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भारत ने 7.6 अरब डॉलर की चावल सब्सिडी देने के लिए 7वीं बार विश्व व्यापार संगठन (WTO) के पीस क्लॉज का उपयोग किया है।

‘पीस क्लॉज’ के बारे में

  • बाली (2013) में विश्व व्यापार संगठन के मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में एक अंतरिम व्यवस्था के रूप में इस पर सहमति व्यक्त की गई थी।
  • यह विकासशील देशों को खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक भंडारण कार्यक्रमों (Public stockholding programmes) के तहत सब्सिडी प्रदान करने की अनुमति देता है।
  • यदि सब्सिडी निर्धारित सीमा से अधिक भी हो जाए, तब भी यह प्रावधान ऐसे कार्यक्रमों को WTO के विवाद निपटान तंत्र में कानूनी चुनौतियों से संरक्षण प्रदान करता है।
  • कृषि सब्सिडी के प्रकार (WTO वर्गीकरण):
    • ग्रीन बॉक्स: व्यापार में विकृति न पैदा करने वाली  (Non-trade distorting) सब्सिडी जैसे- अनुसंधान, अवसंरचना, पर्यावरण संरक्षण और खाद्य सुरक्षा सेवाएं; इस पर सब्सिडी की कोई ऊपरी सीमा नहीं है।
    • एम्बर बॉक्स: व्यापार में विकृति पैदा करने वाली (Trade-distorting) सब्सिडी-जैसे MSP, मूल्य समर्थन और इनपुट सब्सिडी (उर्वरक, बिजली); 
      • यह उत्पादन के कुल मूल्य के 5% के भीतर और विकासशील देशों के मामले में 10% के भीतर होनी चाहिए।
  • ब्लू बॉक्स: ये ऐसी सब्सिडी होती हैं जो उन कार्यक्रमों से जुड़ी होती हैं, जिनका उद्देश्य उत्पादन को सीमित करना होता है—जैसे उत्पादन कोटा लगाना या किसानों को कुछ भूमि को अन्य उद्देश्यों के लिए खाली छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करना।

असम के भास्कर ज्योति सोनोवाल 2026-27 के कार्यकाल के लिए ब्रिक्स उद्यमी गठबंधन-वैश्विक मंच (BRICS Entrepreneurs Alliance-Global Forum) की अध्यक्षता संभालेंगे।

  • यह घोषणा हैदराबाद में इंडिया ब्रिक्स बिजनेस समिट के बाद हुई, जहां MSMEs के विकास और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए हैदराबाद घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए गए।

BEA-GF के बारे में 

  • स्थापना: इसकी शुरुआत 2025 में हुई। 
  • मंच: यह ब्रिक्स देशों के उद्यमियों, स्टार्टअप्स और व्यावसायिक नेतृत्वकर्ताओं को जोड़ने वाला एक मंच है।
  • दृष्टिकोण: सत्यनिष्ठा, जिम्मेदारी और पारस्परिक विकास के साथ BRICS+ में सहयोग करने वाले एक विश्वसनीय भारतीय उद्यमी नेटवर्क का निर्माण करना।
  • उद्देश्य:
    • नेटवर्किंग: यह उद्यमियों, निवेशकों और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद को सुविधाजनक बनाता है।
    • ज्ञान साझाकरण: प्रौद्योगिकी, डिजिटल अर्थव्यवस्था, हरित विकास और विनिर्माण के क्षेत्रक में आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करता है।
    • व्यवसाय सुगमता: यह ब्रिक्स के भीतर सीमा-पार साझेदारी और व्यवसाय सुगमता को बढ़ावा देता है।

भारतीय विमानन कंपनियों;  इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट का प्रतिनिधित्व करने वाले एयरलाइन निकाय ने सरकार को एक आपातकालीन सुझाव (SOS) भेजा है, जिसमें एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के मूल्य निर्धारण फॉर्मूले में बदलाव करने का आग्रह किया गया है।

एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) / जेट ईंधन के बारे में

  • यह मुख्य रूप से कच्चे तेल से प्राप्त होता है और एक विशेष, रंगहीन, केरोसीन-आधारित पेट्रोलियम उत्पाद है, जिसे विमान के गैस-टर्बाइन इंजनों के लिए बनाया जाता है।
  • प्रकार: जेट A और जेट A-1, जिनमें Jet A-1 वैश्विक मानक है क्योंकि यह ठंडे मौसम में बेहतर प्रदर्शन करता है।
  • महत्व: यह स्थैतिक विद्युत (static discharge), जंग और सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकता है, जिससे 35,000 फीट की ऊंचाई पर भी सुरक्षा और विश्वसनीयता बनी रहती है।
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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने अपने विक्रम VT 21 प्रोजेक्ट के तहत दो उन्नत बख्तरबंद प्लेटफॉर्म लॉन्च किए हैं—एक पहियों (wheeled) वाला और दूसरा ट्रैक (tracked) आधारित

विक्रम VT 21 के बारे में

  • इसमें उन्नत कवच सुरक्षा दी गई है, जो कुछ प्रकार की गोलियों, विस्फोटों और छर्रों से बचाव कर सकती है, साथ ही बेहतर गतिशीलता, एकीकृत हथियार और निगरानी प्रणाली भी उपलब्ध कराती है।
  • यह STANAG लेवल 4 और 5 सुरक्षा प्रदान करता है, जो NATO द्वारा निर्धारित मानक हैं। इसका अर्थ है कि यह भारी गोलीबारी, विस्फोटों और तोप के टुकड़ों से सुरक्षा देने में सक्षम है। साथ ही इसमें मॉड्यूलर ब्लास्ट और बैलिस्टिक सुरक्षा भी शामिल है।
  • यह उभयचर (जल और थल दोनों पर संचालन में सक्षम) है।
  • यह भारतीय सेना की भविष्य के इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल (फ्यूचरिस्टिक इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल) की आवश्यकता के लिए एक संभावित समाधान है।

उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) की पीठों में समाधान योजनाओं को मंजूरी देने में हो रही देरी का स्वतः संज्ञान लिया है।

NCLT के बारे में

  • गठन: यह कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत स्थापित एक अर्ध-न्यायिक निकाय है।
  • भूमिका: यह कंपनियों और कॉर्पोरेट गवर्नेंस से संबंधित विवादों का निपटारा करता है।
  • दिवाला-समाधान प्राधिकरण: यह दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC), 2016 के तहत न्याय-निर्णयन प्राधिकरण के रूप में कार्य करता है।
  • उद्देश्य:
    • कंपनियों से संबंधित सभी मामलों को एक ही प्राधिकरण के अंतर्गत लाना।
    • रुग्ण (बीमार) और संकटग्रस्त उद्योगों से संबंधित मामलों का निपटारा करना।
  • अपीलीय निकाय: इसके निर्णय के खिलाफ अपील राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) में की जाती है।
  • आगे की अपील: विधि के प्रश्नों पर इसके निर्णयों को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।

भारत ने मिशन मौसम के तहत डॉप्लर वेदर रडार (DWR) नेटवर्क में 250% से अधिक की वृद्धि का विस्तार किया है।

  • डॉप्लर वेदर रडार में बारिश की बूंदों और मौसम प्रणालियों की गति को मापने के लिए डॉप्लर प्रभाव का उपयोग किया जाता है।
    • डॉप्लर प्रभाव: यह किसी तरंग की देखी गई आवृत्ति (frequency) या तरंगदैर्घ्य (wavelength) में होने वाला परिवर्तन है, जो स्रोत और पर्यवेक्षक के बीच सापेक्ष गति के कारण होता है।

मिशन मौसम के बारे में

  • शुरुआत: 2024 में।
  • संबंधित मंत्रालय: केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES)।
  • कार्यान्वयन एजेंसी: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), नेशनल सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्टिंग (NCMRWF), और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM)।
  • बजट: दो वर्षों में ₹2,000 करोड़।
  • लक्ष्य:
    • भारत को 'वेदर रेडी' (मौसम से निपटने के लिए तैयार) और 'क्लाइमेट स्मार्ट' बनाना।
    • कृषि, आपदा प्रबंधन और ग्रामीण विकास सहित कई क्षेत्रकों के लिए समय पर और सटीक अवलोकन, मॉडलिंग और पूर्वानुमान जानकारी सुनिश्चित करते हुए मौसम और जलवायु पूर्वानुमान सेवाओं में सुधार करना।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने पारदर्शिता और निवेशक सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए PaRRVA का संचालन शुरू किया।

PaRRVA के बारे में

  • यह एक नया सत्यापन तंत्र है, जिसे विनियमित बाजार मध्यवर्तियों द्वारा किए गए पिछले प्रदर्शन के दावों की पुष्टि करने के लिए बनाया गया है।
  • यह दो-स्तरीय संरचना के माध्यम से कार्य करेगा: 1. SEBI-पंजीकृत क्रेडिट रेटिंग एजेंसी, जो PaRRVA के रूप में कार्य करेगी; और 2. एक मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज, जो PaRRVA डेटा सेंटर (PDC) के रूप में काम करेगा।
    • केयर रेटिंग्स लिमिटेड को PaRRVA के रूप में मान्यता दी गई है, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया PaRRVA डेटा सेंटर (PDC) के रूप में कार्य करेगा।
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Blue Box Subsidies

Subsidies given to agricultural producers under programmes that require them to limit production. These are a form of production-limiting support.

Amber Box Subsidies

Trade-distorting agricultural subsidies, such as Minimum Support Price (MSP), price support, and input subsidies (fertilizers, electricity). These are subject to limits under WTO rules, typically 5% of the value of production for developed countries and 10% for developing countries.

Green Box Subsidies

Categories of agricultural support that are considered non-trade distorting by the WTO. These include investments in research, infrastructure, environmental protection, and food security services, and are allowed without limits.

Title is required. Maximum 500 characters.

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