उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया कि भारत निर्वाचन आयोग को 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) करने का अधिकार है | Current Affairs | Vision IAS

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उच्चतम न्यायालय ने ADR बनाम भारत निर्वाचन आयोग (2025) मामले में निर्णय देते हुए स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग के पास संविधान के अनुच्छेद 324 तथा 'लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' व इसके नियमों के तहत मतदाता सूचियों का 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (Special Intensive Revision - SIR) करने की शक्ति है।

उच्चतम न्यायालय के निर्णय के मुख्य बिंदु:

  • शीर्ष न्यायालय ने माना कि SIR आनुपातिकता के सिद्धांत (Proportionality) की तीन प्रमुख शर्तों को पूरा करता है:
    • वैध उद्देश्य की पूर्ति: यह मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाकर पूरी चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखता है। 
    • अपनाए गए उपाय अतिशय नहीं हैं: घर-घर जाकर गणना करना, नामित अधिकारियों द्वारा सत्यापन एवं जांच, तथा गलतियों को सुधारने का अवसर देना, अतिशय नहीं है।  
    • सबसे कम प्रतिबंधात्मक विकल्प: समस्या की व्यापकता को देखते हुए पूरे राज्य में SIR कराना एक उचित और आवश्यक कदम है।
  • नागरिकता और मतदाता सूची: न्यायालय ने कहा कि निर्वाचन आयोग यह जांच सकता है कि कोई व्यक्ति नागरिक है या नहीं, लेकिन इसका प्रभाव केवल उद्देश्य तक ही सीमित है।
    • इसका प्रभाव केवल व्यक्ति के मतदाता सूची (निर्वाचक नामावली) में नाम शामिल होने के अधिकार और इस प्रकार चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने के अधिकार पर पड़ता है।
    • हालांकि, इससे व्यक्ति के नागरिकता संबंधी दावों का अंत नहीं होता और न ही यह नागरिकता अधिनियम के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा नागरिकता पर अंतिम निर्णय लेने के अधिकार को समाप्त करता है। 

'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) क्या है?

  • एसआईआर का अर्थ है निर्वाचन आयोग द्वारा अपने संवैधानिक और सांविधिक अधिकारों के तहत मतदाता सूचियों का बड़े पैमाने पर गहन पुनरीक्षण करना।

विधिक और संवैधानिक आधार:

  • अनुच्छेद 324 (1): यह निर्वाचन आयोग को संसद, राज्य विधान मंडलोंराष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचनों के लिए निर्वाचक नामावली तैयार करने और उन सभी निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति देता है।
  • लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950:
    • धारा 21(3): यह निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण का आदेश देने का अधिकार प्रदान करती है।
    • धारा 16: यह स्पष्ट करती है कि जो व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं है, वह मतदाता सूची में शामिल होने के लिए पात्र नहीं है।
  • निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960: यह मतदाता सूची में नाम दर्ज करने, सुधारने और पुनरीक्षण के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं का विवरण देता है।  
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निर्वाचक नामावली (Electoral Roll)

यह एक आधिकारिक सूची है जिसमें किसी निर्वाचन क्षेत्र के उन सभी व्यक्तियों के नाम शामिल होते हैं जो मतदान करने के पात्र हैं। SIR का उद्देश्य इसे अद्यतन और त्रुटि रहित बनाना है।

निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960

ये नियम मतदाता सूची में नाम दर्ज करने, सुधारने और पुनरीक्षण की विस्तृत प्रक्रिया का वर्णन करते हैं, जो SIR के कार्यान्वयन में सहायक होते हैं।

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950

यह अधिनियम चुनावों से संबंधित प्रक्रिया, मतदाता सूचियों की तैयारी और संशोधन, तथा चुनाव अधिकारियों की शक्तियों से संबंधित है। धारा 21(3) SIR का आधार है।

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