केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन के लिए एक मसौदा जारी किया है। इसमें वाहनों के प्रमाणन और उपयोग के लिए E85 और E100 इथेनॉल ईंधन तथा B100 बायोडीजल को शामिल करने का प्रस्ताव है।
इथेनॉल सम्मिश्रण (Ethanol Blending) के बारे में
- इसमें पेट्रोल के साथ इथेनॉल को अलग-अलग अनुपात में मिलाया जाता है। इससे ऐसा ईंधन तैयार होता है जो अधिक स्वच्छ रूप से जलता है और पर्यावरण के लिए अधिक संधारणीय होता है।
- प्रकार: E10 (10% इथेनॉल अनुपात), E20 (20% इथेनॉल अनुपात), E85 (85% इथेनॉल अनुपात), आदि।
- E-10 ईंधन की तुलना में E-20 से वाहन की गति बढ़ाने (एक्सेलरेशन) में मदद मिलती है, बेहतर यात्रा अनुभव मिलता है और कार्बन उत्सर्जन लगभग 30% तक कम हो जाता है।
ईंधन में इथेनॉल सम्मिश्रण का महत्व
- कार्बन उत्सर्जन में कमी: नीति आयोग के एक अध्ययन के अनुसार, गन्ने और मक्के से तैयार इथेनॉल पेट्रोल की तुलना में ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन को क्रमशः 65% और 50% तक कम करते हैं।
- ईंधन आयात में कमी: इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम (Ethanol Blending Programme) ने 2014 से 2024 तक लगभग 1.08 ट्रिलियन रुपये के बराबर की विदेशी मुद्रा की बचत की है। इससे ईंधन आयात पर निर्भरता कम हुई है।
- ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि: कच्चे तेल के आयात पर भारत की अधिक निर्भरता की वजह से बाह्य संकट के कारण आपूर्ति बाधित होने का खतरा बना रहता है। इथेनॉल मिश्रण से इस खतरे को कम करने में मदद मिल रही है।
- अन्य लाभ: आर्थिक संवृद्धि, फसल विविधीकरण और ईंधन दक्षता बढ़ाने, तथा ग्रामीण विकास में मदद मिलती है, आदि।

प्रमुख पहलें
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