भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) की 'ऑन टैप' लाइसेंसिंग के लिए मसौदा दिशानिर्देश जारी किए हैं। इससे दो दशकों से भी अधिक समय के बाद शहरी सहकारी बैंकों को नया लाइसेंस देने की प्रक्रिया फिर से शुरू होगी।
- ऑन-टैप लाइसेंसिंग प्रणाली ऐसी व्यवस्था है, जिसमें पात्र आवेदक वर्ष के किसी भी समय विनियामक प्राधिकरण के पास आवेदन कर व्यवसाय या वित्तीय लाइसेंस/अनुमति प्राप्त कर सकते हैं। अर्थात्, आवेदन केवल किसी निर्धारित या सीमित समयावधि में ही स्वीकार नहीं किए जाते, बल्कि पूरे वर्ष किए जा सकते हैं।
शहरी सहकारी बैंकों की 'ऑन टैप' लाइसेंसिंग के लिए मसौदा दिशानिर्देश के मुख्य प्रावधान:
- पात्रता: क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ जिनके पास कम से कम 10 वर्षों के संचालन का अनुभव हो।
- पूंजीगत आवश्यकताएं: न्यूनतम ₹10,000 करोड़ की जमा राशि और ₹300 करोड़ की निवल परिसंपत्ति (नेटवर्थ) हो।
- पंजीकरण: बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002 के तहत पंजीकृत होना अनिवार्य है।
- वित्तीय मानदंड: पूंजी-से-जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात (CRAR) 12% या उससे अधिक होना चाहिए और निवल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (Net NPA) 3% या उससे कम होनी चाहिए। इन मानदंडों का निर्धारण ऑडिटेड वित्तीय विवरणों के आधार पर किया जाएगा।
- CRAR किसी बैंक की पूंजी और उसकी जोखिम-भारित परिसंपत्तियों (Risk-Weighted Assets) का अनुपात है। यह दर्शाता है कि बैंक के पास संभावित नुकसान को सहन करने तथा वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए पर्याप्त पूंजी उपलब्ध है।
- गवर्नेंस: किसी एक व्यक्ति की शेयरधारिता अधिकतम 5% होनी चाहिए।
- व्यावसायिक योजना: पात्र आवेदकों के लिए पांच वर्षीय व्यावसायिक योजना प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। इस योजना में अग्रलिखित पहलुओं को शामिल करना होगा: वित्तीय समावेशन, शाखा एवं व्यवसाय विस्तार, प्रौद्योगिकी, जोखिम प्रबंधन, मानव संसाधन, विनियामक नियमों का अनुपालन।
- विनियमन (रेगुलेशन): लाइसेंस प्राप्त UCBs का संचालन बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (AACS); भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934; विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (FEMA); और भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 आदि के तहत किया जाएगा।
शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) के बारे में
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