"भारत में भूमि असमानता: प्रकृति, इतिहास और बाजार" शीर्षक से जारी इस रिपोर्ट में भारत के दस प्रमुख राज्यों का डेटा शामिल है। इन दस राज्यों में भारत की 75% ग्रामीण आबादी बसती है।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर
- अत्यधिक संपत्ति संकेंद्रण: शीर्ष 10% ग्रामीण परिवारों के पास कुल भूमि-क्षेत्र का 44% हिस्सा है।
- व्यापक भूमिहीनता: भारत के लगभग 46% ग्रामीण परिवार पूरी तरह से भूमिहीन हैं।
- ग्राम-स्तरीय भूमि गिनी गुणांक: यह 71.1 के अत्यधिक उच्च स्तर पर है।
- बड़े भूस्वामी: एक औसत गांव में सबसे बड़े भूस्वामी के नियंत्रण में गांव की लगभग 12.4% भूमि है।
- क्षेत्रीय आधार पर असमानताएं:
- सर्वाधिक असमानता: केरल में (भूमि गिनी गुणांक 90)।
- न्यूनतम असमानता: कर्नाटक और राजस्थान में (भूमि गिनी गुणांक 65 से नीचे)।
- भूमिहीनता की दर: पंजाब में सर्वाधिक (73%)।
भारत में भूमि असमानता के मुख्य कारक
- उच्च उत्पादकता: उच्च उत्पादकता बड़े भू-जोतों के विस्तार में मदद करती है और भूमिहीनता को बढ़ावा देती है।
- इतिहास:
- औपनिवेशिक काल: पूर्व में ब्रिटिश ज़मींदारी व्यवस्था के अधीन रहे क्षेत्रों में "रियासतों" (देशी राज्यों) की तुलना में अधिक असमानता देखी जाती है।
- सामाजिक स्तरीकरण: जिन गांवों में अनुसूचित जाति (SC) की आबादी अधिक है, वहाँ ऐतिहासिक भूमिहीनता के कारण अधिक असमानता देखी जाती है।
- बाजार (आर्थिक एकीकरण): कस्बों, प्रमुख राजमार्गों, रेलवे, बैंकों और कृषि मंडियों जैसे आर्थिक केंद्रों से निकटता उच्च भूमि असमानता से जुड़ी है।
- आर्थिक एकीकरण खेती की तुलना में गैर-कृषि कार्यों से आय में बदलाव लाता है। इससे लघु कृषकों को लगता है कि उनकी लघु आकार और कम लाभ वाली जमीन बेकार है, इसलिए वे उसे बड़े भू स्वामियों को बेचने के लिए प्रेरित हो जाते हैं।
भारत में भूमि असमानता को कम करने के लिए उठाए गए कदम
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