इस रिपोर्ट में भारत में जनसंख्या, शिक्षा, स्वास्थ्य-देखभाल, रोजगार और निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिला और पुरुषों की भागीदारी के रुझानों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
रिपोर्ट के मुख्य अंश
- जनसंख्या:
- जन्म के समय लिंगानुपात: यह 2017-19 के 904 से सुधरकर 2021-23 में 917 हो गया।
- अरुणाचल प्रदेश में सर्वाधिक लिंगानुपात (1085) है, जबकि झारखंड में सबसे कम (899) है।
- जनसंख्या वृद्धि: भारत में जनसंख्या की औसत वार्षिक घातीय वृद्धि (exponential growth) एक उल्टे U-आकार (inverted U-shape) का रुझान दर्शाती है, जो 1971–81 के दौरान अपने उच्चतम स्तर पर पहुँची और उसके बाद लगातार घटती गई।
- जन्म के समय लिंगानुपात: यह 2017-19 के 904 से सुधरकर 2021-23 में 917 हो गया।
- स्वास्थ्य-देखभाल:
- मातृ मृत्यु अनुपात (MMR): 2004-06 के 254 से घटकर 2021-23 में 88 हो गया, जो व्यापक गिरावट है।
- कुल प्रजनन दर (TFR): 2019 से 2023 के बीच कुल प्रजनन दर घटकर शहरी क्षेत्रों में 1.5 और ग्रामीण क्षेत्रों में 2.1 हो गई।
- शिक्षा:
- साक्षरता दर: भारत में पुरुष और महिला साक्षरता दरों में 14.4 प्रतिशत अंकों का अंतर है (पुरुष- 84.7% और महिला- 70.3%)।
- सकल नामांकन अनुपात (GER): स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों पर महिला GER, पुरुष GER से अधिक है।
- अर्थव्यवस्था में भागीदारी:
- कर्मकार (वर्कर) जनसंख्या अनुपात (15 वर्ष और उससे अधिक आयु): 2025 में, यह पुरुषों के लिए 76.6% और महिलाओं के लिए 38.8% था।
- महिला श्रम बल भागीदारी दर (LFPR): ग्रामीण क्षेत्रों में यह 37.5% से बढ़कर 45.9% हो गई।
- निर्णय लेने में भागीदारी:
- मतदान प्रतिशत: 2019 और 2024 के आम चुनावों में महिला मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक रहा।
- संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व: 2025 में 13.65% सांसद और 9.86% मंत्री महिलाएं थीं।