राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) दिशा-निर्देश
परिचय
NDMA ने सामूहिक मृत्यु की घटनाओं में पीड़ितों की पहचान के लिए पहली मानक संचालन प्रक्रिया जारी की है। इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य ऐसी घटनाओं से निपटने में मौजूद महत्वपूर्ण कमियों को दूर करना और शवों की पहचान, पंजीकरण और परिवारों को सम्मानजनक रूप से सौंपने के लिए आवश्यक कदम प्रदान करना है।
मुख्य सिफारिशें
- दंत अभिलेखों का उपयोग करके पीड़ितों की पहचान के लिए 'राष्ट्रीय दंत डेटा रजिस्ट्री' का निर्माण।
- किसी आपदा के काफी समय बाद शवों की पहचान करने के लिए फोरेंसिक पुरातत्व का उपयोग।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह दस्तावेज़ पिछले वर्ष हुई पांच प्रमुख त्रासदियों, जैसे अहमदाबाद में एयर इंडिया विमान दुर्घटना और तेलंगाना में रासायनिक विस्फोट, के संदर्भ में बनाया गया है। गणतंत्र दिवस पर जारी किया गया यह दस्तावेज़ 2001 के गुजरात भूकंप की 25वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में है।
कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियाँ
- शरीरों के विखंडन, अपघटन, विस्थापन या झुलस जाने के कारण पहचान संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
- शवगृहों के लिए अपर्याप्त स्थान और परिवहन/भंडारण संबंधी समस्याओं जैसी रसद संबंधी बाधाएं।
दिशा-निर्देश विकास
NDMA की यह पहल इंटरपोल के दिशा-निर्देशों से प्रेरित थी और इसमें नई फोरेंसिक विशेषज्ञताओं को शामिल किया गया है। प्रोफेसर जी राजेश बाबू ने मानवीय पहलू पर प्रकाश डालते हुए सामुदायिक रीति-रिवाजों के प्रति संवेदनशीलता और भावनात्मक समर्थन प्रदान करने पर जोर दिया।
प्रक्रिया और चरण
- अवशेषों की व्यवस्थित पुनर्प्राप्ति।
- मृत्यु के बाद प्राप्त आंकड़ों का संग्रह।
- मृत्यु से पहले के आंकड़ों का संग्रह, जैसे कि परिवारों से चिकित्सा अभिलेख।
- पहचान और परिवारों को जानकारी सौंपने के लिए आंकड़ों का मिलान करना।
भविष्य के कदम
NDMA की योजना देशभर में संगठनात्मक संरचनाएं स्थापित करने और प्रत्येक राज्य में विशेष टीमें बनाने के लिए फोरेंसिक क्षेत्रों के विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करने की है।