यह विधेयक 5 जून, 2026 को जारी किए गए आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को निरस्त कर उसके स्थान पर नया कानून लागू करने का प्रावधान करता है।
- यह विधेयक आयकर अधिनियम, 2025; वित्त अधिनियम, 2026 तथा भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में आवश्यक संशोधन करता है।
विधेयक के माध्यम से किए गए प्रमुख संशोधन
- आयकर में छूट: इस विधेयक के तहत विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) तथा बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से प्राप्त ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर आयकर से छूट प्रदान की गई है।
- पहले की व्यवस्था: आयकर अधिनियम, 2025 के तहत ब्याज आय पर 20%, अल्पकालिक पूंजीगत लाभ पर 30% और दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर 12.5% कर लगता था।
- कर छूट: यह विधेयक आयकर अधिनियम में संशोधन कर हीरा और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्रक में कार्यरत कुछ विदेशी कंपनियों को वर्ष 2041 तक आयकर में छूट प्रदान करता है।
- अधिभार (सरचार्ज) दर में वृद्धि: इस विधेयक में बिजनेस ट्रस्टों के विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) पर लगने वाली सरचार्ज दर को बढ़ाकर 25% कर गया है।
- रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs), इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) जैसे बिजनेस ट्रस्ट निवेशकों से राशि एकत्र कर अचल संपत्तियों (रियल एस्टेट) या अवसंरचना परिसंपत्तियों का अधिग्रहण, संचालन और प्रबंधन करते हैं।
- पहले की व्यवस्था: वित्त अधिनियम, 2026 के तहत ऐसे मामलों में आयकर पर 10% सरचार्ज लगाया जाता था।
- डिजिटल भुगतान पर शुल्क संबंधी प्रावधान: नया विधेयक यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से किए जाने वाले भुगतानों पर शुल्क लगाने पर लगी रोक को हटाने का प्रस्ताव करता है। इसका अर्थ है कि शून्य मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) व्यवस्था को समाप्त किया जा सकता है।
- वर्ष 2020 में लागू शून्य-MDR प्रावधान के तहत बैंकों और भुगतान प्रणाली प्रदाताओं (PSPs) को डिजिटल भुगतानों पर व्यापारियों से कोई शुल्क लेने की अनुमति नहीं थी।
- मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क है, जो किसी व्यापारी से डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड अथवा नेट बैंकिंग और डिजिटल वॉलेट जैसे डिजिटल माध्यमों से भुगतान स्वीकार करने पर लिया जाता है।
- वर्ष 2020 में लागू शून्य-MDR प्रावधान के तहत बैंकों और भुगतान प्रणाली प्रदाताओं (PSPs) को डिजिटल भुगतानों पर व्यापारियों से कोई शुल्क लेने की अनुमति नहीं थी।
- डेटा सेंटर: यह विधेयक आयकर अधिनियम में संशोधन कर डेटा सेंटर से संबंधित कुछ शर्तों को समाप्त करने का प्रस्ताव करता है। इसके तहत निम्नलिखित शर्तें हटाई गई हैं:
- विदेशी कंपनी का केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित होना अब आवश्यक नहीं होगा,
- डेटा सेंटर का सरकार द्वारा अनुमोदित योजना के अंतर्गत स्थापित होना भी अनिवार्य नहीं रहेगा।