केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय ने खेलों में प्रदर्शन बढ़ाने वाले प्रतिबंधित पदार्थों की बढ़ती तस्करी और इनके वितरण के तरीकों को रोकने के लिए अधिनियम में संशोधन प्रस्तावित किए हैं।

- वर्ष 2022 का यह अधिनियम राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA) के गठन के लिए बनाया गया था, ताकि विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (WADA) द्वारा विकसित मानकों के अनुसार एंटी-डोपिंग गतिविधियों को नियंत्रित किया जा सके।
- प्रस्तावित संशोधन ‘यूनेस्को का खेल में डोपिंग-रोधी अभिसमय’ के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं के अनुरूप हैं।
प्रस्तावित प्रमुख संशोधन
- आपूर्ति तंत्र और खेल-कर्मियों को लक्षित करना: संशोधनों का उद्देश्य प्रतिबंधित पदार्थों की संगठित तस्करी के पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई करना है। इसके तहत डॉक्टर, कोच और अन्य सहयोगी स्टाफ द्वारा खिलाड़ियों को प्रतिबंधित पदार्थ देना एक दंडात्मक अपराध माना जाएगा।
- चिकित्सीय और प्रचार संबंधी नियम: इसमें उन खिलाड़ियों के लिए सुरक्षा हेतु प्रावधान किए गए हैं जिनके पास वैध चिकित्सीय उपयोग हेतु छूट (TUEs) का प्रमाण है। साथ ही, आपातकालीन परिस्थितियों में कार्य करने वाले वास्तविक चिकित्सा विशेषज्ञों को भी संरक्षण प्रदान किया गया है।
डोपिंग के बारे में
- डोपिंग का अर्थ है खिलाड़ियों द्वारा खेल में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए विश्व डोपिंग-रोधी एजेंसी की एंटी-डोपिंग संहिता के तहत प्रतिबंधित पदार्थों या पद्धतियों का उपयोग करना।
- उदाहरण के लिए: एनाबॉलिक स्टेरॉयड, ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन, स्टिमुलैंट्स और डाइयूरेटिक्स का उपयोग।
- WADA 2024 रिपोर्ट के अनुसार भारत ने लगातार तीन वर्षों तक सर्वाधिक 'एंटी-डोपिंग नियम उल्लंघन (ADRVs)' दर्ज किए है।
डोपिंग-रोधी प्रमुख उपाय
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