कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) से छह बाघों की दुखद मृत्यु के बाद वन अधिकारी कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के सौ से अधिक बाघों की सख्त निगरानी कर रहे हैं।
- कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) एक घातक, वायुजनित पैरामिक्सोवायरस है। यह वायरस श्वसन तंत्र और तंत्रिका तंत्र को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है।
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के बारे में
- यह मध्य प्रदेश के मंडला और बालाघाट जिलों में स्थित है।
- सतपुड़ा की मैकल पर्वतमाला के भीतर इसका क्षेत्रफल 1,945 वर्ग किमी है।
- 1955 में इसे राष्ट्रीय उद्यान और 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत टाइगर रिजर्व घोषित किया गया।
- यहाँ दो देशज जनजातियां, गोंड और बैगा, निवास करती हैं।
- जीव-जंतु : बंगाल टाइगर, बारहसिंगा (स्वैम्प डियर) आदि।
- वनस्पति: यहां की उच्च भूमि में उष्णकटिबंधीय आर्द्र शुष्क पर्णपाती प्रकार के वन पाए जाते हैं, जबकि, ढलानों पर वनस्पतियां इससे भिन्न हैं।
- कहा जाता है कि रुडयार्ड किपलिंग को अपनी क्लासिक पुस्तक "द जंगल बुक" की प्रेरणा यहीं से मिली थी।
स्वदेशी रूप से विकसित वायु अस्त्र-1 के अधिक ऊंचाई वाले परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए गए।
वायु अस्त्र-1 के बारे में
- यह एक लॉयटरिंग म्यूनिशन है, जिसे कामिकेज़/सुसाइड ड्रोन भी कहा जाता है। यह हवा में मंडराने, निगरानी करने और सटीक हमले करने में सक्षम है।
- सुसाइड ड्रोन एक मानव रहित हवाई हथियार है, जो लक्ष्य क्षेत्र के ऊपर कुछ समय तक मंडरा सकता है और फिर अपने साथ लगे विस्फोटक के साथ लक्ष्य से टकराकर उसे नष्ट कर देता है।
- मारक क्षमता और पेलोड: इससे 10 किलोग्राम वजनी वॉरहेड के साथ 100 किलोमीटर तक की रेंज का परीक्षण किया गया।
- विशेषताएं: सटीकता और रात्रि में सक्रिय रहने की क्षमता, अधिक ऊंचाई पर मंडराने की क्षमता, इंटेलिजेंट कॉम्बैट जैसी विशेषताएं, आदि।
एक अध्ययन में पाया गया है कि स्पर्म व्हेल द्वारा संचार के लिए उपयोग की जाने वाली क्लिक जैसी ध्वनियों (जिन्हें “कोडा” कहा जाता है) में जटिल ध्वनि पैटर्न होते हैं, जो मानव भाषा की स्वर ध्वनियों से मिलते-जुलते हैं।
स्पर्म व्हेल के बारे में
- ये भूमध्य रेखा से लेकर आर्कटिक और अंटार्कटिक में बर्फ के किनारों तक, सभी गहरे महासागरों में पाई जाती हैं।
- विशेषताएं
- यह दांतों वाली सबसे बड़ी व्हेल है और किसी भी ज्ञात जीव की तुलना में इसके मस्तिष्क का आकार सबसे बड़ा होता है।
- इसके विशाल सिर में स्पर्मासेटी नामक मोम जैसा द्रव होता है, जो गहरे समुद्र में गोता लगाने के दौरान उत्प्लावकता (बॉयेंसी) बनाए रखने में मदद करता है।
- यह एम्बरग्रीस का उत्पादन करती है, जो इत्र बनाने में उपयोग होने वाला एक बहुमूल्य पदार्थ है।
- यह एकमात्र जीवित सीटेशियन है, जिसमें केवल बाईं ओर स्थित एक ही ब्लोहोल (श्वसन छिद्र) होता है।
- सीटेशियन स्तनपायियों का एक समूह है जिसमें व्हेल, डॉल्फिन और पॉरपॉइज शामिल हैं।
- संरक्षण स्थिति
- IUCN लाल सूची में स्थिति: वल्नरेबल।
कोरियाई युद्ध की 75वीं वर्षगांठ की पृष्ठभूमि में सियोल (दक्षिण कोरिया) के इमजिंगक पार्क में भारतीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन किया गया।
- यह स्मारक 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस और भारत की कस्टोडियन फोर्स के बलिदान और सेवा को सम्मानित करता है।
कोरियाई युद्ध के बारे में
- द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, कोरिया को 38वीं समानांतर रेखा के आधार पर विभाजित किया गया था:
- उत्तर कोरिया (सोवियत संघ और चीन द्वारा समर्थित)
- दक्षिण कोरिया (अमेरिका द्वारा समर्थित)
- उत्तर कोरिया ने 1950 में दक्षिण कोरिया पर आक्रमण किया, जिससे शीत युद्ध का एक छद्म युद्ध भड़क गया।
- 1953 के युद्धविराम के बाद कोरियाई प्रायद्वीप को 38वीं समानांतर रेखा द्वारा विभाजित कर दिया गया, जो सामान्यतः विसैन्यीकृत क्षेत्र है।
निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) तेजी से बढ़ता वैश्विक स्वास्थ्य विकार बनता जा रहा है। अनुमान है कि वर्ष 2050 तक विश्व की लगभग आधी आबादी निकट दृष्टि दोष से पीड़ित हो सकती है।

मायोपिया के बारे में
- परिभाषा: मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) एक सामान्य अपवर्तक नेत्र विकार है जिसमें पास की वस्तुएं तो स्पष्ट दिखाई देती हैं, लेकिन दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई देती हैं।
- हाइपरोपिया (दूर दृष्टि दोष) में, पास की वस्तुएं धुंधली दिखाई देती हैं क्योंकि इसमें वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना पर बनने के बजाय उसके पीछे बनता है।
- यह तब होता है जब नेत्रगोलक आगे से पीछे की ओर बहुत लंबा हो जाता है या कॉर्निया बहुत अधिक घुमावदार होती है।
- इस असामान्य आकार के कारण आने वाले प्रकाश की किरणें सीधे रेटिना पर केंद्रित होने के बजाय उसके सामने केंद्रित होती हैं अर्थात वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना के पहले बन जाता है, जिसके परिणामस्वरूप दूर की दृष्टि धुंधली हो जाती है।
आयुष अनुदान पोर्टल को आयुष ग्रिड पहल के तहत प्रारंभ किया गया है। इसका उद्देश्य अनुदान प्रस्तावों के प्रस्तुतिकरण, प्रक्रिया, स्वीकृति और निगरानी को डिजिटल बनाना है।
आयुष ग्रिड पहल के बारे में
- यह केंद्रीय आयुष मंत्रालय द्वारा 2018 में शुरू की गई एक डिजिटल पहल है। इसका उद्देश्य आयुष क्षेत्रक के लिए एकीकृत, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित डिजिटल प्रणाली का निर्माण करना है।
- इस पहल के तहत, आयुष अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली (A-HMIS) और ई-औषधि (e-Aushadhi) सहित कई डिजिटल प्लेटफॉर्म्स विकसित किए गए हैं।
- यह आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) का अनुपालन करता है और इसमें शिक्षा, अनुसंधान, औषधीय पादप प्रशासन, औषधि विनियमन आदि क्षेत्रक शामिल हैं।
Article Sources
1 sourceसंयुक्त राष्ट्र महासभा ने अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के एक सलाहकार परामर्श का समर्थन किया है। इसमें कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन से निपटना, राष्ट्रों पर अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत विधिक दायित्व हैं।
संकल्प के प्रमुख विवरण
- इसे वानुअतु द्वारा प्रस्तुत किया गया। यह प्रशांत महासागर में स्थित द्वीपीय राष्ट्र है और समुद्र के बढ़ते जलस्तर के कारण अस्तित्व के संकट का सामना कर रहा है।
- वोटों की गिनती: 141 राष्ट्र इस संकल्प के पक्ष में, 8 विरोध में थे तथा 28 अनुपस्थित (भारत सहित) रहे।
- बाध्यताएँ: सभी सदस्य देशों को पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए, सीमा से अधिक उत्सर्जन पर अंकुश लगाना चाहिए तथा पेरिस जलवायु समझौते की प्रतिबद्धताओं का अनुपालन करना चाहिए।
- दायित्व: हालांकि, यह संकल्प कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, फिर भी जलवायु परिवर्तन पर निष्क्रियता सरकारों को अंतरराष्ट्रीय मुकदमों, दायित्व से संबंधित बड़े दावों और पूर्ण क्षतिपूर्ति की मांगों के जोखिम में डाल सकती है।
विश्व बैंक की इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपनी कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना की शुरुआत के साथ एक प्रमुख वैश्विक कार्बन बाजार के रूप में उभरा है।
“कार्बन मूल्य निर्धारण की स्थिति और रुझान 2026” के प्रमुख बिंदु
- वैश्विक कवरेज: कार्बन मूल्य निर्धारण नीतियां वैश्विक ग्रीनहाउस गैस (GHG) के 29% को कवर करती हैं और 2030 तक वैश्विक उत्सर्जन के लगभग एक-तिहाई तक पहुंच सकती हैं।
- राजस्व सृजन: कार्बन टैक्स और उत्सर्जन व्यापार प्रणाली (ETS) ने 2025 में 107 बिलियन डॉलर से अधिक का राजस्व सृजित किए।
भारत की कार्बन बाज़ार प्रणाली
- कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (CCTS): इसे वर्ष 2026 में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता आधारित व्यापार प्रणाली के रूप में शुरू किया गया, विशेषकर उन क्षेत्रकों के लिए जहाँ उत्सर्जन कम करना कठिन (हार्ड टू एबेट सेक्टर्स) है।
- जो उद्योग निर्धारित लक्ष्यों से बेहतर प्रदर्शन करते हैं, उन्हें व्यापार योग्य कार्बन क्रेडिट प्रमाणपत्र प्रदान किए जाते हैं।
- वैश्विक स्थिति: भारत की उत्सर्जन व्यापार प्रणाली (ETS) चीन, यूरोपीय संघ और दक्षिण कोरिया के बाद विश्व की सबसे बड़ी उत्सर्जन व्यापार प्रणालियों में से एक है।