नीति आयोग की यह रिपोर्ट भारत की 'देखभाल (केयरगिविंग) प्रणाली’ की वर्तमान स्थिति प्रस्तुत करती है तथा संगठित, पेशेवर, सुलभ और भविष्य को ध्यान में रखकर तैयार 'देखभाल प्रणाली' विकसित करने के लिए एक व्यापक रोडमैप प्रदान करती है।
- WHO के अनुसार 'देखभाल यानी केयरगिविंग’ वह प्रक्रिया है, जिसमें उम्र, बीमारी या दिव्यांगता के कारण नित्यक्रिया स्वयं करने में असमर्थ व्यक्तियों को शारीरिक, भावनात्मक और सामाजिक सहायता प्रदान की जाती है।
- भारत में ‘देखभाल करने की प्रणाली’:
- भारत का देखभाल सेवाएँ (केयर सर्विसेज) बाज़ार वर्ष 2023 में 29.62 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2030 तक 72.31 अरब अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है। इस अवधि में इसकी वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर (CAGR) लगभग 13.76% रहने का अनुमान है।
- द्वैध देखभाल प्रणाली (Dual Care System): भारत में देखभाल सेवाएँ मुख्यतः दो प्रकार के देखभालकर्ताओं (केयरगिवर्स) द्वारा प्रदान की जाती हैं:
- अनौपचारिक देखभालकर्ता: जैसे परिवार के सदस्य, मित्र और समुदाय, जो बिना औपचारिक प्रशिक्षण के देखभाल करते हैं।
- औपचारिक देखभालकर्ता: जैसे प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी, नर्स, केयरगिवर और अन्य पेशेवर, जो विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर देखभाल सेवाएँ प्रदान करते हैं।
- भारत में देखभाल प्रणाली की आवश्यकता क्यों है?
- देखभाल सेवाओं की बढ़ती मांग: बढ़ती वृद्ध आबादी और दिव्यांगता के कारण दीर्घकालिक देखभाल तथा पैलिएटिव केयर (प्रशामक देखभाल) की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।
- वृद्ध आबादी: वर्ष 2022 में भारत में लगभग 14.9 करोड़ (149 मिलियन) लोग 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के थे, जो कुल जनसंख्या का 10.5% है। यह संख्या 2050 तक बढ़कर लगभग 34.7 करोड़ या 20.8% होने का अनुमान है।
- परिवार की बदलती संरचना: शहरीकरण, प्रवास, एकल परिवार तथा कार्यबल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के कारण परिवारों द्वारा प्रदान की जाने वाली अनौपचारिक देखभाल में कमी आ रही है।
- अन्य कारण: महिलाओं पर अवैतनिक (अनपेड) देखभाल कार्य का असमान रूप से अधिक बोझ है, प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं की कमी है, विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय का अभाव है जिससे देखभाल सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में कठिनाई आती है।
- देखभाल सेवाओं की बढ़ती मांग: बढ़ती वृद्ध आबादी और दिव्यांगता के कारण दीर्घकालिक देखभाल तथा पैलिएटिव केयर (प्रशामक देखभाल) की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।
भारत में प्रमुख पहलें

- संस्थागत देखभाल: सरकार ने वृद्धजनों की स्वास्थ्य एवं देखभाल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय वृद्धजन स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम (NPHCE) जैसी पहलें शुरू की हैं।
- शतायु SHATAYU (सीनियर होलिस्टिक केयर असिस्टेंस एंड ट्रेनिंग फॉर आवर यूटिलिटी) डैशबोर्ड; जीवन/JEEVAN (जॉइंट एल्डर्ली एम्पावरमेंट & वर्चुअल असिस्टेंट नेटवर्क) ऐप।
- कर्नाटक: केयरर्स ग्रुप्स (स्वयं सहायता समूह), अवैतनिक देखभालकर्ताओं को मासिक भत्ता प्रदान करने की व्यवस्था प्रारंभ की है।
- केरल: कुदुम्बश्री 'के फॉर केयर' परियोजना (देखभाल अर्थव्यवस्था में रोजगार प्रदान करने हेतु)।
दीर्घकालिक देखभाल (LTC) पर वैश्विक सर्वोत्तम उदाहरण और मॉडल
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