केंद्र सरकार ने अगले पांच वर्षों में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) को क्रमिक रूप से समाप्त करने और उसकी जगह एक व्यापक उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है।
थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के बारे में:
- WPI घरेलू बाजार में किसी निश्चित अवधि के दौरान, वस्तुओं के एक निर्धारित समूह की थोक स्तर पर पहली बिक्री के समय होने वाले औसत मूल्य में परिवर्तन को मापने वाला सूचकांक है।
- जारीकर्ता: आर्थिक सलाहकार कार्यालय द्वारा जो केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के DPIIT के तहत कार्य करता है।
- संशोधित श्रृंखला में मुख्य बदलाव:
- आधार वर्ष में संशोधन: 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया गया।
- व्यापक कवरेज: मदों की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 की गई।
- ऊर्जा बास्केट में परिवर्तन: बिजली श्रेणी में सौर, पवन और परमाणु ऊर्जा को शामिल किया गया है, जबकि कच्चे तेल (क्रूड पेट्रोलियम) और प्राकृतिक गैस को ईंधन एवं ऊर्जा श्रेणी में स्थानांतरित किया गया है।
- संशोधनों का महत्व: यह मुद्रास्फीति के रुझानों का अधिक वास्तविक आकलन सुनिश्चित करेगा।
उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) के बारे में:
- यह घरेलू बाजार या निर्यात के लिए बेची गई वस्तुओं एवं सेवाओं के बदले उत्पादकों को प्राप्त होने वाली कीमतों में समय के साथ होने वाले औसत परिवर्तन को मापता है।
- PPI के प्रमुख घटक: आउटपुट PPI, इनपुट PPI और सर्विस PPI (तिमाही आधार पर संकलित)।
WPI के स्थान पर PPI प्रणाली क्यों लागू की जा रही है?
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