नीति आयोग ने “विकसित भारत@2047 में देखभाल (केयर) व्यवस्था की पुनर्कल्पना: देखभालकर्ताओं को सशक्त बनाने की रणनीतियां” शीर्षक से रिपोर्ट जारी की | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • बढ़ती बुजुर्ग आबादी और विकलांगता में वृद्धि के कारण भारत का स्वास्थ्य सेवा बाजार 2030 तक 72.31 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगा।
  • दोहरी देखभाल प्रणाली मौजूद है: अनौपचारिक (परिवार) और औपचारिक (पेशेवर), जिसमें पारिवारिक संरचनाओं में बदलाव और अनौपचारिक देखभाल में कमी के कारण बढ़ती मांग है।
  • प्रमुख पहलों में एनपीएचसीई, शतायु, जीवन और कर्नाटक और केरल में राज्य स्तरीय कार्यक्रम शामिल हैं; वैश्विक मॉडल सामाजिक बीमा से लेकर सामाजिक देखभाल तक भिन्न-भिन्न हैं।

In Summary

नीति आयोग की यह रिपोर्ट भारत की 'देखभाल (केयरगिविंग) प्रणाली’ की वर्तमान स्थिति प्रस्तुत करती है तथा संगठित, पेशेवर, सुलभ और भविष्य को ध्यान में रखकर तैयार 'देखभाल प्रणाली' विकसित करने के लिए एक व्यापक रोडमैप प्रदान करती है।

  • WHO के अनुसार 'देखभाल यानी केयरगिविंग’ वह प्रक्रिया है, जिसमें उम्र, बीमारी या दिव्यांगता के कारण नित्यक्रिया स्वयं करने में असमर्थ व्यक्तियों को शारीरिक, भावनात्मक और सामाजिक सहायता प्रदान की जाती है।
  • भारत में ‘देखभाल करने की प्रणाली’:
    • भारत का देखभाल सेवाएँ (केयर सर्विसेज) बाज़ार वर्ष 2023 में 29.62 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2030 तक 72.31 अरब अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है। इस अवधि में इसकी वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर (CAGR) लगभग 13.76% रहने का अनुमान है।
  • द्वैध देखभाल प्रणाली (Dual Care System): भारत में देखभाल सेवाएँ मुख्यतः दो प्रकार के देखभालकर्ताओं (केयरगिवर्स) द्वारा प्रदान की जाती हैं:
  • अनौपचारिक देखभालकर्ता: जैसे परिवार के सदस्य, मित्र और समुदाय, जो बिना औपचारिक प्रशिक्षण के देखभाल करते हैं।
  • औपचारिक देखभालकर्ता: जैसे प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी, नर्स, केयरगिवर और अन्य पेशेवर, जो विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर देखभाल सेवाएँ प्रदान करते हैं।
  • भारत में देखभाल प्रणाली की आवश्यकता क्यों है?
    • देखभाल सेवाओं की बढ़ती मांग: बढ़ती वृद्ध आबादी और दिव्यांगता के कारण दीर्घकालिक देखभाल तथा पैलिएटिव केयर (प्रशामक देखभाल) की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।
      • वृद्ध आबादी: वर्ष 2022 में भारत में लगभग 14.9 करोड़ (149 मिलियन) लोग 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के थे, जो कुल जनसंख्या का 10.5% है। यह संख्या 2050 तक बढ़कर लगभग 34.7 करोड़ या 20.8% होने का अनुमान है।
    • परिवार की बदलती संरचना: शहरीकरणप्रवासएकल परिवार तथा कार्यबल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के कारण परिवारों द्वारा प्रदान की जाने वाली अनौपचारिक देखभाल में कमी आ रही है। 
    • अन्य कारण: महिलाओं पर अवैतनिक (अनपेड) देखभाल कार्य का असमान रूप से अधिक बोझ है, प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं की कमी है, विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय का अभाव है जिससे देखभाल सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में कठिनाई आती है।

भारत में प्रमुख पहलें

  • संस्थागत देखभाल: सरकार ने वृद्धजनों की स्वास्थ्य एवं देखभाल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय वृद्धजन स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम (NPHCE) जैसी पहलें शुरू की हैं।
  • शतायु SHATAYU (सीनियर होलिस्टिक केयर असिस्टेंस एंड ट्रेनिंग फॉर आवर यूटिलिटी) डैशबोर्ड; जीवन/JEEVAN (जॉइंट एल्डर्ली एम्पावरमेंट & वर्चुअल असिस्टेंट नेटवर्क) ऐप
  • कर्नाटक: केयरर्स ग्रुप्स (स्वयं सहायता समूह), अवैतनिक देखभालकर्ताओं को मासिक भत्ता प्रदान करने की व्यवस्था प्रारंभ की है।
  • केरल: कुदुम्बश्री 'के फॉर केयर' परियोजना (देखभाल अर्थव्यवस्था में रोजगार प्रदान करने हेतु)। 

दीर्घकालिक देखभाल (LTC) पर वैश्विक सर्वोत्तम उदाहरण और मॉडल

  • सामाजिक बीमा मॉडल: यह मॉडल जोखिम की सामूहिक साझेदारी पर आधारित है, जिसमें सभी लोग योगदान करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर देखभाल सेवाओं का लाभ प्राप्त करते हैं। जैसे-जर्मनी में। 
  • अवशिष्ट मॉडल: इस मॉडल में सरकार उन व्यक्तियों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जो देखभाल सेवाओं का खर्च स्वयं वहन करने में सक्षम नहीं होते। जैसे-स्पेन में। 
  • स्थानीय आवश्यकता-आधारित मॉडल: इस मॉडल में स्थानीय प्रशासन समुदाय की आवश्यकताओं का आकलन कर उसी के आधार पर देखभाल सेवाएँ उपलब्ध कराता है। जैसे-इटली में। 
  • निजी-बीमा-आधारित मॉडल: जैसे-संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) में। 
  • सामाजिक देखभाल मॉडल: परिवार, समुदाय, सरकार और बाजार देखभाल की जिम्मेदारी साझा करते हैं। जैसे- स्वीडन में। 
  • नवाचार मॉडल: 
    • ऑस्ट्रेलिया: देखभालकर्ताओं के लिए व्यावसायिक प्रमाणन की व्यवस्था।
    • चीन: AI और केयर रोबोट का उपयोग कर देखभाल सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।

 

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Social Care Model

A model where the responsibility for care is shared among the family, community, government, and the market. Sweden follows this integrated approach.

Private Insurance-Based Model

A model for funding care services primarily relying on private insurance policies purchased by individuals. The United States (USA) utilizes this model.

Local Needs-Based Model

A model where local administrations assess community needs and provide care services accordingly. Italy exemplifies this approach.

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