अग्नि-4 के इस परीक्षण ने मिसाइल की परिचालन तैयारी को प्रदर्शित किया और पुष्टि की कि इसकी सभी महत्वपूर्ण प्रणालियां अपेक्षित मानकों के अनुसार सफलतापूर्वक कार्य कर रही हैं।
अग्नि मिसाइलों की विशेषताएं:

- अग्नि कार्यक्रम: यह कार्यक्रम शुरुआत में री-एंट्री व्हीकल तकनीक के प्रदर्शन के रूप में विकसित किया गया था। बाद में यह विभिन्न मारक क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइलों की एक पूरी श्रृंखला में विकसित हुआ। यह भारत के एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP) के तहत विकसित किया गया है।
- अग्नि-I: यह दो चरणों वाली तरल-ठोस प्रणोदन प्रणाली वाली मिसाइल है। इसकी परिचालन क्षमता लंबे तैनाती समय और गतिशीलता (मोबिलिटी) की सीमाओं से प्रभावित होती है।
- अग्नि-II: यह दो चरणों वाली ठोस-ईंधन मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 2,500 किमी है।
- अग्नि-III: इसकी मारक क्षमता लगभग 3,500 किमी है। इसे भारत की सामरिक प्रतिरोधक क्षमता (Strategic Deterrence) को सुदृढ़ करने के लिए विकसित किया गया है, विशेष रूप से चीन के संदर्भ में।
- अग्नि-IV: यह मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM) है, जिसे स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड (SFC) के तहत संचालित किया जाता है। यह भारत की विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करती है।
- इसकी मारक क्षमता लगभग 4,000 किमी है और यह 1,000 किलोग्राम तक का पेलोड ले जा सकती है।
- अग्नि-V: यह एक अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है, जिसमें तीन चरणों वाली ठोस-ईंधन प्रणोदन प्रणाली है। यह MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल) तकनीक से युक्त है, जिससे एक ही मिसाइल कई अलग-अलग लक्ष्यों को साधने में सक्षम हो सकती है।
बैलिस्टिक मिसाइलों के बारे में:
- बैलिस्टिक मिसाइलें शुरुआत में रॉकेट इंजन की शक्ति से उड़ान भरती हैं, लेकिन इसके बाद वे बिना इंजन की शक्ति के स्वतंत्र रूप से प्रक्षेपवक्र (मार्ग) का अनुसरण करते हुए अपने लक्ष्य की ओर नीचे आती हैं।
- वर्गीकरण:
- कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (SRBM): 1,000 किमी से कम दूरी की मारक क्षमता,
- मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM): 1,000-3,000 किमी दूरी की मारक क्षमता,
- इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM): 3,000-5,500 किमी दूरी की मारक क्षमता,
- अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM): 5,500 किमी से अधिक दूरी की मारक क्षमता।