केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है, ताकि भारत की वर्तमान औद्योगिक संरचना, उत्पादन पैटर्न और आर्थिक क्रियाकलापों को अधिक सटीक रूप से दर्शाया जा सके।
- यह अखिल भारतीय IIP के आधार वर्ष में 10वां संशोधन है। पहला औद्योगिक उत्पादन सूचकांक 1937 के आधार वर्ष के साथ तैयार किया गया था।
IIP की नई श्रृंखला में प्रमुख परिवर्तन

- आधार वर्ष संशोधन: IIP का आधार वर्ष 2022-23 कर दिया गया है। यह संशोधन IIP के आधार वर्ष संशोधन हेतु गठित तकनीकी सलाहकार समिति (TAC-IIP) के मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण में किया गया है।
- कवरेज (दायरा): वर्तमान क्षेत्रकों को बनाए रखते हुए इसमें गैस आपूर्ति, जलापूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन क्रियाकलापों को जोड़ा गया है।
- खनन क्षेत्रक का समावेशी वर्गीकरण: खनन क्षेत्रक का अधिक व्यापक और सटीक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए लघु खनिजों (Minor Minerals) तथा दुर्लभ मृदा खनिजों (रेयर अर्थ मिनरल्स) को भी वर्गीकरण में शामिल किया गया है।
- वस्तुओं का संशोधित बास्केट: IIP बास्केट में मदों की संख्या 839 से बढ़ाकर 1,042 (463 मद समूह) कर दी गई है।
- नए उत्पादों का समावेश: मैग्नेटिक स्ट्राइप वाले कार्ड, सीसीटीवी कैमरा, बिना बुनाई वाले वस्त्र, विमान और अंतरिक्ष यान के पुर्जे, स्टेंट, टीके (पशु चिकित्सा के अलावा)।
- हटाए गए मद: केरोसिन, फ्लोरोसेंट ट्यूब और CFL, साइकिल/तिपहिया/रिक्शा टायर के ट्यूब, LMV टायर के ट्यूब, प्रिंटिंग मशीनरी, सिलाई मशीनें।
- विस्तृत वर्गीकरण: नए IIP में औद्योगिक क्रियाकलापों का अधिक विस्तृत और सूक्ष्म वर्गीकरण किया गया है।
- खनन क्षेत्रक ईंधन खनिज, धात्विक खनिज (दुर्लभ मृदा खनिज सहित) और अधात्विक खनिज (लघु खनिज सहित) श्रेणियों में वर्गीकृत है।
- बिजली सूचकांक में अब नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय स्रोतों से उत्पादित बिजली को अलग-अलग ट्रैक किया जाएगा।
- आधार वर्ष बदलने की आवश्यकता क्यों थी?
- उभरते हुए क्षेत्रकों को सूचकांक में शामिल करने के लिए,
- उत्पादन के बदलते स्वरूप को बेहतर पद्धति से दर्शाने के लिए,
- उपभोग की बदलती प्रवृत्तियों को प्रतिबिंबित करने के लिए,
- IIP की कार्यप्रणाली को संयुक्त राष्ट्र की सर्वोत्तम अंतरराष्ट्रीय प्रणालियों के अनुरूप बनाने के लिए,
- नए उत्पादों और उद्योगों को सूचकांक में शामिल कर औद्योगिक क्षेत्र की वर्तमान स्थिति का अधिक सटीक आकलन करने के लिए।