नीति आयोग ने ‘प्रभावी नगर सरकार की ओर: मिलियन-प्लस शहरों के लिए एक रूपरेखा’ शीर्षक से रिपोर्ट जारी की | Current Affairs | Vision IAS

Upgrade to Premium Today

Start Now
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

अपना ज्ञान परखें

आर्थिक अवधारणाओं में महारत हासिल करने और नवीनतम आर्थिक रुझानों के साथ अपडेट रहने के लिए गतिशील और इंटरैक्टिव सत्र।

ESC

भारत में 10 लाख से अधिक आबादी वाले (मिलियन-प्लस) 47 शहरों में भारत की एक-तिहाई शहरी आबादी रहती है। ये शहर भारत की GDP में 60% का योगदान देते हैं।

  • हालांकि, इन शहरों को अवसंरचना की कमीसेवाओं की आपूर्ति में समस्याआवास की कमीपरिवहन (मोबिलिटी)पर्यावरणीय संधारणीयता और सामाजिक समावेशन से जुड़ी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ये चुनौतियां इन विकसित हो रहे शहरों की रहने योग्य स्थिति (livability) और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं।

मिलियन-प्लस शहरों में शहरी शासन की चुनौतियां

  • कार्यों या शक्तियों का सीमित हस्तांतरण: 74वें संविधान संशोधन अधिनियम के अनुसार नगर निकायों को 18 कार्यों को सौंपा जाना था, लेकिन इनमें से केवल 4 कार्यों को ही पूर्ण रूप से सौंपा गया है।
  • विभाजित संस्थागत ढांचा और अप्रभावी नेतृत्व: निर्वाचित प्रतिनिधियों और नगर निगम प्रशासन के बीच भूमिकाओं का स्पष्ट सीमांकन नहीं हो पाया है।
    • महापौरों (Mayors) को नगर शासन का वास्तविक प्रमुख नहीं माना जाता है।
  • कम राजस्व और धन का सीमित हस्तांतरण: 
    • नगर निकायों के स्वयं के राजस्व स्रोत कम है, 
    • ये आबद्ध अनुदानों (Tied grants) पर अधिक निर्भर हैं; 
    • राज्य वित्त आयोग के गठन में देरी होती है और उसकी सिफारिशों का आंशिक तौर पर ही क्रियान्वयन हो पाता है।
  • लोक सेवा-प्रदायगी में कमियां: सार्वजनिक परिवहन, शहरी योजना-निर्माण, जल और स्वच्छता जैसी प्रमुख सेवाओं में नगर सरकारों की भूमिका बहुत कम या न के बराबर बनी हुई है।
  • क्षमता की कमी: कर्मचारियों का समय पर भर्ती नहीं होना, प्रतिनियुक्ति पर उच्च निर्भरता, अधिकारियों का बार-बार स्थानांतरण और प्रशिक्षण में सीमित निवेश अन्य समस्याएं हैं।

रिपोर्ट में की गईं प्रमुख सिफारिशें

  • नेतृत्व: निश्चित कार्यकाल के साथ प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित महापौर और सशक्त महापौर परिषद की व्यवस्था की जानी चाहिए।
  • एकीकृत सेवा वितरण: जल, स्वच्छता और परिवहन जैसी सेवाओं को नगर स्थानीय शासन के तहत लाने की जरूरत है ताकि बेहतर समन्वय हो सके।
  • नगर निगम के वित्तीय स्रोतों को बढ़ाना: इसके लिए स्वयं के राजस्व स्रोत बढ़ाना, मजबूत राज्य वित्त आयोगों के माध्यम से समय पर वित्तीय हस्तांतरण सुनिश्चित करना, और नगरपालिका बॉण्ड जैसे बाजार-आधारित वित्तीय स्रोतों तक पहुंच को सक्षम बनाना आवश्यक है।
  • संस्थाओं का पुनर्गठन: परास्टेटल (अर्ध-सरकारी) एजेंसियों को शहर प्रशासन के अधीन लाकर उनकी भूमिकाएं स्पष्ट की जाएं और बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाए।
  • कानूनी और नीतिगत सुधार: राज्य सरकारों को नगर निगम कानूनों में संशोधन करना चाहिए, और केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा मॉडल म्युनिसिपल कानून को अपडेट कर सुधारों को बढ़ावा देना चाहिए।
Watch Video News Today

Explore Related Content

Discover more articles, videos, and terms related to this topic

RELATED TERMS

3

सशक्त महापौर परिषद

एक शहरी शासन मॉडल जहां महापौर (Mayor) को नगर परिषद (Municipal Council) के कार्यकारी प्रमुख के रूप में सशक्त बनाया जाता है। इसमें महापौर अपनी मंत्रिपरिषद के साथ मिलकर शहर के प्रशासन और नीतियों के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार होता है।

नगरपालिका बॉण्ड

ये शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) द्वारा अपनी पूंजीगत परियोजनाओं के वित्तपोषण, ऋणों के पुनर्वित्त और कार्यशील पूंजी की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जारी किए जाने वाले विनिमेय ऋण साधन हैं। ये प्रत्यक्ष रूप से या किसी मध्यवर्ती संस्था के माध्यम से जारी किए जा सकते हैं।

परास्टेटल (अर्ध-सरकारी) एजेंसियां

ऐसी एजेंसियां जो सरकारी होती हैं लेकिन स्वायत्त रूप से कार्य करती हैं, अक्सर विशिष्ट क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखती हैं। शहरी शासन के संदर्भ में, ये जल, सीवेज, परिवहन या आवास जैसी सेवाएं प्रदान कर सकती हैं, लेकिन अक्सर नगर निगमों के साथ समन्वय की कमी होती है।

Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet