आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) का स्थानीयकरण (LOCALIZATION OF DISASTER RISK REDUCTION: DRR) | Current Affairs | Vision IAS

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आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) का स्थानीयकरण (LOCALIZATION OF DISASTER RISK REDUCTION: DRR)

28 Jan 2026
1 min

सुर्खियों में क्यों?

'पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) में समुदाय आधारित आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) सुदृढ़ीकरण राष्ट्रीय परियोजना' को मंज़ूरी दी गई है। इस परियोजना के लिए ₹507.37 करोड़ की राशि आवंटित की गई है।

समुदाय आधारित आपदा जोखिम न्यूनीकरण (CBDRR) के बारे में 

  • CBDRR का मतलब है कि आपदा से जुड़े खतरों की पहचान, विश्लेषण, आकलन, निगरानी, कार्यान्वयन और मूल्यांकन में स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी हो, ताकि आपदाओं से नुकसान कम किया जा सके और इनसे निपटने की समुदायों की की क्षमता बढ़े। 
  • लाभ: स्थानीय समुदायों की भागीदारी आधारित जोखिम का आकलन और योजना-निर्माण, समय पर और सही जानकारी का प्रसार, स्थानीय ज्ञान और परिस्थितियों की बेहतर समझ, आपदा से निपटने का पहला कदम स्थानीय समुदाय द्वारा। 
  • आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए सेंडाई फ्रेमवर्क (2015–30) में CBDRR पर विशेष ध्यान दिया गया है।

'समुदाय आधारित आपदा जोखिम न्यूनीकरण सुदृढ़ीकरण राष्ट्रीय परियोजना' के बारे में

  • उद्देश्य: बॉटम-अप दृष्टिकोण अपनाकर स्थानीय शासन में आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) को शामिल करना। इसमें पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को ग्राम स्तर पर आपदा से निपटने की तैयारी, नुकसान कम करने और आपदा-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की मुख्य कड़ी बनाया जाएगा।
  • संयुक्त क्रियान्वयन: यह परियोजना केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय (MoPR) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा मिलकर लागू की जाएगी।
  • विस्तार: पूरे भारत के 20 राज्यों के 81 आपदा-संवेदनशील जिलों को शामिल किया गया है।
  • क्लस्टर आधारित मॉडल: हर जिले में 20 ग्राम पंचायतों (GPs) को शामिल किया जाएगा।
  • मॉडल ग्राम पंचायतें: लगभग प्रत्येक राज्य से 1 ग्राम पंचायत (कुल 20) को "मॉडल ग्राम पंचायत" के रूप में विकसित किया जाएगा।
  • मुख्य क्षेत्रक: ये मॉडल ग्राम पंचायतें 6 विशेष आपदा जोखिमों (जैसे बाढ़, भूकंप आदि) पर केंद्रित होंगी।
    • ये पंचायतें योजना-निर्माण, अवसंरचना विकास और आपदा से निपटने की समुदाय की तैयारी में आपदा-रोधी क्षमता विकास को शामिल करने के लिए मॉडल के रूप में कार्य करेंगी।

स्थानीय स्तर पर आपदा प्रबंधन के लिए प्रमुख पहलें

  • आपदा प्रबंधन योजना (DMP-MoPR): आपदा प्रबंधन को ग्राम पंचायत विकास योजना (Gram Panchayat Development Plans: GPDP) में शामिल किया गया है, ताकि योजना बनाते समय आपदाओं को ध्यान में रखा जा सके।
  • आपदा मित्र योजना: स्थानीय पंचायतों की मदद के लिए समुदाय के स्वयंसेवकों को आपदा के समय बचाव और राहत कार्यों का प्रशिक्षण दिया जाता है।
  • डिजिटलीकरण: आपदा प्रबंधन की योजना बनाने, व्यय पर निगरानी रखने और पंचायतों तक तुरंत जानकारी पहुंचाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है। उदाहरण के लिए:
  • eग्रामस्वराज: पंचायती राज के लिए सरल कार्य-आधारित लेखा प्रणाली, जो विकेंद्रीकृत योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करती है।
  • ग्राम मानचित्र: पंचायतों की योजना बनाने और निर्णय लेने वाला स्थानिक मानचित्रण उपकरण। 
  • सचेतकॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) पर आधारित राष्ट्रीय आपदा चेतावनी पोर्टल।
    • CAP आपातकालीन चेतावनी और जन सूचना के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक प्रारूप है। इसे अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (International Telecommunication Union: ITU) ने अपनाया है।

आगे की राह

  • आपदा जोखिम न्यूनीकरण को मुख्यधारा में लाना: आपदा प्रतिरोधकता प्रत्येक परियोजना का सामान्य हिस्सा होना चाहिए, जैसे सड़कें, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र आधारित परियोजनाएं। 
  • प्रकृति आधारित समाधान: मैंग्रोव वन, आर्द्रभूमि और जंगलों की पुनर्बहाली से जल सुरक्षा और जैव विविधता की रक्षा होती है। ये दीर्घकाल में ग्रामीण क्षेत्रों को आपदा से निपटने में सक्षम बनाती हैं। 
  • विस्तार: 20 मॉडल ग्राम पंचायतों से मिले अनुभवों को देश की 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों तक प्रसारित किया जाना चाहिए।
  • वित्तीय सहायता: राज्य आपदा मोचन निधि (SDMF) से धनराशि का सही आवंटन और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
  • प्रौद्योगिकियों का एकीकरण: पंचायती राज संस्थाओं को उपयोग-अनुकूल मोबाइल ऐप, उपग्रह आधारित पूर्व चेतावनी प्रणाली उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, इनके उपयोग के लिए प्रशिक्षण दिया जाए।

स्थानीय सर्वोत्तम अभ्यास 

  • पारितंत्र आधारित आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Eco-DRR): इसमें प्रकृति आधारित समाधान अपनाए जाते हैं, जहाँ पारितंत्र, आपदाओं के बढ़ते प्रभावों के खिलाफ प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करते हैं। इसमें समुदाय की बड़ी भूमिका होती है।
    • उदाहरण: ओडिशा की तामपारा आर्द्रभूमि और बिहार की कावर झील जल-संबंधी आपदाओं के खिलाफ प्राकृतिक सुरक्षा कवच प्रदान करती हैं।

केस स्टडी: पोझुथाना पंचायत, केरल

  • 2018 के केरल बाढ़ आपदा के दौरान स्थानीय शासन की अच्छी तैयारी, त्वरित कार्यवाही और रोकथाम उपायों से राहत और पुनर्वास कार्य बेहतर तरीके से संपन्न हुए।
  • उदाहरण: आपदा जोखिम मानचित्रण, ग्राम स्तर पर आपदा मोचन टीमों का गठन, आपदा समन्वय के लिए आपातकालीन संचालन केंद्र (EOC) की स्थापना, आदि।

 

 

निष्कर्ष

राष्ट्रीय परियोजना को मिला यह प्रोत्साहन पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय समुदायों को "आपदा-प्रतिरोधी" बनाने की दिशा में एक सही कदम है। आपदा जोखिम न्यूनीकरण में स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को सशक्त करने से आपदा प्रबंधन केवल आपदा के बाद की कार्रवाई न रहकर, ग्राम स्तर पर एक सक्रिय और संधारणीय "जीवन पद्धति" बन जाएगा।

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