केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने शी-मार्ट्स/SHE-MARTs (सेल्फ हेल्प इंटरप्रेन्योर मार्ट्स) के लिए एक देशव्यापी रोडमैप प्रारंभ किए।
- शी-मार्ट की घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई थी। इसका उद्देश्य महिला उद्यमियों को सशक्त बनाना है। इसके तहत स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के क्लस्टर स्तर के संघों के भीतर सामुदायिक स्वामित्व वाले खुदरा स्टोर स्थापित किए जाएंगे।
- यह पहल महिलाओं के सशक्तीकरण में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाती है।
महिला सशक्तीकरण में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की भूमिका
- वित्तीय समावेशन में: ये समूह ग्रामीण महिलाओं में बचत, संस्थागत ऋण (बैंक लोन) प्राप्ति, बीमा और डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देते हैं।
- उदाहरण के लिए: 'बैंक सखी कार्यक्रम' स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को बैंक-मित्र (बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट) के रूप में प्रशिक्षित करता है।
- उद्यमिता विकास में: SHGs महिलाओं द्वारा संचालित उद्यमों को कौशल विकास, बाजार से संपर्क और नेटवर्किंग के माध्यम से सहायता प्रदान करते हैं।
- उदाहरण के लिए: महिला आर्थिक विकास महामंडल महिलाओं को उद्यमशीलता विकास से संबंधित कौशल प्रदान करता है।
- राजनीतिक सशक्तीकरण में: SHGs महिलाओं में नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की शक्ति और राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाते हैं।
- उदाहरण के लिए: स्व-नियोजित महिला संघ (SEWA) अनौपचारिक क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में कार्यरत महिला कर्मकारों का प्रतिनिधित्व करता है।
- गरीबी उन्मूलन और ग्रामीण विकास में: SHGs आजीविका सुरक्षा बढ़ाते हैं, साहूकारों पर निर्भरता कम करते हैं और समावेशी ग्रामीण विकास को बढ़ावा देते हैं।
- उदाहरण के लिए: कुडुम्बश्री मॉडल महिलाओं के नेतृत्व में गरीबी उन्मूलन और बेहतर स्थानीय शासन का सफल उदाहरण है।
- सामाजिक सुधार: SHGs सामूहिक जागरूकता प्रसारित करके और कार्रवाई के माध्यम से बाल विवाह, दहेज प्रथा, शराबखोरी और लैंगिक भेदभाव जैसी सामाजिक बुराइयों से निपटने में मदद करते हैं।
महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के लिए शुरू की गई प्रमुख सरकारी पहलें
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