संसद में कृषि संबंधी संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई | Current Affairs | Vision IAS
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कृषि संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में निम्नलिखित चिंताओं को रेखांकित किया है: 

  • बजटीय आवंटन में लगातार गिरावट: केंद्रीय कृषि मंत्रालय का बजटीय आवंटन कुल केंद्रीय व्यय के प्रतिशत के रूप में 2021-22 के 3.53% से घटकर 2025-26 में 2.51% हो गया है।
  • आवंटित राशि का पूरा उपयोग नहीं होना: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (DA&FW) ने 2024-25 में आवंटित धनराशि का केवल 59.84% ही उपयोग किया है।
  • फसल अपशिष्ट प्रबंधन में समस्या: फसल अपशिष्टों का बायोफ्यूल उत्पादन या कम्पोस्टिंग के रूप में उपयोग के लिए विकसित बाजारों की कमी है। ये किसानों को आय के अतिरिक्त स्रोत प्रदान कर सकते हैं। 

रिपोर्ट में  की गई मुख्य सिफारिशें

  • विभाग के नाम में बदलाव: 'कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (DA&FW)' का नाम बदलकर 'कृषि, किसान एवं कृषि श्रमिक कल्याण विभाग' किया जाना चाहिए। इससे कृषि क्षेत्रक में कृषि श्रमिकों की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया जा सकेगा।
    • पीएम-किसान सम्मान निधि योजना का लाभ कृषि श्रमिकों को भी दिया जाना चाहिए।
  • कृषि श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय न्यूनतम जीवन-निर्वाह वेतन आयोग (National Commission for Minimum Living Wages for Farm Labourers) की स्थापना की जानी चाहिए: इससे कृषि श्रमिकों की मजदूरी में असमानता को दूर करने और उनके जीवन स्तर में सुधार करने में मदद मिलेगी।
  • सभी जैविक (ऑर्गेनिक) फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की घोषणा की जानी चाहिए: इससे किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
  • लघु कृषकों के लिए "निःशुल्क और अनिवार्य" फसल बीमा योजना शुरू की जानी चाहिए: इसका लाभ उन लघु कृषकों को दिया जाना चाहिए, जिनके पास दो हेक्टेयर या उससे कम भूमि है।
  • फसल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए बहुआयामी रणनीति अपनाई जानी चाहिए: इन रणनीतियों में नीतिगत उपाय, किसान शिक्षा, तकनीकी नवाचार और वित्तीय प्रोत्साहन देना शामिल हैं।
  • अन्य सिफारिशें: 
    • कृषि क्षेत्रक के लिए बजटीय आवंटन बढ़ाया जाना चाहिए, 
    • कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) को सशक्त बनाना चाहिए, 
    • कृषि से संबंधित योजनाओं के प्रचार-प्रसार हेतु प्रभावी विज्ञापन एवं प्रचार अभियान चलाना चाहिए आदि। 
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