लोकपाल की पूर्ण पीठ ने अपना नया आदर्श वाक्य (मोटो) अपनाया है। यह मोटो है; "नागरिक सशक्तिकरण, भ्रष्टाचार उजागरीकरण" (Empower Citizens, Expose Corruption).
लोकपाल के बारे में
- कानूनी प्रावधान:
- लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के तहत लोकपाल की स्थापना की गई है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक पद धारण करने वाले लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करना है।
- इस अधिनियम के प्रावधान भारत के प्रधान मंत्री तथा भारत के भीतर और भारत के बाहर पदस्थापित भारतीय लोक सेवकों पर भी लागू होते हैं।
- संरचना:
- एक अध्यक्ष और आठ सदस्य।
- अध्यक्ष और सदस्यों को नियुक्ति के लिए निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना चाहिए:
- उन्हें संसद या राज्य विधान सभा के सदस्य नहीं होना चाहिए।
- उन्हें किसी अपराध में दोषी नहीं ठहराया गया हो।
- उनकी आयु कम-से-कम 45 वर्ष होनी चाहिए।
- अध्यक्ष: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI), या सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, या कोई प्रतिष्ठित व्यक्ति; लोकपाल के अध्यक्ष नियुक्त हो सकते हैं।
- कार्यकाल: पांच वर्ष या 70 वर्ष की आयु होने तक (जो भी पहले हो)।
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1 sourceनई दिल्ली में फ्रांसीसी दूतावास का भारतीय कर्मचारी, शेंगेन वीजा के नाम पर सैकड़ों लोगों से ठगी करता पकड़ा गया है।
शेंगेन क्षेत्र के बारे में
- शेंगेन क्षेत्र में कुल 29 देश शामिल हैं। इनमें यूरोपीय संघ (EU) के 25 सदस्य देश तथा 4 ऐसे देश शामिल हैं जो EU के सदस्य नहीं हैं। ये 4 देश हैं; आइसलैंड, नार्वे, स्विट्जरलैंड और लिकटेंस्टीन।
- ये देश आपसी सहयोग को बढ़ावा देते हैं, जिससे उन्हें वे लाभ प्राप्त होते हैं जो अकेले रहकर प्राप्त करना संभव नहीं है।
- इन देशों की सीमाओं पर सदस्य देशों के नागरिकों की जांच नहीं की जाती है।
- शेंगेन व्यवस्था वास्तव में यूरोप के 3.2 करोड़ व्यवसायों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाती है। साथ ही यह यूरोपीय एकल बाजार (Single Market) की स्थापना में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।
भारतीय थल सेना की एक टुकड़ी 22वें बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास 'खान क्वेस्ट' में भाग लेने के लिए मंगोलिया के उलानबटोर पहुंची है। इस सैन्य अभ्यास का आयोजन 14 से 28 जून 2025 तक किया जाएगा।
खान क्वेस्ट अभ्यास के बारे में
- शुरुआत: 2003 में इसकी शुरुआत संयुक्त राज्य अमेरिका और मंगोलिया के बीच द्विपक्षीय अभ्यास के रूप में हुई थी।
- पहला बहुपक्षीय खान क्वेस्ट अभ्यास साल 2006 में शुरू हुआ।
- उद्देश्य: संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VII के तहत भारतीय सशस्त्र बलों को शांति स्थापना मिशनों के लिए तैयार करना।
- संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VII में शांति के समक्ष खतरे, शांति भंग होने की स्थितियां और आक्रामक कार्रवाइयों से निपटने हेतु कार्यवाही का प्रावधान है।
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1 sourceकेंद्रीय वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि UPI पेमेंट्स पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की कोई योजना नहीं है।
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के बारे में
- MDR वह शुल्क है जो बैंक, व्यापारियों से रियल टाइम में पेमेंट प्रोसेस करने के बदले लेते हैं।
- पहले, व्यापारी कार्ड पेमेंट्स पर कुल लेन-देन मूल्य का 1% MDR शुल्क देते थे।
- लेकिन 2020 में, सरकार ने देश में डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने के लिए MDR शुल्क माफ कर दिया।
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1 sourceभारत ने यूरोपीय संघ (EU) के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) पर "गहरी आपत्तियां" व्यक्त की हैं।
CBAM के बारे में
- यह यूरोपीय संघ का एक साधन है, जिसका उद्देश्य यूरोपीय संघ में प्रवेश करने वाले उच्च कार्बन उत्सर्जन वाली वस्तुओं (जैसे- स्टील, एल्यूमीनियम, सीमेंट आदि) पर कर लगाना है। यह कर इन वस्तुओं के उत्पादन के दौरान उत्सर्जित कार्बन की उच्च मात्रा को हतोत्साहित करके गैर-यूरोपीय संघ के देशों में स्वच्छ औद्योगिक उत्पादन को बढ़ावा देगा।
- यह यूरोपीय संघ के ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को 2030 तक कम-से-कम 55% तक कम करने के लक्ष्य वाली "फिट फॉर 55" रणनीति का हिस्सा है।
- प्रवर्तन: यह 2026 से लागू होगा, जबकि इसका ट्रांजिशनल चरण 2023 से 2025 के बीच चलेगा।
गंगोत्री में, भागीरथी इको सेंसिटिव ज़ोन (BESZ) के भीतर एक ठोस अपशिष्ट दहन करने वाली मशीन की स्थापना ने सामाजिक कार्यकर्ता समूहों को चिंतित किया है।
- ये पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र होते हैं, जो संरक्षित क्षेत्रों और वन्यजीव गलियारों के आस-पास स्थित होते हैं। इन क्षेत्रों को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत अधिसूचित किया जाता है।
भागीरथी इको सेंसिटिव ज़ोन (BESZ) के बारे में
- यह गंगा नदी के सबसे प्राचीन क्षेत्र जो गोमुख और उत्तरकाशी शहर के बीच 4179.59 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, के संरक्षण के लिए बनाया गया है।
- इसकी अधिसूचना 2012 में जारी की गई थी, जिसमें यह निर्देश दिया गया था कि उत्तराखंड राज्य सरकार को जोनल मास्टर प्लान (ZMP) तैयार करना होगा तथा इस मास्टर प्लान को एक निगरानी समिति की देख-रेख में लागू किया जाना चाहिए।
हाल ही में दक्षिण कश्मीर में यूरेशियन ऊदबिलाव की एक दुर्लभ उपस्थिति देखी गई है।
यूरेशियन ऊदबिलाव (लुट्रा-लुट्रा) के बारे में
- यह एक अर्ध-जलीय स्तनधारी जीव है जो यूरेशिया और अफ्रीका के मागरेब क्षेत्र में पाया जाता है।
- वितरण: यह 3 महाद्वीपों (यूरोप, एशिया और अफ्रीका) में पाया जाता है।
- भारत में, यह उत्तरी, पूर्वोत्तर और दक्षिणी भारत में पाया जाता है।
- विशेषताएँ
- इसका शरीर पतला और लचीला होता है, भूरे रंग की चिकनी फर, मोटी पूंछ और छोटे पैर होते हैं।
- जलीय जीवन-शैली के लिए अनुकूलन: इसके जालीदार पैर इसे जल में तैरने की क्षमता प्रदान करते हैं; तथा जल में रहते समय यह जीव कानों और नाक को बंद कर सकता है।
- इसके शरीर पर बहुत घना, छोटा फर होता है। यह फर गर्म हवा को अपने अंदर संग्रहित कर लेता है जिससे ऊदबिलाव को सर्दी नहीं लगती।
- संरक्षण स्थिति
- IUCN स्थिति: नियर थ्रेटेंड I
- CITES: परिशिष्ट I
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1 sourceफ्रांस की AI स्टार्टअप मिस्ट्रल ने यूरोप का पहला 'रीजनिंग-बेस्ड लैंग्वेज मॉडल' लॉन्च किया है।
- लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) AI सिस्टम हैं। ये मानव भाषा को समझने और उत्पन्न करने के लिए विशाल मात्रा में टेक्स्ट डेटा को प्रोसेस करते हैं।
रीजनिंग-बेस्ड लैंग्वेज मॉडल के बारे में
- RLMs ने एडवांस्ड रीजनिंग तंत्र के साथ LLM का विस्तार करके AI की समस्या-समाधान क्षमताओं को फिर से परिभाषित किया है।
- ये मॉडल “चेन ऑफ थॉट” तकनीकों का उपयोग करते हैं। इसमें किसी समस्या को चरण-दर-चरण विभाजित करके हल किया जाता है। इससे समाधान अधिक सटीक और प्रसंग-सम्मत होता है।
- यह पारंपरिक LLMs से अलग हैं जो मुख्य रूप से विशाल डेटासेट और कम्प्यूटेशनल शक्ति पर निर्भर करते हैं।
- चिंताएं: उच्च लागत, मालिकाना प्रकृति और जटिल संरचना।
हाल ही में दुर्लभ ‘मेजर लूनर स्टैंडस्टिल’ घटना देखी गई। यह ‘स्ट्रॉबेरी मून’ के साथ आकाश में एक अद्भुत चंद्र दृश्य के रूप में प्रकट हुई।
- जून की पूर्णिमा को स्ट्रॉबेरी मून कहा जाता है। यह नाम उत्तरी अमेरिका में स्ट्रॉबेरी की फसल के मौसम पर आधारित है।
मेजर लूनर स्टैंडस्टिल’ के बारे में
- यह घटना तब घटित होती है जब चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी के सापेक्ष अधिकतम झुकाव (tilt) पर होती है।
- इससे चंद्रमा क्षितिज पर अपने सबसे दूरस्थ बिंदुओं पर उगता और अस्त होता है। इसके परिणामस्वरूप, उत्तरी गोलार्ध में चंद्रमा आसमान में सामान्य से कम ऊंचाई पर दिखाई देता है।
- यह एक दुर्लभ खगोलीय घटना है जो लगभग हर 18.6 वर्षों में एक बार घटित होती है।