जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में नल से जल की आपूर्ति का विस्तार 2019 में 16.7% से बढ़कर 82% से अधिक हो गई है। 2 लाख से अधिक गांवों को ‘हर घर जल’ के रूप में प्रमाणित किया जा चुका है।
जल जीवन मिशन के बारे में:
- प्रारंभ: वर्ष 2019 में जल शक्ति मंत्रालय के तहत।
- योजना का प्रकार: केंद्र प्रायोजित योजना,
- उद्देश्य: प्रत्येक ग्रामीण परिवार को कार्यशील घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) उपलब्ध कराना और प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर (LPCD) सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करना।
- प्रमुख विशेषताएँ:
- पानी समितियों/ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSCs) के माध्यम से स्थानीय लोगों की भागीदारी और स्वामित्व को बढ़ावा।
- जल की गुणवत्ता की निगरानी, जल स्रोतों की संधारणीयता, ग्रे-वाटर प्रबंधन तथा रखरखाव पर जोर।
- गांवों में दीर्घकालिक पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ग्राम कार्य योजना (VAP) तैयार किए जाते हैं।
- मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाया गया है।
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1 sourceसंसदीय समिति ने हाल ही में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के ज्ञान भारतम मिशन के तहत पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण की धीमी गति पर चिंता जताई है।
‘ज्ञान भारतम मिशन’ के बारे में:
- प्रारंभ: इसकी घोषणा केंद्रीय बजट 2025-26 में की गई और सितंबर 2025 में इसे औपचारिक रूप से शुरू किया गया।
- लक्ष्य: वर्ष 2030 तक 1 करोड़ पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण करना।
- वित्तीय प्रावधान: 2025–2031 के लिए ₹491.66 करोड़ का प्रावधान।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म: भारतीय ग्रंथों और पांडुलिपियों को विश्व भर में उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी (NDR) की स्थापना।
- मुख्य घटक: पांडुलिपि संसाधन एवं संरक्षण केंद्र, AI आधारित हस्तलिखित टेक्स्ट पहचान, राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी (NDR), क्षमता निर्माण, वैश्विक सहयोग
- वर्तमान स्थिति: अभी तक केवल 7.5 लाख पांडुलिपियों/टेक्स्ट्स का डिजिटलीकरण किया गया है, जो निर्धारित लक्ष्य की तुलना में काफी कम है।
रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना को 'लोइटर म्यूनिशन सिस्टम' की आपूर्ति के लिए टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और निबे प्राइवेट लिमिटेड के साथ अनुबंध किए हैं।
लोइटर म्यूनिशन सिस्टम्स के बारे में
- प्रकृति: इन्हें कामिकाज़ी ड्रोन या आत्मघाती ड्रोन भी कहा जाता है। ये मानव रहित हवाई शस्त्र प्रणालियां हैं, जो किसी लक्ष्य क्षेत्र के ऊपर कुछ समय तक उड़ान भर सकती हैं, लक्ष्य की पहचान कर सकती हैं और उस पर सटीक हमला कर सकती हैं।
- दोहरी भूमिका: ये UAV और मिसाइल, दोनों की क्षमताओं को शामिल करते हैं। इनमें निगरानी करने और लक्ष्य पर हमला करने, दोनों की क्षमता होती है।
- उपयोगिता: ये दृश्य सीमा से परे (BVLOS) सटीक हमला करने की क्षमता प्रदान करते हैं। इनका उपयोग सामरिक और महत्वपूर्ण लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है।
- नागास्त्र-1 भारत का स्वदेशी लोइटर म्यूनिशन है।
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1 sourceभारत की राष्ट्रपति ने 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर वीरता पुरस्कारों (Gallantry Awards) को मंजूरी दी।
वीरता पुरस्कारों के बारे में
- उद्देश्य: युद्ध और शांतिकाल, दोनों में अदम्य साहस, शौर्य और बलिदान को सम्मानित करने के लिए दिए जाते हैं।
- प्रदानकर्ता: भारत के राष्ट्रपति, जो भारतीय सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर हैं।
- वीरता पुरस्कारों की आधिकारिक घोषणा वर्ष में दो बार की जाती है; गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर और स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर।
- नोडल मंत्रालय: रक्षा मंत्रालय। यह सशस्त्र बलों और केंद्रीय गृह मंत्रालय से वर्ष में दो बार पुरस्कारों के लिए अनुशंसाएं आमंत्रित करता है।
- युद्ध-कालीन वीरता पुरस्कार: परमवीर चक्र (सर्वोच्च), महावीर चक्र और वीर चक्र।
- शांतिकालीन वीरता पुरस्कार: अशोक चक्र (सर्वोच्च), कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र।
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1 sourceराजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने फर्जी तरीके से सुपारी के आयात के माध्यम से साफ्टा (SAFTA ) के तहत मिलने वाले लाभों के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का पता लगाया है।
साफ्टा (SAFTA ) के बारे में
- यह दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) की मुक्त व्यापार व्यवस्था है।
- यह 2006 में लागू हुआ। इसने 1993 के सार्क तरजीही व्यापार व्यवस्था (SAPTA) का स्थान लिया।
- शामिल सदस्य देश: अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका।
- उद्देश्य: क्षेत्रीय देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना, व्यापार बाधाओं को कम करना, वस्तुओं की सीमा-पार आवागमन को आसान बनाना, क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ करना।
- विशेष प्रावधान: साफ्टा के तहत अल्प विकसित देशों (LDCs) को विशेष एवं विभेदक व्यवहार (S&DT) प्रदान किया जाता है।
सुपारी (Areca Nut) के बारे में
- सुपारी को Betel Nut के नाम से जाना जाता है।
- भारत विश्व में सुपारी का सबसे बड़ा उत्पादक देश है।
- प्रमुख उत्पादक राज्य: कर्नाटक, केरल और असम।
- घरेलू उत्पादकों को संरक्षण देने के लिए सुपारी के आयात पर 100% आधार सीमा शुल्क (बेसिक कस्टम ड्यूटी) लगता है।
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1 sourceहाल ही में फारस की खाड़ी में तेल रिसाव से ईरान का केशम द्वीप (Qeshm Island) गंभीर रूप से प्रदूषित हो गया है। इससे यहां स्थित संवेदनशील हारा मैंग्रोव (Hara Mangrove) पारितंत्र के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है।
हारा मैंग्रोव के बारे में
- अवस्थिति: यह मुख्य रूप से केशम द्वीप पर स्थित है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के पास फारस की खाड़ी में है।
- विशिष्ट वनस्पति: यहां मुख्य रूप से एविसिनिया मरीना (ग्रे मैंग्रोव) प्रजाति पाई जाती है। इसे स्थानीय रूप से हारा/हर्रा कहा जाता है।
- मान्यता: रामसर आर्द्रभूमि (1975), यूनेस्को बायोस्फीयर रिजर्व (1976)
- पारिस्थितिकी एवं आर्थिक दृष्टि से महत्व:
- यह हॉक्सबिल कछुए और ग्रीन टर्टल जैसे समुद्री जीवों के लिए महत्वपूर्ण पर्यावास है।
- डालमेटियन पेलिकन सहित अनेक प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
- मैंग्रोव पारितंत्र मत्स्य संसाधनों को आश्रय प्रदान करता है।
- यह स्थानीय समुदायों की आजीविका में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रधानमंत्री ने भारत की अर्थव्यवस्था में हुए रूपांतरण को रेखांकित करते हुए बताया कि भारत ‘फ्रैजाइल फाइव’ की स्थिति से निकलकर आज विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है।
‘फ्रैजाइल फाइव’ के बारे में
- 'फ्रैजाइल फाइव' शब्दावली का प्रयोग मॉर्गन स्टेनली ने 2013 में किया था।
- यह शब्दावली उन पाँच उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए उपयोग किया गया था, जिन्हें बाहरी वित्तीय संकटों और अचानक पूंजी निकासी से अत्यधिक संकट का सामना करना पड़ सकता था।
- ‘फ्रैजाइल फाइव’ में शामिल देश: ब्राजील, भारत, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने छोटे करदाताओं के लिए FAST-DS 2026 प्रारंभ किया है। यह योजना 16 अगस्त 2026 से लागू हो गई है।
FAST-DS 2026 के बारे में
- विधिक आधार: यह वित्त अधिनियम, 2026 में शामिल एक एक-बार (वन टाइम) के स्वैच्छिक प्रकटीकरण योजना है।
- उद्देश्य: पात्र करदाता कुछ अघोषित विदेशी परिसंपत्तियों, अघोषित विदेशी आय या घोषित न की गई विदेशी परिसंपत्तियों की जानकारी निर्धारित कर या शुल्क का भुगतान करके दे सकते हैं।
- घोषणा की 2 श्रेणियां:
- श्रेणी 1: ऐसी अघोषित विदेशी परिसंपत्ति या विदेशी आय, जिस पर पहले कर नहीं दिया गया है। इसकी कुल वैल्यू ₹1 करोड़ से अधिक नहीं होनी चाहिए।
- श्रेणी 2: ऐसी विदेशी परिसंपत्तियां, जिन पर पहले ही कर दिया जा चुका है या जिन्हें करदाता ने गैर-निवासी (Non-Resident) रहते हुए प्राप्त किया था, लेकिन संबंधित आयकर रिटर्न की अनुसूची में इनका विवरण नहीं दिया गया था। ऐसी घोषणा के लिए सीमा ₹5 करोड़ है। इसके लिए ₹1 लाख शुल्क देना होगा।
- योजना का लाभ: घोषणा करने वाले पात्र करदाताओं को 'काला धन (अज्ञात विदेशी आय तथा परिसंपत्ति) तथा कर अधिनियम' के तहत कर से, जुर्माने से और अभियोजन से छूट मिलेगी।
- किन मामलों में लागू नहीं होगी: धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) से जुड़े अपराध से प्राप्त आय/संपत्ति या ऐसे मामले जिनमें काला धन अधिनियम के तहत कर आकलन (अस्सेसमेंट) पूरा हो चुका है।
लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (LDB) ने 2016 में प्रारंभ होने के बाद से 10 करोड़ निर्यात-आयात (EXIM) कंटेनरों की निगरानी पूरी करने की महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त की है।
लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (LDB) के बारे में
- शुरुआत: LDB को NLDSL द्वारा लागू किया गया है। NLDSL, भारत सरकार की NICDIT और जापान की NEC कॉर्पोरेशन का संयुक्त उपक्रम है।
- प्रौद्योगिकी: LDB विभिन्न आधुनिक प्रौद्योगिकी को एकीकृत करता है; जैसे- रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), क्लाउड कंप्यूटिंग। इनके माध्यम से EXIM कंटेनरों प्रारंभ बिंदु से गंतव्य तक और प्रत्येक समय निगरानी (ट्रैकिंग) की जाती है।
- कवरेज: यह भारत के प्रमुख बंदरगाहों, अंतर्देशीय कंटेनर डिप (ICDs), टोल प्लाजा और विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZs) के माध्यम से होने वाली 100% EXIM कंटेनर आवागमन की निगरानी करता है।
- अपग्रेड: 2025 में LDB 2.0 शुरू किया गया। इसमें हाई-सीज़ कार्गो ट्रैकिंग और मल्टी-मॉडल शिपमेंट विज़िबिलिटी जैसी नई सुविधाएं शामिल की गई हैं।
- महत्व:
- कंटेनरों के ट्रांजिट समय को कम करने में मदद करता है।
- आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं और कमियों को दूर करता है।
- वस्तुओं के आवागमन में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाता है।
- भारत की लॉजिस्टिक्स प्रणाली और व्यवसाय सुगमता को बेहतर बनाने में योगदान देता है।
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1 sourceस्वतंत्रता दिवस समारोह 2026 के दौरान पहली बार लाल किले पर ‘वंदे मातरम्’ प्रस्तुत किया गया।
वंदे मातरम् के बारे में
- रचना: ‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने संस्कृत और बंगाली के मिश्रण में की थी। इसे उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ (1882) में प्रकाशित किया गया।
- इसे पहली बार 1875 में ‘बंगदर्शन’ पत्रिका में प्रकाशित किया गया था।
- राष्ट्रीय गीत: 24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा ने ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान गौरव प्रदान किया।
- पहली सार्वजनिक प्रस्तुति: 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने पहली बार सार्वजनिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया।
- विषय और महत्व: ‘वंदे मातरम्’ मातृभूमि भारत को श्रद्धांजलि है। यह देशभक्ति, एकता और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
- विधिक संरक्षण: राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में हाल ही में संशोधन किया गया है। इसके माध्यम से ‘वंदे मातरम्’ को भी वही विधिक संरक्षण प्रदान किया गया है, जो वर्तमान में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को प्राप्त है।