली में अधिक समय लगता है। इसके परिणामस्वरूप पारितंत्र समय के साथ और अधिक अस्थिर हो जाते हैं।
सुंदरबन के बारे में
- यह विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन क्षेत्र है।
- अवस्थिति: यह बंगाल की खाड़ी में गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना नदियों के डेल्टा पर स्थित है। इसका विस्तार भारत (40%) और बांग्लादेश (60%) में है।
- संरक्षण: यह यूनेस्को-विश्व धरोहर स्थल, यूनेस्को मानव और जीवमंडल कार्यक्रम के तहत बायोस्फीयर रिजर्व और रामसर स्थल है।
- बहने वाली मुख्य नदियाँ: मुरीगंगा, रायमंगल, हरिभंगा, सप्तमुखी, ठकुरान, मातला आदि।
- जीव-जंतु: यह विश्व स्तर पर बाघों की सबसे बड़ी एकल समष्टियों में से एक है। यहां बाघ उभयचर जीवन जीने के अनुकूल हो गए हैं।
- वनस्पति: सुंदरी जैसे लवण-सहिष्णु पौधे।
ईरान के केशम द्वीप का विलवणीकरण संयंत्र मार्च की शुरुआत में हुए हमले के बाद से संचालन में नहीं है।

केशम द्वीप (ईरान)
- अवस्थिति: यह बंदर अब्बास के पास स्थित है और खुरान (क्लैरेंस) जलडमरूमध्य द्वारा अलग होता है।
- यह फारस की खाड़ी का सबसे बड़ा द्वीप है।
- सामरिक महत्व: यह होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट है। यह वैश्विक तेल शिपिंग मार्ग के लिए महत्वपूर्ण है और ईरान को समुद्री यातायात पर रणनीतिक लाभ प्रदान करता है।
- स्थलाकृति: चट्टानी तटरेखा के साथ बलुई खाड़ियाँ और पंक-युक्त मैदान।
हाल ही में, वैज्ञानिकों ने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में शिवालिक हिमालय की तलहटी में जीवाश्मों की खोज की है।
नई खोज के बारे में
- आयु: ये जीवाश्म लगभग 5 मिलियन वर्ष पुराने (अतिनूतन युग या प्लायोसीन युग) हैं।
- निष्कर्ष: ताजे जल की मछली के 3 प्रकारों के ओटोलिथ (कैल्शियम कार्बोनेट से बनी कान की हड्डी) जीवाश्म मिले हैं। मछलियों के ये तीन प्रकार हैं: गौरामी, स्नेकहेड्स (चन्ना) और गोबीज।
महत्व:
- यह भारत में गौरामी मछली का पहला जीवाश्म रिकॉर्ड है और विश्व स्तर पर केवल दूसरा ज्ञात रिकॉर्ड है।
- "स्थलीय" खोज से जुड़े मिथक को तोड़ना: एक ऐसे क्षेत्र में जलीय जीवाश्मों की पहली बार खोज की गई है, जो पहले केवल स्थलीय जीवों के अवशेषों के लिए जाना जाता था।
- एक "लेंटिक" ताजे जल के पारिस्थितिक तंत्र का प्रमाण: गौरामी मछली शांत या स्थिर ताजे जल को पसंद करती है।
- जटिल खाद्य श्रृंखला: उदाहरण के लिए, शिकार (गोबीज) के साथ शिकारियों (स्नेकहेड्स) की खोज।
हाल ही में, अमेरिका और ईरान ने दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की है।

- समझौते के तहत ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को अस्थायी रूप से फिर से खोलने के लिए सहमत हुआ।
- ईरान ने युद्ध की समाप्ति की स्वीकृति के लिए 10 सूत्री योजना को अंतिम रूप दिया है। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य पर निरंतर ईरानी नियंत्रण और मध्य पूर्व से अमेरिकी सैनिकों की वापसी जैसे बिंदु शामिल हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य के बारे में
- यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से और आगे अरब सागर से जोड़ता है।
- ऊर्जा पारगमन केंद्र: विश्व का 20% तेल यहाँ से गुजरता है।
- भारत के कच्चे तेल के आयात का लगभग 40%, LNG आयात का 50% से अधिक और LPG आयात का 90% इस जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।