उच्चतम न्यायालय ने कहा कि निर्वाचन आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया 'निर्वाचित प्रतिनिधियों की निरंकुशता' है | Current Affairs | Vision IAS

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भारत निर्वाचन आयोग (ECI) में CEC और ECs की वर्तमान नियुक्ति प्रक्रिया

  • संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 324(2) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (ECs) की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जो संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून के अधीन होगी।
  • सांविधिक प्रावधान: मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 (जिसने 1991 के अधिनियम का स्थान लिया) उच्चतम न्यायालय के 2023 के अनूप बरनवाल वाद में दिए निर्णय के प्रत्युत्तर में लागू किया गया। 
    • इस निर्णय में आदेश दिया गया था कि जब तक संसद कानून नहीं बनाती, तब तक CEC और ECs की चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल होंगे। 
    • CEC और ECs की वर्तमान चयन प्रक्रिया में शामिल हैं:
      • खोज समिति (Search Committee): कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में यह समिति 5 योग्य उम्मीदवारों का एक पैनल तैयार करती है।
      • चयन समिति (Selection Committee): यह समिति राष्ट्रपति को एक नाम की सिफारिश करती है।
        • चयन समिति में शामिल होते हैं: प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और विपक्ष के नेता (या लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता)।
      • पात्रता : ऐसे व्यक्ति जो भारत सरकार के सचिव के समकक्ष पद पर रहे हों या वर्तमान में कार्यरत हों।

नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित चिंताएं

  • कार्यपालिका का वर्चस्व: चयन समिति में सरकार को 2:1 का बहुमत प्राप्त है (प्रधानमंत्री + कैबिनेट मंत्री बनाम विपक्ष के नेता)।
  • खोज समिति की सिफारिश की उपेक्षा: चयन समिति खोज समिति द्वारा तैयार किए गए पैनल की उपेक्षा कर "किसी भी अन्य व्यक्ति" को चुन सकती है।
  • रिक्तियों के बावजूद नियुक्तियां: चयन समिति में सभी सदस्य नहीं होने पर भी नियुक्तियां करने की अनुमति है, जिससे सत्तारूढ़ दल का प्रभुत्व बढ़ सकता है।
  • अन्य चिंताएं:  
    • नौकरशाही का एकाधिकार: केवल सचिव-स्तर के अधिकारी ही मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त पदों पर नियुक्ति के लिए पात्र हैं; 
    • दर्जे में गिरावट: वेतन और सेवा शर्तों को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के स्तर के बजाय कैबिनेट सचिव के समकक्ष कर दिया गया है।

CEC और ECs की नियुक्ति के लिए चयन समिति के गठन पर सुझाव

  • तारकुंडे समिति (1975), गोस्वामी समिति (1990) और विधि आयोग (255वीं रिपोर्ट, 2015): इन्होंने तीन सदस्यीय कॉलेजियम की सिफारिश की थी, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल हों।
  • संविधान के कार्यकरण की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय आयोग (2002): इसने एक ऐसे पैनल की सिफारिश की थी जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता, राज्यसभा में विपक्ष के नेता, लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के उपसभापति शामिल हों।
  • द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2nd ARC) की रिपोर्ट (2007): इसने एक ऐसे कॉलेजियम की सिफारिश की जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, लोकसभा में विपक्ष के नेता, केंद्रीय विधि और न्याय मंत्री तथा राज्यसभा के उपसभापति शामिल हों।

वैश्विक सर्वोत्तम प्रणालियां

  • यूनाइटेड किंगडम: चुनाव आयुक्तों की भर्ती की निगरानी निर्वाचन आयोग पर गठित 'स्पीकर्स कमेटी' द्वारा की जाती है। इस कमेटी के सदस्यों में सांसद भी शामिल होते हैं।
    • इसके बाद अनुशंसित उम्मीदवारों को 'हाउस ऑफ कॉमन्स' द्वारा अनुमोदित किया जाता है और इन्हें औपचारिक रूप से ब्रिटिश सम्राट द्वारा नियुक्त किया जाता है।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका: आयोग के सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और सीनेट द्वारा इसकी अभिपुष्टि अनिवार्य है।
    • सदस्यों को अपनी नियुक्ति के समय अन्य संघीय कार्यकारी, विधायी या न्यायिक पदों पर रहने से प्रतिबंधित किया गया है।
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सीनेट (Senate)

संयुक्त राज्य अमेरिका की कांग्रेस का ऊपरी सदन, जो राष्ट्रपति द्वारा की गई नियुक्तियों को मंजूरी देने (पुष्टि करने) की शक्ति रखता है।

हाउस ऑफ कॉमन्स (House of Commons)

यूनाइटेड किंगडम की संसद का निचला सदन, जहाँ विधायी प्रस्तावों पर चर्चा और अनुमोदन होता है, जिसमें चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का अनुमोदन भी शामिल है।

द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2nd ARC)

यह आयोग (2007) भारत में सार्वजनिक प्रशासन को बेहतर बनाने के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक सुधारों के सुझाव देने के लिए गठित किया गया था।

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