भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र (WMCC) की 35वीं बैठक में भारत-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की गई।
भारत-चीन सीमा विवाद के बारे में

- विवाद का स्रोत: वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के बारे में दोनों देशों में अलग-अलग धारणाएं हैं। भारत, चीन के साथ दूसरी सबसे लंबी भूमि-सीमा (3488 किमी) साझा करता है। भारत बांग्लादेश (4096.7 किमी) के साथ सबसे लंबी भूमि सीमा साझा करता है।
- 1865 में भारतीय सर्वेक्षण विभाग के सिविल सेवक डब्ल्यू.एच. जॉनसन ने 'जॉनसन रेखा' का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव में अक्साई चिन को जम्मू और कश्मीर का भाग बताया गया था, जिसे चीनी राजवंश ने अस्वीकार कर दिया।
- 1914 में ब्रिटिश भारत, तिब्बत और चीन के बीच शिमला बैठक आयोजित हुई। इसमें भूटान से बर्मा (अब म्यांमार) तक मैकमोहन रेखा का प्रस्ताव रखा गया, जिसका चीन ने विरोध किया।
- संघर्ष: 1962 का भारत-चीन युद्ध, जब चीन ने भारत पर आक्रमण किया था।
- विवादित क्षेत्र (तीन क्षेत्रों में):
- पश्चिमी क्षेत्र (लद्दाख-अक्साई चिन): वर्तमान में अक्साई चिन पर चीन का नियंत्रण है, जिसे भारत लद्दाख का हिस्सा मानता है।
- मध्य क्षेत्र: कौरिक लाहौल और स्पीति घाटी (हिमाचल प्रदेश), बाराहोती और नेलांग घाटी (उत्तराखंड)।
- पूर्वी क्षेत्र (मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश): चीन अरुणाचल प्रदेश, विशेषकर तवांग क्षेत्र को अपना हिस्सा बताते हुए इसे "दक्षिण तिब्बत" (ज़ैंग नान) कहता है।
- सिक्किम क्षेत्र: नाथू ला दर्रा, नाकु ला क्षेत्र, चो ला, माउंट गिपमोची, बतांग ला, और डोकलाम पठार तथा निकटवर्ती जामफेरी रिज।
- डोकलाम पठार विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत, चीन और भूटान के त्रि-जंक्शन (Tri-Junction) के निकट स्थित है।
- सिक्किम क्षेत्र: नाथू ला दर्रा, नाकु ला क्षेत्र, चो ला, माउंट गिपमोची, बतांग ला, और डोकलाम पठार तथा निकटवर्ती जामफेरी रिज।
विवाद समाधान के लिए भारत को निम्नलिखित सिद्धांतों का पालन करना चाहिए:
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