RBI शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) का लाइसेंस देना फिर से शुरू करेगा | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • आरबीआई ने दो दशक के अंतराल के बाद शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के 'ऑन टैप' लाइसेंसिंग के लिए मसौदा दिशानिर्देश जारी किए हैं।
  • पात्रता मानदंडों में 10 वर्ष का परिचालन, न्यूनतम ₹10,000 करोड़ जमा, ₹300 करोड़ की कुल संपत्ति और CRAR ≥12% शामिल हैं।
  • लाइसेंस प्राप्त यूसीबी कई अधिनियमों द्वारा शासित होंगे जिनमें बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (एएसीएस) और आरबीआई अधिनियम, 1934 शामिल हैं।

In Summary

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) की 'ऑन टैप' लाइसेंसिंग के लिए मसौदा दिशानिर्देश जारी किए हैं। इससे दो दशकों से भी अधिक समय के बाद शहरी सहकारी बैंकों को नया लाइसेंस देने की प्रक्रिया फिर से शुरू होगी।

  • ऑन-टैप लाइसेंसिंग प्रणाली ऐसी व्यवस्था है, जिसमें पात्र आवेदक वर्ष के किसी भी समय विनियामक प्राधिकरण के पास आवेदन कर व्यवसाय या वित्तीय लाइसेंस/अनुमति प्राप्त कर सकते हैं। अर्थात्, आवेदन केवल किसी निर्धारित या सीमित समयावधि में ही स्वीकार नहीं किए जाते, बल्कि पूरे वर्ष किए जा सकते हैं।  

शहरी सहकारी बैंकों की 'ऑन टैप' लाइसेंसिंग के लिए मसौदा दिशानिर्देश के मुख्य प्रावधान:

  • पात्रता: क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ जिनके पास कम से कम 10 वर्षों के संचालन का अनुभव हो।
  • पूंजीगत आवश्यकताएं: न्यूनतम ₹10,000 करोड़ की जमा राशि और ₹300 करोड़ की निवल परिसंपत्ति (नेटवर्थ) हो।
  • पंजीकरण: बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002 के तहत पंजीकृत होना अनिवार्य है।
  • वित्तीय मानदंड: पूंजी-से-जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात (CRAR) 12% या उससे अधिक होना चाहिए और निवल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (Net NPA) 3% या उससे कम होनी चाहिए। इन मानदंडों का निर्धारण ऑडिटेड वित्तीय विवरणों के आधार पर किया जाएगा। 
    • CRAR किसी बैंक की पूंजी और उसकी जोखिम-भारित परिसंपत्तियों (Risk-Weighted Assets) का अनुपात है। यह दर्शाता है कि बैंक के पास संभावित नुकसान को सहन करने तथा वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए पर्याप्त पूंजी उपलब्ध है।
  • गवर्नेंस: किसी एक व्यक्ति की शेयरधारिता अधिकतम 5% होनी चाहिए।
  • व्यावसायिक योजना: पात्र आवेदकों के लिए पांच वर्षीय व्यावसायिक योजना प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। इस योजना में अग्रलिखित पहलुओं को शामिल करना होगा: वित्तीय समावेशन, शाखा एवं व्यवसाय विस्तार, प्रौद्योगिकी, जोखिम प्रबंधन, मानव संसाधन, विनियामक नियमों का अनुपालन। 
  • विनियमन (रेगुलेशन): लाइसेंस प्राप्त UCBs का संचालन बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (AACS); भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934; विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (FEMA); और भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 आदि के तहत किया जाएगा।

शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) के बारे में

  • UCBs किसी भी राज्य सहकारी समिति अधिनियम या बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम के तहत पंजीकृत वे सहकारी समितियां हैं, जिन्हें बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के तहत बैंकिंग लाइसेंस दिया गया है।
  • भारत में UCBs की वर्तमान स्थिति:
    • कुल UCBs: 1,457 (31 मार्च, 2025 तक)।
    • विनियामक व्यवस्था (दो संस्थाओं द्वारा नियंत्रण):
      • RBI द्वारा: 1966 से, RBI शहरी सहकारी बैंकों के बैंकिंग कार्यों को विनियमित करता है।
      • सहकारी समितियों का रजिस्ट्रार (RCS) द्वारा: राज्य या केंद्र सरकार इनके प्रशासनिक और प्रबंधकीय पहलुओं को विनियमित करती है।
      • श्रेणीबद्ध विनियामक संरचना (Tiered Structure): UCBs को जमा राशि की मात्रा के आधार पर RBI द्वारा चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।
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बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (Banking Regulation Act, 1949)

यह एक भारतीय कानून है जो भारत में बैंकों के विनियमन और पर्यवेक्षण के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है। यह भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को बैंकिंग कंपनियों के लाइसेंस देने, उनकी गतिविधियों को नियंत्रित करने और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करने के लिए शक्तियां प्रदान करता है।

वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion)

इसका अर्थ है कि सभी व्यक्तियों और व्यवसायों को सस्ती और उपयोगी वित्तीय सेवाओं (जैसे, बैंकिंग, क्रेडिट, बीमा, पेंशन) तक पहुंच प्रदान करना, जिसमें वह वर्ग भी शामिल है जिसे वर्तमान में इन सेवाओं से वंचित रखा गया है।

जोखिम-भारित परिसंपत्तियां (Risk-Weighted Assets - RWA)

बैंक की परिसंपत्तियां जिन्हें उनके संबंधित जोखिम स्तरों के आधार पर भारित किया जाता है। उच्च जोखिम वाली परिसंपत्तियों को अधिक भार दिया जाता है, जबकि कम जोखिम वाली परिसंपत्तियों को कम भार दिया जाता है।

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