छत्तीसगढ़ ने जंगली भैंसों की घटती संख्या को पुनर्जीवित करने के लिए असम से जंगली भैंसों को लाने की योजना बनाई है।
जंगली भैंसा (एशियाई जंगली जल भैंसा – बुबालस आर्नी) के बारे में:
- प्राप्ति देश: भारत, नेपाल, भूटान, थाईलैंड और कंबोडिया में पाए जाते हैं।
- भारत में इसकी अधिक संख्या असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में प्राप्त होती है।
- इसकी कुछ संख्या मेघालय, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में भी पाई जाती है।
- विश्व की 90% से अधिक जंगली भैंसों की समष्टि (आबादी) भारत में है। भारत में इसकी संख्या लगभग 3,500–3,700 है।
- पर्यावास: यह मुख्य रूप से खुले घास के मैदानों, जलोढ़ मैदानों और दलदली क्षेत्रों में पाया जाता है। अत्यधिक गर्मी या भारी बारिश के दौरान आश्रय के लिए वन क्षेत्रों का भी उपयोग कर सकता है।
- संरक्षण स्थिति:
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची-I,
- IUCN रेड लिस्ट: एंडेंजर्ड,
- CITES: परिशिष्ट-III.
शोधकर्ताओं ने लेट्यूस और तंबाकू के पौधों को आनुवंशिक रूप से इस तरह विकसित किया है कि वे मायोग्लोबिन (Myoglobin) का उत्पादन कर सकें। इससे पौधों से बने मांस के पोषण मूल्य और मांस जैसी विशेषताओं को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
मायोग्लोबिन के बारे में
- मायोग्लोबिन एक प्रोटीन है, जो मनुष्यों सहित जानवरों की मांसपेशियों में पाया जाता है।
- यह मांसपेशियों की कोशिकाओं में ऑक्सीजन को संग्रहित करता है, ताकि मांसपेशियों को कार्य करने के दौरान आवश्यक ऑक्सीजन आसानी से उपलब्ध हो सके।
- महत्व:
- यह मांस को लाल रंग प्रदान करने में योगदान देता है।
- मांस के स्वाद और सुगंध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- इसमें हीम आयरन (Heme Iron) पाया जाता है, जिसे मानव शरीर अपेक्षाकृत आसानी से अवशोषित कर लेता है।
- इसलिए यह आहार में आयरन का महत्वपूर्ण स्रोत है।
FDA ने मौसमी फ्लू के लिए पहली mRNA वैक्सीन को मंजूरी दी है।
mRNA वैक्सीन के बारे में
- mRNA वैक्सीन शरीर की कोशिकाओं को किसी रोगजनक के हानिरहित प्रोटीन (एंटीजन) का निर्माण करने के लिए आनुवंशिक निर्देश देती हैं।
- प्रतिरक्षा तंत्र इस प्रोटीन को पहचानकर प्रतिरक्षा विकसित करता है, जबकि व्यक्ति को वास्तविक रोग पैदा करने वाले जीव से संक्रमित होने की आवश्यकता नहीं होती।
- सीमाएँ:
- सीमित म्यूकोसल इम्युनिटी: नाक और श्वसन मार्ग की सतह पर पर्याप्त प्रतिरक्षा नहीं बन पाने के कारण ब्रेकथ्रू संक्रमण हो सकते हैं।
- कोल्ड-चेन की आवश्यकता: इनके भंडारण और परिवहन के लिए लगभग −20°C से −80°C तक कम तापमान की आवश्यकता हो सकती है।
पारंपरिक टीकों और mRNA टीकों के बीच अंतर:
- सामग्री:
- पारंपरिक: कमजोर/निष्क्रिय रोगाणु या प्रोटीन;
- mRNA: केवल आनुवंशिक निर्देश।
- कार्यप्रणाली:
- पारंपरिक: एंटीजन को सीधे शरीर में पहुँचाना;
- mRNA: कोशिकाओं द्वारा एंटीजन का निर्माण।
- विकास:
- पारंपरिक: विकसित होने में अधिक समय लगना;
- mRNA: शीघ्रता से विकास और संशोधन।
Article Sources
1 sourceईरान और ओमान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को 60 दिनों के लिए फिर से खोलने पर सहमति जताई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य के बारे में

- अवस्थिति: यह उत्तर में ईरान तथा दक्षिण में ओमान और UAE के बीच स्थित है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी) और आगे अरब सागर से जोड़ता है।
- ऊर्जा परिवहन का प्रमुख केंद्र: विश्व के लगभग 20% तेल का परिवहन इस जलडमरूमध्य से होता है।
- यह सऊदी अरब, UAE, कुवैत, कतर, इराक, बहरीन और ईरान द्वारा उत्पादित तेल के निर्यात का प्रमुख मार्ग है।
- भारत के लगभग 40% कच्चे तेल आयात, 50% से अधिक LNG आयात और लगभग 90% LPG आयात इसी मार्ग से होकर गुजरते हैं।
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1 sourceकर्नाटक के नीरगुंडा में 12वीं सदी का एक वीरगल्लू (Veeragallu) मिला है, जिससे होयसल शासक विष्णुवर्धन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।
- वीरगल्लू को योद्धा शिला या स्मारक शिला कहा जाता है। इन्हें युद्ध या किसी वीरतापूर्ण कार्य में मारे गए योद्धाओं के सम्मान में स्थापित किया जाता था।
- मिले हुए वीरगल्लु पर कन्नड़ भाषा में अभिलेख है, जिसमें होयसल शासक विष्णुवर्धन की 1141 ई. में मृत्यु का उल्लेख मिलता है।
होयसल वंश के बारे में

- होयसल वंश ने 11वीं से 14वीं शताब्दी के बीच वर्तमान कर्नाटक और तमिलनाडु के कई क्षेत्रों पर शासन किया।
- बेलूर और हलेबीडु (कर्नाटक) इस वंश की प्रमुख राजधानियां थीं।
- संस्थापक: नृप काम द्वितीय।
- यूनेस्को विश्व विरासत: होयसल के पवित्र मंदिर समूह में चेन्नकेशव मंदिर (बेलूर), होयसलेश्वर मंदिर (हलेबीडु) और केशव मंदिर (सोमनाथपुर) शामिल हैं। इन्हें यूनेस्को विश्व विरासत स्थल घोषित किया गया है।
कोलकाता स्थित बोस इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने जनरल कॉन्करेंस परकोलेशन (GCP) नामक एक नई तकनीक विकसित की है। इसका उद्देश्य क्वांटम एंटैंगलमेंट को सुदृढ़ करके क्वांटम संचार नेटवर्क की दक्षता और विश्वसनीयता बढ़ाना है।
- क्वांटम नेटवर्क दूर स्थित स्टेशनों के बीच सूचना को सुरक्षित और कुशल तरीके से भेजने के लिए क्वांटम एंटेंगलमेंट जैसी परिघटना पर निर्भर करते हैं।
जनरल कॉन्करेंस परकोलेशन (GCP) के बारे में
- ज्यामितीय समाधान: यह बीच के नोड्स को हटाने के बजाय स्थानीय ज्यामितीय रूटिंग रणनीति का उपयोग करता है।
- कार्यप्रणाली: यह सबसे छोटे संचार मार्गों पर क्वांटम एंटेंगलमेंट को सुदृढ़ करता है, जिससे एक घना और अधिक कुशल क्वांटम नेटवर्क तैयार होता है।
- प्रमुख लाभ:
- एंटेंगलमेंट के लिए आवश्यक न्यूनतम सीमा को कम करता है।
- नेटवर्क की टोपोलॉजी और संसाधनों को बनाए रखता है।
- बड़े स्तर पर विकसित किए जा सकने वाले स्केलेबल क्वांटम नेटवर्क के लिए एक पूर्वानुमानित और व्यवस्थित रूपरेखा प्रदान करता है।
BRICS संस्कृति मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत ने यूनाइटेड किंगडम से 11वीं सदी की वाग्देवी प्रतिमा को वापस भारत लाने के लिए राजनयिक प्रयास फिर से तेज किए।
वाग्देवी प्रतिमा के बारे में
- कला शैली और काल: यह संगमरमर से निर्मित 11वीं सदी की उत्कृष्ट मूर्ति है, जो परमार काल से संबंधित है। इसे धार के भोजशाला परिसर से जुड़ी मानी जाती है।
- खोज: यह प्रतिमा 1875 में धार में मिली थी और 1909 में ब्रिटिश म्यूजियम ने इसे प्राप्त किया।
- पहचान को लेकर विवाद: भारत इसे वाग्देवी (देवी सरस्वती) की प्रतिमा मानता है, जबकि ब्रिटिश म्यूजियम इसे जैन परंपरा की अंबिका के रूप में वर्गीकृत करता है।
- शिल्पकार: इसका निर्माण वररुचि को माना जाता है। कुछ विद्वान वररुचि की पहचान राजा भोज के दरबारी कवि धनपाल के रूप में करते हैं।
परमार वंश के बारे में
- क्षेत्र: परमार वंश ने 8वीं से 14वीं सदी के प्रारंभ तक मालवा क्षेत्र पर शासन किया।
- राजधानियाँ: उज्जैन और धारा (वर्तमान धार)।
- प्रमुख शासक: उपेन्द्र (संस्थापक), वाक्पति प्रथम, वैरिसिंह द्वितीय, सियक द्वितीय, वाक्पति द्वितीय (मुंज) और राजा भोज आदि।
- राजा भोज: परमार वंश के सबसे प्रसिद्ध शासकों में से एक थे। उन्हें विद्वान और लेखक के रूप में भी जाना जाता है तथा उनसे लगभग 84 ग्रंथों का रचनाकार माना जाता है।
भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत 10वीं ब्रिक्स उद्योग मंत्रियों की बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
बैठक के प्रमुख परिणाम
- औद्योगिक सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए संयुक्त घोषणा अपनाई गई।
- लघु और मध्यम उद्यमों (SMEs) के लिए अनुकूल परिवेश को बढ़ावा देने के लिए MSME फ्रेमवर्क को मंजूरी दी गई।
- फोटोवोल्टिक कार्य समूह की शुरुआत की गई।
- स्टार्टअप एक्शन प्लान को अंतिम रूप दिया गया।
- भारत की पहल: भारत ने ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क और स्टार्टअप नवाचार फंड स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।
- बैठक में ब्रिक्स-नई औद्योगिक क्रांति पर साझेदारी (PartNIR) के महत्व को दोहराया गया। इसे व्यावहारिक सहयोग, ज्ञान साझा करने, क्षमता निर्माण और औद्योगिक नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच माना गया।
Article Sources
1 sourceकेंद्रीय आयुष मंत्रालय ने साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए 3 प्रमुख पहलों की शुरुआत की है, जिनमें केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS)-परंपरा भी शामिल है।
CCRAS-परंपरा के बारे में
- यह भारत की स्थानीय स्वास्थ्य परंपराओं, नृजातीय/पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और पारंपरिक पशु चिकित्सा ज्ञान के व्यवस्थित दस्तावेजीकरण, मूल्यांकन और वैज्ञानिक सत्यापन के लिए एक प्रमुख पहल है।
- इसका उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर मान्य और संरक्षित करना तथा आयुर्वेद को अधिक साक्ष्य-आधारित बनाना है।
CCRAS के बारे में
- CCRAS केंद्रीय आयुष मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय है।
- यह भारत में आयुर्वेद के क्षेत्र में वैज्ञानिक आधार पर अनुसंधान के निर्माण, समन्वय, विकास और प्रचार-प्रसार के लिए एक शीर्ष निकाय है।