CAG ने ग्रीन इंडिया मिशन के क्रियान्वयन में बड़ी कमियों को रेखांकित किया | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • 2014 में शुरू किए गए ग्रीन इंडिया मिशन (जीआईएम) का उद्देश्य वन क्षेत्र को 5 मिलियन हेक्टेयर तक बढ़ाना और 3 मिलियन परिवारों की आजीविका में सुधार करना है।
  • सीएजी ने कई महत्वपूर्ण कमियों की पहचान की: वन क्षेत्र में 97.57% की कमी, अन्य योजनाओं के साथ तालमेल का अभाव और ₹10,600 करोड़ की धनराशि का नुकसान।
  • अन्य मुद्दों में पारदर्शिता की कमी, कमजोर लेखांकन, कार्बन आकलन की उपेक्षा, जलवायु प्राथमिकताओं का खराब निर्धारण और सीमित जमीनी प्रभाव शामिल हैं, जिसमें 70% स्थलों पर जीआईएम-संबंधी कोई परिवर्तन नहीं दिखाई देता है।

In Summary

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट में ग्रीन इंडिया मिशन (GIM) के क्रियान्वयन में कई महत्वपूर्ण कमियों को रेखांकित किया गया है।

ग्रीन इंडिया मिशन (GIM) के बारे में

  • ग्रीन इंडिया मिशन या हरित भारत मिशन केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत संचालित है। यह राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य-योजना (NAPCC) के 8 मिशनों में से एक है। इसे 2014 में शुरू किया गया था।
  • इसका उद्देश्य भारत के घटते वन क्षेत्र को संरक्षित, पुनर्बहाल और बेहतर बनाना है।
  • प्रमुख लक्ष्य: 
    • वन एवं वृक्ष आवरण क्षेत्र में 50 लाख हेक्टेयर का विस्तार करना, 
    • अतिरिक्त 50 लाख हेक्टेयर वन एवं गैर-वन भूमि की गुणवत्ता में सुधार करना, 
    • वन आधारित कार्यों से आय बढ़ाकर 30 लाख परिवारों की आजीविका में सुधार करना।

CAG द्वारा रेखांकित प्रमुख कमियां

  • वन आवरण में भारी कमी: 14 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य की तुलना में वन आवरण में केवल 0.03409 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई। इस प्रकार लक्ष्य प्राप्ति में लगभग 97.57% की कमी रही।
  • विभिन्न योजनाओं के बीच समन्वय का अभाव: ग्रीन इंडिया मिशन का अन्य योजनाओं के साथ प्रभावी समन्वय नहीं हो पाया।  इनमें शामिल हैं: CAMPA, मनरेगा, नगर वन योजना, स्कूल नर्सरी योजना। 
  • ₹10,600 करोड़ की प्रस्तावित धनराशि का नुकसान: संस्थाओं के बीच समन्वय की कमी के कारण लगभग ₹10,600 करोड़ का प्रस्तावित ग्रीन इंडिया मिशन वित्तपोषण का उपयोग नहीं हो सका।
  • पारदर्शिता की कमी: 14 राज्यों ने ग्रीन इंडिया मिशन के तहत किए गए कार्यों की निगरानी के लिए निर्धारित सार्वजनिक वेब-लिंक उपलब्ध नहीं कराए।
  • कमजोर लेखा नियंत्रण: 8 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों ने वार्षिक लेखे तैयार नहीं किए। अन्य मामलों में तैयार किए गए लेखे या तो ऑडिट नहीं हुए या सहायक अभिलेखों से उनमें विसंगतियां पाई गईं।
  • कार्बन पृथक्करण का पर्याप्त आकलन नहीं: वर्ष 2015–2025 की अवधि में केवल मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ ने कार्बन पृथक्करण/अवशोषण (Carbon Sequestration) का आकलन किया।
  • जलवायु को कम प्राथमिकता: ग्रीन इंडिया मिशन के तहत वनीकरण के लिए अत्यधिक जलवायु-संवेदनशील क्षेत्रों की बजाय कम या मध्यम संवेदनशीलता वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई।
  • जमीनी स्तर पर सीमित प्रभाव: ग्रीन इंडिया मिशन विश्लेषण के अनुसार, नमूना लिए गए लगभग 70% क्षेत्रों में ग्रीन इंडिया मिशन के कारण कोई उल्लेखनीय बदलाव दिखाई नहीं दिया। 
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मनरेगा

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act - MGNREGA) या मनरेगा, ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक रोजगार गारंटी योजना है। वनीकरण और वृक्षारोपण जैसे कार्य इसमें शामिल हो सकते हैं, जो ग्रीन इंडिया मिशन के लक्ष्यों का समर्थन कर सकते हैं।

CAMPA

Compensatory Afforestation Fund Management and Planning Authority. An authority set up to manage funds collected from user agencies for diverting forest land for non-forest purposes, which are then used for afforestation and conservation.

कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration)

कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration) वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) को हटाने और उसे स्थायी रूप से संग्रहीत करने की प्रक्रिया है। वनस्पति, विशेषकर वृक्ष, प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से CO2 को अवशोषित करते हैं, जिससे कार्बन पृथक्करण में मदद मिलती है। यह जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण अवधारणा है।

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