मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने चलनिधि (तरलता) समायोजन सुविधा (Liquidity Adjustment Facility–LAF) के तहत नीतिगत रेपो दर को 5.25% पर यथावत रखा है तथा तटस्थ रुख बनाए रखा है।
मौद्रिक नीति समिति (MPC) के बारे में
- गठन: भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45ZB के तहत गठित।
- उद्देश्य: मुद्रास्फीति लक्ष्य प्राप्त करने के लिए नीतिगत रेपो दर का निर्धारण करना।
- संरचना: MPC में कुल 6 सदस्य होते हैं: 3 सदस्य भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से और 3 सदस्य केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं।
- MPC में RBI के सदस्य:
- RBI के गवर्नर: पदेन अध्यक्ष
- मौद्रिक नीति के प्रभारी उप-गवर्नर: पदेन सदस्य
- RBI के केंद्रीय निदेशक मंडल द्वारा नामित एक अधिकारी: पदेन सदस्य
- कार्यकाल: केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त सदस्य 4 वर्ष के लिए पद पर रहते हैं।
- बैठकें: MPC की वर्ष में कम-से-कम चार बैठकें आयोजित करना अनिवार्य है।
- मतदान: निर्णय उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से लिए जाते हैं। मत बराबर होने की स्थिति में RBI गवर्नर का निर्णायक मत मान्य होता है।
1981 से 2024 तक किए गए 44 वर्षीय अध्ययन में अहिल्यानगर, बीड, धाराशिव, सांगली और सोलापुर को महाराष्ट्र के अचानक सूखा (Flash Drought) आशंकित या प्रवण क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है।
अचानक सूखा (फ्लैश ड्राउट) क्या है?
- परिभाषा: अचानक सूखा, पारंपरिक सूखे की तुलना में कुछ दिनों से कुछ सप्ताह के भीतर ही तेजी से विकसित और गंभीर हो जाता है।
- कारण: कम वर्षा, उच्च तापमान, मृदा की नमी का तेज़ी से कम होना, तेज़ हवाएँ, सौर विकिरण में परिवर्तन, उच्च वाष्पोत्सर्जन, तथा उच्च वाष्प दाब घाटा (Vapour Pressure Deficit – VPD) .
- प्रभाव: फसलों पर गंभीर तनाव, जल संकट, पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान, आर्थिक हानि।
- निपटने के उपाय: मृदा की नमी की नियमित एवं समर्पित निगरानी; प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली का विकास और प्रभावी उपयोग।
असम में धनसिरी नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है।
धनसिरी नदी के बारे में
- धनसिरी नदी असम के गोलाघाट तथा नागालैंड के दीमापुर जिले की प्रमुख नदी है।
- यह ब्रह्मपुत्र नदी की एक महत्वपूर्ण सहायक नदी है।
- उद्गम: इसका उद्गम नागालैंड के लैशांग शिखर से होता है, जो नागा पहाड़ियों के दक्षिणी-पश्चिमी भाग में स्थित है।
- लंबाई: लगभग 352 किलोमीटर।
- अपवाह मार्ग: यह नदी नागालैंड–असम सीमा के साथ बहती है।
- पारिस्थितिकी दृष्टि से महत्व: नदी के दोनों ओर धनसिरी आरक्षित वन तथा इंटांकी राष्ट्रीय उद्यान स्थित हैं, जो समृद्ध जैव विविधता का संरक्षण प्रदान करती है।
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने वर्तमान कैबिनेट सचिव के सेवाकाल में विस्तार को मंजूरी दी है।
कैबिनेट सचिवालय के बारे में
- कैबिनेट सचिवालय सीधे प्रधानमंत्री के अधीन कार्य करता है। इसका प्रमुख कैबिनेट सचिव होता है, जो भारत का वरिष्ठतम सिविल सेवक तथा सिविल सेवा बोर्ड का पदेन (Ex-officio) अध्यक्ष होता है।
- प्रमुख कार्य:
- भारत सरकार (कार्य-संचालन) नियम, 1961 तथा कार्य आवंटन नियम, 1961 का प्रशासन और अनुपालन सुनिश्चित करना।
- मंत्रिमंडल तथा कैबिनेट समितियों को सचिवीय सहायता प्रदान करना।
- मंत्रालयों के बीच समन्वय सुनिश्चित करना तथा सचिवों की समितियों के माध्यम से मंत्रालयों के बीच उत्पन्न मतभेदों का समाधान करना।
- नीति-निर्माण में सहायता करना तथा सरकार के कार्यों के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करना।
- राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख आपदाओं एवं संकटों के दौरान समन्वय स्थापित करना तथा विभिन्न मंत्रालयों के बीच प्रभावी सहयोग सुनिश्चित करना।
वैज्ञानिकों ने स्तन कैंसर के सटीक उपचार के लिए प्रकाश-सक्रिय (Light-Activated) नैनोरोबोट विकसित किए हैं।
नैनोरोबोट के बारे में
- परिभाषा: नैनोरोबोट अत्यंत सूक्ष्म, प्रोग्राम-योग्य उपकरण होते हैं, जिनका आकार लगभग 50–100 नैनोमीटर (nm) होता है। इन्हें शरीर के भीतर विशिष्ट कार्य करने के लिए तैयार किया जाता है।
- 1 नैनोमीटर (nm) से आशय है 10⁻⁹ मीटर। नैनोस्केल से तात्पर्य 1 से 100 नैनोमीटर के बीच के आकार से है।
- कार्यप्रणाली: नैनोरोबोट उत्तेजना-अभिक्रियाशील (Stimulus-Responsive) होते हैं। इन्हें बाहरी संकेत (निकट-अवरक्त प्रकाश (Near-Infrared Light) और चुंबकीय क्षेत्र) और आंतरिक संकेत (pH, एंजाइम आदि) द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है। इससे वे शरीर के लक्षित स्थान पर अत्यंत सटीक कार्य कर सकते हैं।
- उपयोग: लक्षित कैंसर उपचार, शरीर में नियंत्रित तरीके से दवा पहुंचाने, बायोसेंसिंग, न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी, ऊतक मरम्मत, पुनर्योजी चिकित्सा (Regenerative Medicine) में।
- लाभ: अत्यधिक सटीक उपचार, पूरे शरीर पर होने वाले साइड-इफेक्ट्स में कमी, बेहतर उपचार।
Article Sources
1 sourceचांदीपुरा वायरस के प्रकोप की जांच के लिए केंद्र ने राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल तैनात किया है।
चांदीपुरा वायरस (CHPV) के बारे में
- फैमिली: चांदीपुरा वायरस (CHPV) रैब्डोविरिडी फैमिली का सदस्य है, जिसमें रेबीज़ वायरस भी शामिल है।
- CHPV बुलेट या गोली के आकार का, आवरणयुक्त रैब्डोवायरस है, जिसका एकल-सूत्री, ऋणात्मक-सेंस RNA (सिंगल-स्ट्रैंडेड नेगेटिव-सेंस RNA) जीनोम होता है।
- पहचान: इसकी पहली पहचान 1965 में महाराष्ट्र के नागपुर जिले के चांदीपुरा गाँव में हुई थी।
- वाहक (वेक्टर): मुख्य वाहक सैंडफ्लाई है। द्वितीयक वाहक मच्छर और किलनी (Ticks) है।
- रोग: यह चांदीपुरा वायरल एन्सेफलाइटिस (CVE) का कारण बनता है, जो मुख्य रूप से 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों को प्रभावित करता है।
- लक्षण: अचानक तेज बुखार, उल्टी, चेतना में परिवर्तन, दौरे, तेजी से बढ़ने वाला गहन एन्सेफलाइटिस।
- उपचार एवं रोकथाम: CHPV के लिए वर्तमान में कोई विशिष्ट एंटीवायरल दवा या टीका उपलब्ध नहीं है। उपचार मुख्यतः सहायक देखभाल पर आधारित है।
- इसके प्रभावी नियंत्रण और रोकथाम के लिए "वन हेल्थ दृष्टिकोण" अपनाना आवश्यक है, जिसमें मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के समन्वित प्रबंधन पर बल दिया जाता है।
Article Sources
1 sourceनासा के अनुसार स्पेसएक्स (SpaceX) के फाल्कन 9 रॉकेट का दूसरा चरण चंद्रमा की सतह से टकरा गया।
फाल्कन 9 रॉकेट के बारे में
- फाल्कन 9 पुनः उपयोग योग्य, दो-चरणीय रॉकेट है, जिसे स्पेसएक्स ने पृथ्वी की कक्षा तथा उससे आगे इंसानों और पेलोड के सुरक्षित एवं विश्वसनीय प्रक्षेपण के लिए विकसित किया है।
- यह विश्व का पहला ऑर्बिटल-क्लास का पुनः उपयोग योग्य रॉकेट है।
- पुनः उपयोग-योग्य का महत्व: इससे रॉकेट के सबसे महंगे हिस्सों का बार-बार उपयोग किया जा सकता है। परिणामस्वरूप अंतरिक्ष मिशनों की लागत में उल्लेखनीय कमी आती है।
- संबंधित मिशन: इस रॉकेट का प्रक्षेपण 2025 में किया गया था। यह दो वाणिज्यिक रोबोटिक चंद्र लैंडर्स लेकर गया था।
- मिशन पूरा होने के बाद पहला चरण सफलतापूर्वक पृथ्वी पर वापस लौट आया जबकि दूसरा चरण अंतरिक्ष में छोड़ दिया गया, जहां से वह गिरते हुए अंततः चंद्रमा की सतह से टकरा गया।