पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) अरविंद सुब्रमण्यन और देवेश कपूर द्वारा लिखित पुस्तक 'ए सिक्स्थ ऑफ ह्यूमैनिटी: इंडिपेंडेंट इंडियाज डेवलपमेंट ओडिसी' भारत में संघवाद को लेकर बढ़ती चिंताओं को रेखांकित करती है। साथ ही, ‘आम सहमति के निर्माण’ को इन चिंताओं के समाधान के रूप में प्रस्तुत करती है।
भारत में संघवाद के समक्ष मुख्य चुनौतियां
- क्षेत्रीय विकास में असमानता: दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों ने उत्तरी राज्यों की तुलना में आर्थिक रूप से अधिक तेजी से विकास किया है। इससे क्षेत्रीय असमानताएं बढ़ी हैं।
- उदाहरण के लिए: विकसित राज्यों को लगता है कि बेहतर आर्थिक प्रदर्शन करने के लिए उन्हें दंडित किया जा रहा है, क्योंकि राज्यों के आर्थिक योगदान और वित्त आयोग से मिलने वाले धन (अंतरण) के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है।
- टकरावपूर्ण संघवाद: केंद्र सरकार द्वारा एकपक्षीय निर्णय लेने की प्रवृत्ति बढ़ने से परामर्श आधारित और सहकारी संघवाद कमजोर हुआ है। इससे केंद्र और राज्यों के बीच विश्वास में कमी आई है।
- उदाहरण के लिए: वर्ष 2020 में केंद्र सरकार द्वारा कृषि कानून बनाना, जबकि कृषि भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार राज्य सूची का विषय है।
- लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर होना: जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों को नुकसान से बचाने के लिए लोकसभा में प्रतिनिधित्व को 1971 की जनगणना के आधार पर स्थिर रखा गया है। इससे मूल संविधान में निर्धारित लोकतांत्रिक सुधार प्रभावित हो रहे हैं।
- केंद्रीकरण के बढ़ते मामले: अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल द्वारा विधेयकों की स्वीकृति देने से संबद्ध शक्तियों का अनुचित उपयोग किया जा रहा है, विशेषकर उन राज्यों में जहां केंद्र से अलग दल की सरकार सत्ता में होती है।
संघवाद को सुदृढ़ करने हेतु प्रमुख पहलें
- अंतरराज्यीय परिषद: इसका गठन अनुच्छेद 263 के तहत किया जाता है। इसका उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को बढ़ावा देना है।
- GST परिषद: इसका गठन संविधान के अनुच्छेद 279A के तहत किया गया है। इसमें केंद्र और राज्यों, दोनों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य जीएसटी नीतियों को तय करना है।
- अन्य पहलें:
- केंद्र सरकार के करों को राज्यों के बीच क्षैतिज हस्तांतरण (horizontal Tax devolution) के लिए 16वें वित्त आयोग ने एक सूत्र तैयार किया है। इसमें 10% क्षैतिज हस्तांतरण का आधार GDP में राज्यों का योगदान है।
- 73वें और 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से स्थानीय निकायों को सशक्त बनाकर शासन के तीसरे स्तर की व्यवस्था स्थापित की गई है।
संघवाद को बढ़ावा देने के उपाय
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