हाल के समय में एशिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका तक विभिन्न महाद्वीपों में युवाओं के नेतृत्व वाले विरोध-प्रदर्शनों की लहर देखने को मिली है। बांग्लादेश, नेपाल, केन्या से लेकर भारत तक फैले ये आंदोलन स्थापित राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के प्रति बढ़ते असंतोष को दर्शाते हैं।
युवाओं के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों की सामान्य विशेषताएं
- डिजिटल माध्यम से सक्रियता: निगरानी से बचने और बड़े पैमाने पर जन-आंदोलन के समन्वय के लिए एन्क्रिप्टेड ऐप्स (जैसे कि टेलीग्राम, सिग्नल), VPN तथा ऑनलाइन अनामिता (Anonymity) के साधनों का उपयोग किया जा रहा है।
- उदाहरण के लिए: वर्ष 2025 में नेपाल में जेन-ज़ी युवाओं ने अंतरिम प्रधानमंत्री के चयन के लिए मतदान के समन्वय हेतु डिस्कॉर्ड का उपयोग किया।
- अत्यधिक मुद्दा-आधारित: व्यापक वैचारिक जुड़ाव के बजाय, ये जन-आंदोलन किसी विशिष्ट और तात्कालिक समस्या या संकट से प्रेरित होते हैं।
- उदाहरण के लिए: 2024 में बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में विवादास्पद आरक्षण (कोटा) प्रणाली के विरोध में हुए व्यापक प्रदर्शन।
- सीमा-पार प्रभाव: ऐसे आंदोलन प्रायः एक देश से शुरू होकर अन्य देशों तक फैल जाते हैं।
- उदाहरण के लिए: 2010 के दशक का अरब स्प्रिंग ट्यूनीशिया से शुरू होकर मिस्र, लीबिया, सीरिया तथा यमन तक फैल गया।
- अनौपचारिक एवं नेतृत्व-विहीन संरचना: इन आंदोलनों में प्रायः औपचारिक नेतृत्व का अभाव होता है, जिससे वे अधिक लचीले और समावेशी बनते हैं।
- उदाहरण के लिए: 2019 के हांगकांग प्रदर्शनों में प्रदर्शनकारियों ने चीन सरकार की निगरानी से बचने के लिए "नेतृत्व-विहीन" रणनीति अपनाई।
- अन्य विशेषताएँ:
- सामान्यतः अहिंसक होते हैं।
- अल्पकालिक होने के बावजूद व्यापक और गहरा प्रभाव छोड़ते हैं।
- प्रौद्योगिकी, सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों का व्यापक उपयोग करते हैं।
प्रमुख कारण:
- आर्थिक संकट: उदाहरण के लिए, केन्या में जीवन-यापन के बढ़ते खर्च के बीच 2024 में कर वृद्धि के खिलाफ विरोध।
- सरकारों के प्रति असंतोष: अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय विकास एजेंसी के अनुसार, 1990-2020 के बीच शासन परिवर्तन चाहने वाले 80% अहिंसक आंदोलनों में युवाओं की अहम भागीदारी रही है।
- प्रशासनिक विफलता: उदाहरण के लिए, परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर भारत में 2026 में कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध-प्रदर्शन।
आगे की राह
नीति-निर्माण में युवाओं की भागीदारी को संस्थागत बनाकर, संरचनात्मक आर्थिक सुधारों को लागू करके, बेरोजगारी के संकट को हल करके और लोकतांत्रिक जवाबदेही को सुदृढ़ करके युवाओं की समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।