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वैज्ञानिकों ने 2026 के अंत में "सुपर" एल नीनो की संभावना का पूर्वानुमान लगाया है। इसने तीव्र लू (हीटवेव), सूखे, बाढ़ और चरम मौसमी घटनाओं को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

सुपर एल नीनो के बारे में

  • यह असाधारण रूप से गंभीर एल नीनो घटना है। इसमें मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री जल सतह का तापमान लगातार सामान्य से 2°C से अधिक बढ़ जाता है।
  • एल नीनो, एल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) का उष्मीय चरण है। इसमें मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है, जो प्रायः भारतीय मानसून को कमजोर कर देता है।

भारत को ‘स्पेशल 301 रिपोर्ट' की 'प्राथमिकता निगरानी सूची'  में बरकरार रखा गया है। इसका अर्थ है कि भारत में बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) की सुरक्षा और उसके अनुपालन को लेकर अभी भी चिंताएं बनी हुई हैं।

स्पेशल 301 रिपोर्ट के बारे में

  • जारीकर्ता: इसे व्यापार अधिनियम, 1974 के तहत, संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) द्वारा जारी किया जाता है।
  • यह रिपोर्ट उन देशों को चिन्हित करती है, जो USTR के अनुसार बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) की पर्याप्त और प्रभावी सुरक्षा नहीं देते; या अमेरिका के IPR धारकों को न्यायसंगत और समान बाजार पहुंच उपलब्ध नहीं कराते।
  • यह रिपोर्ट कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन व्यापार वार्ता में दबाव बनाने के साधन के रूप में उपयोग की जाती है।

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने आवश्यक सहायक उत्पादों की राष्ट्रीय सूची (NLEAP) पहल के तहत सहायक चिकित्सा उपकरणों  के लिए मानक  जारी किए हैं, जैसे: कोहनी की बैसाखी, चलने की छड़ी, कई पैरों वाली चलने की छड़ी। 

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के बारे में

  • यह भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016 के तहत भारत का राष्ट्रीय मानक निकाय है।
  • मुख्यालय: नई दिल्ली।
  • क्षेत्रीय कार्यालय: कोलकाता, चेन्नई, मुंबई, चंडीगढ़, दिल्ली

मुख्य कार्य

  • मानक निर्धारण: यह 17 क्षेत्रकों से जुड़े मानक निर्धारित करता है, जैसे - कृषि, इलेक्ट्रॉनिक्स, पर्यावरण, स्वास्थ्य क्षेत्रक।
  • उत्पाद प्रमाणन: BIS मानक चिह्न (ISI मार्क) भारतीय मानकों के अनुरूपता को सुनिश्चित करता है।
  • हॉलमार्किंग: स्वर्ण (वर्ष 2000 से) और चांदी (वर्ष 2005 से) की शुद्धता सुनिश्चित करती है।
  • प्रयोगशाला सेवाएं: उत्पाद अनुरूपता और प्रमाणन के परीक्षण के लिए 8 BIS प्रयोगशालाएं एवं NABL द्वारा मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं।

इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस के एक हालिया अध्ययन में इस तथ्य को रेखांकित किया गया है कि भारत का अति-महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) का आयात अभी भी कुछ ही देशों से किया जाता है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • भारत में खनिजों के आयात के प्रमुख स्रोत:
    • कोबाल्ट: फिनलैंड
    • तांबा: तंजानिया, जापान
    • लिथियम: आयरलैंड, चिली, चीन
    • ग्रेफाइट: चीन
    • निकल: ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम
  • आयात पर अधिक निर्भरता: भारत लिथियम, कोबाल्ट और निकल के लिए 100% आयात पर निर्भर है।
  • चिली, भारत के लिए सबसे बड़े अति-महत्वपूर्ण खनिजों के आपूर्तिकर्ता (वित्त वर्ष 2019 से वित्त वर्ष 2025) के रूप में उभरा है। इसका मुख्य कारण तांबे के अयस्क और लिथियम से जुड़े आयात हैं।
  • चीन का प्रभुत्व: वैश्विक ग्रेफाइट उत्पादन, कोबाल्ट प्रसंस्करण और बैटरी आपूर्ति श्रृंखलाओं में इसका प्रभुत्व है। यह स्थिति भारत के लिए रणनीतिक रूप से चिंता का विषय है। 

भारत के मुख्य न्यायाधीश ने सिक्किम को देश की पहली पेपरलेस राज्य न्यायपालिका घोषित किया।

  • पूर्णतः पेपरलेस न्यायपालिका एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें सभी न्यायिक प्रक्रियाएं कागज के बजाय डिजिटल माध्यम से की जाती हैं, जैसे—डिजिटल फाइलें, ई-फाइलिंग, ऑनलाइन सुनवाई, डिजिटल केस ट्रैकिंग आदि।
  • न्यायालयों का यह डिजिटल रूपांतरण 'ई-कोर्ट मिशन मोड प्रोजेक्ट' के तहत किया जा रहा है।

‘ई-कोर्ट मिशन मोड प्रोजेक्ट’ के बारे में

  • यह प्रभावी और सुलभ न्याय सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए न्यायपालिका को कम्प्यूटरीकृत और डिजिटल बनाने की एक अखिल भारतीय पहल है।
  • शुरुआत: इसे राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (NeGP) के तहत 2007 में शुरू किया गया था।
  • कार्यान्वयन प्राधिकरण: इसका कार्यान्वयन भारत के उच्चतम न्यायालय की ई-समिति के मार्गदर्शन में भारत सरकार के न्याय विभाग द्वारा किया जाता है।

INS महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया है। यह नीलगिरी-श्रेणी (प्रोजेक्ट 17A) का छठा और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDSL) द्वारा निर्मित चौथा पोत है। 

  • प्रोजेक्ट 17A के अन्य पोत हैं: दूनागिरि, तारागिरि, उदयगिरि, हिमगिरि, नीलगिरि।

प्रोजेक्ट 17A के बारे में

  • प्रोजेक्ट 17A के तहत आधुनिक फ्रिगेट्स (युद्धपोत) बनाए जा रहे हैं। ये बहुउद्देशीय और कई मिशनों वाले युद्धपोत हैं। 
  • इन्हें वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो (WDB) द्वारा डिजाइन किया गया है और वॉरशिप ओवरसीइंग टीम (मुंबई) द्वारा इसकी निगरानी की गई है।
  • P17A जहाजों को P17 (शिवालिक-श्रेणी) की तुलना में उन्नत हथियारों और सेंसर सूट से सुसज्जित किया गया है। 
  • ये तीन तरह के युद्ध में सक्षम हैं: सतह पर हमला, हवा में हमला, पनडुब्बी के खिलाफ।
  • ये पोत कंबाइंड डीजल या गैस (CODOG) प्रणोदन संयंत्रों से सुसज्जित हैं। इनमें एक डीजल इंजन और एक गैस टर्बाइन, शामिल होते हैं।

कर्नाटक ने गिग वर्कर्स  के लिए शिकायत निवारण तंत्र शुरू किया है। वहीं तेलंगाना, गिग वर्कर्स से संबंधित कानून बनाने वाला पांचवां राज्य बन गया है। 

  • इससे पहले कर्नाटक, राजस्थान, बिहार और झारखंड ऐसे कानून बना चुके हैं।

गिग वर्कर्स के बारे में

  • परिभाषा: सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अनुसार, गिग वर्कर वह व्यक्ति होता है जो पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध के दायरे के बाहर कार्य करता है।
  • प्रकार: प्लेटफ़ॉर्म-आधारित और गैर-प्लेटफ़ॉर्म-आधारित वर्कर्स। 
    • प्लेटफ़ॉर्म आधारित वर्कर्स: ये वे कर्मकार होते हैं जो ऑनलाइन ऐप या डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से कार्य करते हैं। उदाहरण के लिए: ओला, जोमैटो, अर्बन कंपनी आदि से जुड़े वर्कर्स।
  • नॉन-प्लेटफ़ॉर्म गिग वर्कर्स: ये आमतौर पर ऐसे कर्मकार होते हैं जो पारंपरिक क्षेत्रकों में करते करते हैं, जैसे दिहाड़ी मजदूर या स्वयं-नियोजित लोग। ये पार्ट-टाइम या फुल-टाइम, दोनों तरह से कार्य कर सकते हैं।
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एल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO)

यह प्रशांत महासागर में होने वाली एक मौसमी घटना है जिसमें समुद्री सतह के तापमान और वायुमंडलीय दबाव में उतार-चढ़ाव शामिल होता है। ENSO के दो मुख्य चरण हैं: एल नीनो (गर्म चरण) और ला नीना (ठंडा चरण)।

एल नीनो

एल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) का उष्मीय चरण है। इसमें मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है, जो प्रायः भारतीय मानसून को कमजोर कर देता है।

सुपर एल नीनो

एक असाधारण रूप से गंभीर एल नीनो घटना जिसमें मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री जल सतह का तापमान लगातार सामान्य से 2°C से अधिक बढ़ जाता है। इसके कारण तीव्र लू, सूखा, बाढ़ और अन्य चरम मौसमी घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।

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