केंद्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने 73वें संविधान संशोधन अधिनियम के कार्यान्वयन पर अपनी रिपोर्ट जारी की है। गौरतलब है कि 73वें संविधान संशोधन के द्वारा भारत में पंचायती राज प्रणाली को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया था।
73वें संविधान संशोधन के कार्यान्वयन की स्थिति
- त्रिस्तरीय प्रणाली की स्थापना: संविधान के अनुच्छेद 243B के अनुसार, भाग-IX के तहत आने वाले सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों (UTs) ने अपने संबंधित राज्य/UT में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था स्थापित की है।
- महिला सशक्तिकरण: हालांकि अनुच्छेद 243D पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33%) आरक्षण का प्रावधान करता है, फिर भी 21 राज्यों और 2 संघ राज्य क्षेत्रों ने महिलाओं के लिए 50% आरक्षण का प्रावधान किए हैं।
- शक्तियों का हस्तांतरण: वर्ष 2013-14 से 2021-22 के बीच शक्तियों के हस्तांतरण का राष्ट्रीय औसत 39.9% से बढ़कर 43.9% हो गया है।
- राज्य वित्त आयोगों (SFCs) का गठन: 28 राज्यों में से 25 राज्यों ने संवैधानिक प्रावधानों का अनुपालन किया है।
- तीन अन्य राज्य; मेघालय, मिजोरम और नागालैंड संविधान के भाग-IX के अंतर्गत शामिल नहीं हैं।
समिति द्वारा रेखांकित मुद्दे और मुख्य सुझाव | ||
विषय-क्षेत्र | मुद्दे/समस्याएं | सुझाव |
ग्राम सभाएं | सभा की बैठकें मात्र औपचारिकता बनकर रह गई हैं और लोगों की भागीदारी में गिरावट दर्ज की गई है। | जागरूकता अभियान चलाना चाहिए तथा डिजिटल प्लेटफॉर्मों का उपयोग बढ़ाना चाहिए। |
महिला प्रतिनिधि | पुरुष पारिवारिक सदस्यों द्वारा प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व (सरपंच-पति) के कई उदाहरण मिले हैं। | विशेष क्षमता-निर्माण कार्यक्रम चलाना चाहिए और अनुभवी महिला प्रतिनिधियों व स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को शामिल करते हुए मेंटरिंग प्रणाली विकसित करनी चाहिए। |
वित्तीय सशक्तिकरण | पंचायतें मुख्य रूप से बाहरी वित्तीय हस्तांतरण पर अधिक निर्भर हैं। | स्वयं के राजस्व के स्रोतों को बढ़ाने की रणनीति बनानी चाहिए, वित्तीय विकेंद्रीकरण को बढ़ावा देना चाहिए, समय पर राज्य वित्त आयोगों का गठन करना चाहिए और प्रदर्शन के आधार पर आर्थिक प्रोत्साहन देना चाहिए। |
मानव संसाधन (HR) | विशेष पंचायत कैडर का अभाव है तथा प्रतिनिधियों व अधिकारियों के बीच लगातार टकराव की स्थिति बनी रहती है। | विशेष पंचायत कैडर बनाने को प्रोत्साहित करना चाहिए और प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिए एक समर्पित सचिव नियुक्त करना चाहिए। |