गोबरधन (GOBARdhan) से आशय है; गैलवनाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन।
गोबरधन योजना को मूल रूप से 2018 में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत शुरू किया गया था। यह ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य जैविक अपशिष्ट को बायोगैस में बदलना है।
योजना की प्रमुख विशेषताएं:

- नोडल मंत्रालय: केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय
- परिव्यय और कार्यान्वयन अवधि: वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2035-36 के लिए ₹23,731 करोड़।
- उद्देश्य: घरेलू कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) उत्पादन में लगभग दस गुना वृद्धि करना, बड़ी मात्रा में निजी निवेश जुटाना और देश भर में चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था (सर्कुलर बायोइकोनॉमी) का निर्माण करना।
- योजना के छह विकास इंजन:
- सुनिश्चित कंप्रेस्ड बायोगैस खरीद: एक विश्वसनीय बाजार सुनिश्चित करने के लिए, सिटी गैस वितरण (CGD) संस्थाओं द्वारा CBG की खरीद की जाएगी। इससे CNG (परिवहन) और घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) में CBG मिलाने के सरकार के लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलेगी। ये लक्ष्य हैं-2026-27 में 3%, 2027-28 में 4% और 2028-29 से 5%।
- स्थिर CBG मूल्य निर्धारण व्यवस्था: कंप्रेस्ड बायोगैस उत्पादकों को निरंतर आय सुनिश्चित करने के लिए ₹2,110 प्रति MMBTU का निर्धारित CBG मूल्य रखा गया है। साथ ही, सरकार द्वारा 10 वर्षों तक राजस्व की गारंटी दी जाएगी।
- पूंजीगत सहायता: पात्र ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड कंप्रेस्ड बायोगैस परियोजनाओं के लिए ₹2 करोड़ प्रति टन प्रति दिन तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी ।
- पाइपलाइन अवसंरचना का विकास: CBG संयंत्रों को अपने उत्पाद को बाजार तक आसानी से पहुँचाने के लिए क्लस्टर आधारित और अलग-अलग पाइपलाइन कनेक्टिविटी को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे कंप्रेस्ड बायोगैस की आपूर्ति की लागत कम होगी, आपूर्ति अधिक नियमित होगी और बाजार का विस्तार होगा।
- क्रेडिट गारंटी: MSME आधारित कंप्रेस्ड बायोगैस परियोजनाओं के लिए 85% तक की ऋण गारंटी प्रदान की जाएगी। इससे ऋण प्राप्त करने में आसानी होगी और ऋणदाताओं का विश्वास भी बढ़ेगा।
- CBG इकोसिस्टम चैलेंज फंड: यह फंड जिला स्तर पर कच्चे जैविक पदार्थ (फीडस्टॉक) की उपलब्धता का आकलन करने और उसे एकत्र करने के लिए अवसंरचना विकसित करने और नई तकनीकों को अपनाने में सहायता करेगा।