चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली ऐसे पहले संघ राज्य क्षेत्र (UTs) बन गए हैं, जिन्होंने PM-GKAY के सभी पात्र लाभार्थियों को प्रोग्रामेबल CBDC के माध्यम से खाद्य सब्सिडी का प्रत्यक्ष लाभ अंतरण शुरू किया है।
- यह पहल पहले गुजरात और पुडुचेरी में किए गए पायलट प्रोजेक्ट पर आधारित है।
- यह केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं में CBDC का पहला बड़े पैमाने का उपयोग है।
- CBDC यानी डिजिटल रुपया (e₹) RBI द्वारा जारी की जाने वाली संप्रभु डिजिटल मुद्रा है।
CBDC आधारित DBT के बारे में
- डिजिटल वॉलेट में प्रत्यक्ष अंतरण: खाद्य सब्सिडी पारंपरिक बैंक खाते के बजाय लाभार्थी के डिजिटल रुपया वॉलेट में सीधे भेजी जाएगी।
- सरल तरीके से भुगतान: स्मार्टफोन में QR कोड और फीचर फोन में OTP के माध्यम से लेनदेन किया जा सकेगा।
खाद्य सब्सिडी में CBDC आधारित DBT का महत्व
- वित्तीय समावेशन: वॉलेट आधारित सरल लेनदेन के माध्यम से वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बढ़ेगी।
- बिचौलियों की भूमिका कम होगी: गरीबों के लिए संचालित सरकारी योजनाओं में बिचौलियों की भूमिका कम होगी और सरकार के “हर दाना, हर रुपया, हर अधिकार” के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
- पारदर्शिता और निगरानी: यह पहल सरकारी धनराशि के वितरण को पूरी तरह पारदर्शी और शुरू से अंत तक ट्रैक करने योग्य बनाएगी, साथ ही पारंपरिक सब्सिडी व्यवस्था में होने वाली धन की चोरी/रिसाव, गलत इस्तेमाल और नकद लेनदेन को कम करेगी।
- शुरू से अंत तक निगरानी: प्रौद्योगिकी एक अपरिवर्तनीय डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करती है, जिससे सरकारी धनराशि के वितरण की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से ट्रैक किया जा सकता है और वास्तविक पात्र लाभार्थियों को योजना से बाहर होने से बचाया जा सकता है।
- डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI): यह पहल दर्शाती है कि CBDC को भारत के DPI व्यवस्था के साथ सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में जोड़ा जा सकता है।
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का आधुनिकीकरण: स्मार्ट-PDS, निर्मल (NIRMAL), VLTS और सक्षम जैसी पहलों के साथ मिलकर PDS को अधिक पारदर्शी, कुशल और प्रभावी बनाने में सहायता करती है।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के बारे में
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