भारत के महारजिस्ट्रार का कार्यालय (ORGI) द्वारा जारी यह रिपोर्ट विश्व स्तर पर सबसे बड़े जनांकिकीय सर्वेक्षणों में से एक है। यह रिपोर्ट भारत के महत्वपूर्ण आंकड़ों का वार्षिक अनुमान प्रदान करती है।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर
- प्रजनन दर के रुझान:
- प्रतिस्थापन स्तर से कम प्रजनन: कुल प्रजनन दर (TFF) 1.9 पर स्थिर रही, जो लगातार पांचवें वर्ष प्रतिस्थापन स्तर से नीचे बनी हुई है।
- “प्रतिस्थापन स्तर” प्रजनन वह दर है जिस पर पीढ़ी दर पीढ़ी जनसंख्या का आकार स्थिर बना रहता है। इसे सामान्य रूप से प्रति महिला 2.1 बच्चों का जन्म माना जाता है।
- मृत्यु दर के रुझान:
- अशोधित (क्रूड) मृत्यु दर (CDR): 2024 में CDR 6.4 रही; कुल मृत्यु दर कोविड महामारी-पूर्व के स्तर से अभी भी अधिक बनी हुई है।
- शिशु मृत्यु दर (IMR): घटकर 24 हो गई, जो पिछले पांच वर्षों में 6 अंकों की कमी दर्शाती है। (केरल में शिशु मृत्यु दर 8 है जो देश में सबसे कम है)।
- शिशु मृत्यु दर वह संभावना है कि किसी विशेष वर्ष या अवधि में जन्मा बच्चा एक वर्ष की आयु पूरी करने से पहले मृत्यु को प्राप्त हो जाए। (इसे प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर दर के रूप में व्यक्त किया जाता है)।
- पांच वर्ष से कम आयु में मृत्यु दर (U5MR): यह 28 है।
- पाँच वर्ष से कम आयु में मृत्यु दर वह संभावना है कि किसी विशेष वर्ष या अवधि में जन्मा बच्चा पाँच वर्ष की आयु पूरी करने से पहले मृत्यु को प्राप्त हो जाए। (इसे प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर दर के रूप में व्यक्त किया जाता है)।
- मृत्यु के कारणों से जुड़ी चिंताएं:
- मोटर वाहन दुर्घटनाओं से होने वाली मौतें का अनुपात बढ़कर 3.2% हो गया और आत्महत्या से होने वाली मौतों का अनुपात बढ़कर 2.8% हो गया।
- जनांकिकीय और सामाजिक संकेतक:
- जन्म के समय लिंगानुपात (SRB): इसमें आंशिक सुधार हुआ है, और वर्ष 2022-2024 के दौरान यह बढ़कर प्रति 1,000 पुरुषों पर 918 महिलाएं हो गया।